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गुजरात सर्वे 2026: क्या कांग्रेस हो रही है रेस से बाहर? अब भाजपा बनाम ‘आप’ की सीधी टक्कर के संकेत

| Updated: January 20, 2026 16:18

2026 के सर्वे में बड़ा खुलासा: वोट शेयर में कांग्रेस को पछाड़कर दूसरे नंबर पर आई आम आदमी पार्टी, जानिए 2027 चुनाव के लिए क्या हैं नए सियासी समीकरण।

गुजरात की राजनीति में हवा का रुख बदलता नजर आ रहा है। 2026 के एक ताजा सर्वेक्षण ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इन नए आंकड़ों ने चुनावी रणभूमि की एक ऐसी तस्वीर पेश की है, जो पारंपरिक समीकरणों को पूरी तरह से बदल सकती है।

ताजा रुझान बताते हैं कि जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब भी मजबूती के साथ शीर्ष पर कायम है, वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) मुख्य चुनौती बनकर उभर रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कांग्रेस, जो दशकों से राज्य में मुख्य विपक्षी दल थी, अब हाशिये पर खिसकती दिख रही है।

यह सर्वे संकेत देता है कि गुजरात का अगला विधानसभा चुनाव, विशेष रूप से शहरी और संवेदनशील क्षेत्रों में, भाजपा और ‘आप’ के बीच सीधी लड़ाई में तब्दील हो सकता है।

सर्वे के नतीजे: विपक्ष में बड़ा उलटफेर

‘WeePreside’ ने ‘CIF’ के सहयोग से “पल्स ऑफ गुजरात 2026” (Pulse of Gujarat 2026) नाम से यह सर्वेक्षण किया है। इसके नतीजे बताते हैं कि राज्य भर में आम आदमी पार्टी की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति कुछ इस प्रकार है:

  • भाजपा (BJP): लगभग 49.5 प्रतिशत वोट शेयर के साथ सबसे आगे।
  • आम आदमी पार्टी (AAP): 24.8 प्रतिशत वोट शेयर के साथ दूसरे स्थान पर।
  • कांग्रेस (Congress): 17.3 प्रतिशत वोट शेयर के साथ तीसरे स्थान पर।

यह एक ऐतिहासिक बदलाव है। सर्वे के मुताबिक, आप ने मतदाता पसंद के मामले में कांग्रेस को पछाड़ दिया है। यह दर्शाता है कि विपक्ष की राजनीति में एक नया ध्रुवीकरण हो रहा है, जहाँ वह जगह जो कभी कांग्रेस की थी, अब धीरे-धीरे ‘आप’ के कब्जे में जा रही है।

तेजी से बदलता सियासी ग्राफ

पिछले कुछ चुनावों पर नजर दौड़ाने से यह बदलाव और भी स्पष्ट हो जाता है।

  • 2017 विधानसभा चुनाव: कांग्रेस को करीब 40% वोट मिले थे।
  • 2022 विधानसभा चुनाव: यह आंकड़ा गिरकर 27% रह गया।
  • 2026 सर्वे: अब यह और गिरकर 17.3% पर आ गया है। यानी 2022 के बाद से इसमें लगभग 10 प्रतिशत की और गिरावट आई है।

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी की रफ्तार हैरान करने वाली है। 2022 में पहली बार गुजरात विधानसभा चुनाव लड़ने वाली ‘आप’ ने करीब 13% वोट हासिल किए थे। मौजूदा अनुमान बताते हैं कि महज तीन साल के भीतर उनका समर्थन लगभग दोगुना हो गया है। विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा अब ‘आप’ की तरफ शिफ्ट हो रहा है।

क्षेत्रवार समीकरण और केजरीवाल का दावा

सर्वे का क्षेत्रवार डेटा भी इस ट्रेंड की पुष्टि करता है। सौराष्ट्र-कच्छ (Saurashtra-Kutch) क्षेत्र में, जहाँ पिछले कुछ वर्षों में भाजपा की पकड़ थोड़ी ढीली होने की चर्चा थी, वहाँ ‘आप’ अपनी जड़ें जमा रही है। उत्तर और मध्य गुजरात में भले ही भाजपा का दबदबा कायम है, लेकिन कई शहरी इलाकों में ‘आप’ कांग्रेस से काफी आगे निकलती दिख रही है। अब मतदाता ‘आप’ को भाजपा के विकल्प के तौर पर दूसरी नहीं, बल्कि पहली पसंद मानने लगे हैं।

जमीनी हकीकत भी इन आंकड़ों से मेल खाती दिख रही है। हाल ही में अहमदाबाद में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन को संबोधित किया। वहां उन्होंने साफ कहा, “अब गुजरात के लोगों के मन से डर निकल गया है।”

भविष्य के प्रति आश्वस्त दिखते हुए उन्होंने दावा किया, “2027 में गुजरात में सत्ता बदलने वाली है और आम आदमी पार्टी सरकार में वो बदलाव लाएगी।”

केजरीवाल ने पार्टी नेताओं की गिरफ्तारी के मुद्दे पर भी कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा, “अगर और लोगों को जेल भेजा जाए, तो डरने की जरूरत नहीं है। यह अन्याय के खिलाफ लड़ाई है और जनता इसका जवाब देगी।”

पार्टियों की प्रतिक्रिया: कौन क्या बोला?

इस सर्वे पर प्रतिक्रिया देते हुए गुजरात आप इकाई के अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने वाइब्स ऑफ इंडिया से कहा कि जनता में भाजपा के प्रति निराशा बढ़ रही है और कांग्रेस अब कोई विकल्प नहीं बची है।

उन्होंने कहा, “भले ही ‘आप’ अभी दूसरे नंबर पर है, लेकिन जिस तरह हम जनता तक पहुंच रहे हैं, हमें पूरा भरोसा है कि 2027 के चुनाव तक हम सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेंगे।”

वहीं, कांग्रेस ने इन नतीजों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी प्रवक्ता हिरेन बैंकर का कहना है कि गुजरात में अब भी दो-पक्षीय राजनीति ही है और कांग्रेस ही दूसरे नंबर की पार्टी है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘आप’ के पास कोई विचारधारा नहीं है और वे केवल चुनाव के समय ही सक्रिय होते हैं।

राजनीतिक विश्लेषक हेमंत शाह ने भी सर्वे की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि कांग्रेस की रैलियों में भी ‘आप’ के बराबर ही भीड़ जुट रही है। शाह ने कहा, “यह जानना जरूरी है कि सर्वे कहां हुआ, कब हुआ और कितने लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। हो सकता है कि यह सर्वे भाजपा द्वारा ही फ्लोट किया गया हो।”

उनका मानना है कि ऐसे नैरेटिव यह बताते हैं कि भाजपा के प्रभुत्व को चुनौती देने के लिए कांग्रेस और ‘आप’ को साथ आने की जरूरत है।

2027 की ओर बढ़ता गुजरात

तमाम दावों और प्रतिदावों के बीच, एक बात साफ है—भले ही भाजपा अभी भी नियंत्रण में है, लेकिन गुजरात में विपक्ष का चेहरा बदल रहा है। यह सर्वे और हालिया गतिविधियां इशारा करती हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ‘आप’ खुद को भाजपा के प्रमुख चैलेंजर के रूप में स्थापित कर रही है।

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