गुजरात, जो विकास के कई पैमानों पर आगे रहता है, अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplant) के मामले में दिल्ली, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों से लगातार पिछड़ रहा है। राज्य में जीवन रक्षक अंगों की तत्काल आवश्यकता वाले मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन अंगदान की रफ्तार बेहद धीमी है।
स्थानीय दैनिक ‘संदेश’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच अंग प्रत्यारोपण के मामले में गुजरात देश में छठे स्थान पर है। पिछले पांच वर्षों में, गुजरात में अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची (Waiting List) में शामिल 85 मरीजों की मौत समय पर अंग न मिल पाने के कारण हो गई।
अंगदान जागरूकता के लिए नहीं मिली कोई मदद
इसी अवधि के दौरान पूरे देश में 2,800 से अधिक मरीजों ने अंगों के इंतजार में अपनी जान गंवाई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले छह वर्षों में गुजरात को अंगदान जागरूकता अभियान चलाने के लिए ‘राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम’ (NOTOP) के तहत एक भी रुपये की वित्तीय सहायता नहीं मिली है।
वेटिंग लिस्ट में गुजरात देश में दूसरे नंबर पर
वर्तमान में, गुजरात में कुल 9,592 मरीज किडनी, लिवर, हार्ट, फेफड़े और अग्न्याशय (Pancreas) जैसे अंगों का इंतजार कर रहे हैं। अंगदान में पिछड़े होने के बावजूद, मरीजों की वेटिंग लिस्ट के मामले में गुजरात देश में दूसरे स्थान पर है।
8 दिसंबर, 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार:
- सबसे अधिक 7,405 मरीज किडनी प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं।
- 2,019 मरीज लिवर प्रत्यारोपण की कतार में हैं।
- 117 मरीज ऐसे हैं जिनका दिल बेहद कमजोर हो चुका है और उन्हें हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत है।
- 19 मरीज फेफड़ों और 32 मरीज अग्न्याशय प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं।
पारदर्शिता पर सवाल और शराबबंदी की हकीकत
गुजरात में सही मरीज को सही अंग मिले, इसके लिए एक पारदर्शी प्रणाली की मांग पहले भी उठती रही है। पूर्व में अहमदाबाद सिविल मेडिसिटी कैंपस के किडनी अस्पताल पर गंभीर आरोप लगे थे कि आधिकारिक प्रतीक्षा सूची के बजाय विदेशी नागरिकों सहित अन्य मरीजों को अंग आवंटित किए गए थे।
राज्य में लिवर फेलियर के मामलों में भी तेजी से वृद्धि हुई है। पिछले पांच वर्षों में 749 मरीजों का लिवर ट्रांसप्लांट किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि लिवर खराब होने के अधिकतर मामले अत्यधिक शराब के सेवन के कारण आ रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि गुजरात में शराबबंदी काफी हद तक सिर्फ कागजों पर है।
इसके साथ ही, राज्य में 3,769 किडनी ट्रांसप्लांट किए गए हैं। अनियंत्रित मधुमेह (Diabetes), नशीली दवाओं का दुरुपयोग और शराब की लत किडनी फेलियर के मुख्य कारण माने जाते हैं। किडनी फेल होने पर मरीज डायलिसिस या ट्रांसप्लांट पर निर्भर हो जाते हैं। हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग ने देश में अंगदान और प्रत्यारोपण की स्थिति से संबंधित अद्यतन आंकड़े जारी किए हैं।
हार्ट अटैक: मौत का सबसे बड़ा कारण
गुजरात में हार्ट अटैक और उससे होने वाली मौतें चिंता का एक प्रमुख विषय बन गई हैं। अब राज्य में मृत्यु का प्रमुख कारण हार्ट अटैक है। स्थानीय दैनिक ‘गुजरात समाचार’ की रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में हार्ट अटैक से 8,689 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 74,777 हो गया।
- पिछले पांच वर्षों में राज्य में लगभग 2.97 लाख लोगों की मौत हार्ट अटैक और हृदय रोगों से हुई है।
- औसतन, गुजरात में हर दिन 205 लोग दिल की बीमारी या हार्ट अटैक से अपनी जान गंवा रहे हैं।
- आंशिक या पूर्ण हार्ट अटैक से होने वाली मौतों में पांच साल में नौ गुना वृद्धि हुई है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2021 की तुलना में (जब 93,797 लोगों की मौत हुई थी), 2023 में हृदय रोग से होने वाली मौतों में थोड़ी गिरावट आई है। लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 2024 और 2025 में ये आंकड़े और बढ़ सकते हैं।
अन्य बीमारियों और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति
गुजरात में अन्य कारणों से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी डराने वाला है:
- एक साल में श्वसन और अस्थमा संबंधी समस्याओं से 24,853 लोगों की मौत हुई (औसतन 98 लोग प्रतिदिन)।
- कैंसर से 18,371 लोगों ने जान गंवाई (औसतन 50 लोग प्रतिदिन)।
- वाहन दुर्घटनाओं में 7,626 लोगों की मौत हुई।
कुल मिलाकर, गुजरात में हर साल विभिन्न कारणों से लगभग 2.35 लाख लोगों की मौत होती है। रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 में राज्य में 5.23 लाख लोगों की मौत हुई, जो 2021 में बढ़कर 7.25 लाख हो गई।
स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के बावजूद, जनस्वास्थ्य की चिंताएं बरकरार हैं। एक साल में हैजा (Cholera) से 96 और डायरिया से 281 मौतें दर्ज की गईं, जो राज्य भर में बुनियादी स्वास्थ्य और स्वच्छता प्रणालियों में मौजूद खामियों को उजागर करती हैं।
तनाव और ईएमआई भी हार्ट अटैक की वजह: डॉ. बारोट
इस गंभीर स्थिति पर आम आदमी पार्टी (AAP) गुजरात के प्रवक्ता डॉ. करण बारोट ने कहा कि इस विषय पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। पेशे से डॉक्टर, डॉ. बारोट ने ‘वाइब्स ऑफ इंडिया’ को बताया कि राज्य सरकार को एक जागरूकता अभियान शुरू करना चाहिए ताकि यह उजागर किया जा सके कि हम अंगदान में अन्य राज्यों से पीछे क्यों हैं।
हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों पर डॉ. बारोट ने कहा कि यह तनाव और मासिक लोन की किस्तों (EMI) के कारण भी संभव है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भले ही लोगों की सैलरी नहीं बढ़ रही हो, लेकिन वे महंगे मोबाइल फोन के लिए भारी ईएमआई चुका रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि तनाव से संबंधित मुद्दों पर भी जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए।
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