गांधीनगर: गुजरात सरकार के खजाने में स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क से होने वाली आय में भारी इजाफा हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य के इस राजस्व में सालाना आधार पर 30 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा 19,102.58 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो 2024-25 के 14,706 करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग 4,400 करोड़ रुपये अधिक है।
संपत्ति दस्तावेजों के पंजीकरण की बात करें तो, 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के दौरान राज्य में 18.95 लाख संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन हुआ। इसके ठीक पिछले साल यह संख्या 18.77 लाख थी। दस्तावेजों के पंजीकरण में यह मामूली वृद्धि है, लेकिन राजस्व में आया भारी उछाल यह स्पष्ट करता है कि इस साल पंजीकृत संपत्तियों का मूल्य पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक रहा है।
अधिकारियों और रियल एस्टेट क्षेत्र के जानकारों ने इस शानदार वृद्धि का मुख्य कारण जंत्री दरों (Jantri Rates) में हुई बढ़ोतरी को बताया है। एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक, सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में जंत्री दरों को दोगुना कर दिया था।
यही वजह है कि संपत्ति पंजीकरण की संख्या में मामूली वृद्धि के बावजूद, हाल ही में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के दौरान स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क से होने वाली वास्तविक आय में इतनी बड़ी बढ़ोतरी देखी गई है।
इस वित्तीय वर्ष (2025-26) में प्राप्त किया गया यह राजस्व, राज्य सरकार द्वारा निर्धारित 19,800 करोड़ रुपये के अनुमानित लक्ष्य के बेहद करीब है।
राजस्व और संपत्ति पंजीकरण के मामले में अहमदाबाद जिला पूरे राज्य में अव्वल रहा। इस वर्ष जिले में कुल 3,76,859 संपत्ति दस्तावेजों का पंजीकरण हुआ, जिससे सरकारी खजाने में स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क के रूप में 4,379.51 करोड़ रुपये की आय हुई।
इस सूची में सूरत दूसरे स्थान पर रहा, जहां 2,89,544 संपत्तियों का पंजीकरण हुआ। इसके बाद राजकोट में 1,54,211, वडोदरा में 1,32,475 और राजधानी गांधीनगर में 1,04,175 दस्तावेजों का रजिस्ट्रेशन किया गया। वहीं, राज्य के डांग जिले में सबसे कम, मात्र 43 संपत्तियों का पंजीकरण दर्ज किया गया है।
रियल एस्टेट उद्योग के प्रतिनिधियों का मानना है कि ये आंकड़े इस क्षेत्र में लगातार बनी हुई मजबूत मांग को दर्शाते हैं। क्रेडाई (CREDAI) गुजरात के अध्यक्ष तेजस जोशी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से गुजरात के रियल एस्टेट बाजार में जबर्दस्त मांग देखने को मिल रही है। इस दौरान बड़ी संख्या में प्रोजेक्ट पूरे हुए हैं और बिक्री के दस्तावेज (सेल डीड) निष्पादित किए गए हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि कॉमनवेल्थ गेम्स की घोषणा के बाद जमीन के कई बड़े और महंगे सौदे भी संपन्न हुए हैं। तेजस जोशी के मुताबिक, आवासीय, वाणिज्यिक (कमर्शियल) और औद्योगिक, तीनों ही क्षेत्रों में संपत्तियों की मांग काफी मजबूत रही है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क का यह कलेक्शन इसी तरह मजबूत बना रहेगा।
हालांकि, कुछ रियल एस्टेट विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि 2025-26 में पंजीकृत हुए कई सेल डीड वास्तव में उन सौदों से जुड़े हैं जो पिछले वर्षों में ही तय हो गए थे।
इसके अलावा, सूत्रों ने हालिया गुजरेरा (GujRERA) डेटा की ओर भी इशारा किया है। इस डेटा से पता चलता है कि राज्य में नए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स का पंजीकरण गिरकर कोविड-19 महामारी के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया है।
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