अहमदाबाद/गांधीनगर: गुजरात को ‘ड्राई स्टेट’ (शराबबंदी वाला राज्य) कहा जाता है और यहाँ शराबबंदी को अक्सर नैतिक शासन के प्रमाण के रूप में पेश किया जाता है। लेकिन राज्य की सबसे प्रतिष्ठित गुजरात यूनिवर्सिटी (Gujarat University) के कैंपस से जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे एक अलग ही कहानी बयां कर रही हैं। मंगलवार को यूनिवर्सिटी के बॉयज हॉस्टल कॉम्प्लेक्स और पास ही स्थित रिसर्च स्कॉलर्स क्वार्टर से 100 से अधिक शराब की बोतलें बरामद की गईं।
इस घटना ने न केवल छात्र समुदाय को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि यूनिवर्सिटी की सुरक्षा व्यवस्था की पोल भी खोल दी है।
हॉस्टल की छत और झाड़ियों में मिला ‘जखीरा’
नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के सदस्यों ने जब हॉस्टल परिसर का निरीक्षण किया, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। एनएसयूआई के मुताबिक, अकेले डी-ब्लॉक (D Block) की छत पर ही 10 से ज्यादा बोतलें मिलीं। इसके अलावा, हॉस्टल के आसपास की झाड़ियों, खुले इलाकों और नवनिर्मित स्कॉलर्स आवासों के पास से भी बड़ी मात्रा में खाली बोतलें बरामद की गईं।
वाइब्स ऑफ इंडिया को मिली जानकारी के अनुसार, इतनी बड़ी तादाद में बोतलों का मिलना इस बात का संकेत है कि इन इलाकों में शराब का सेवन और सप्लाई लंबे समय से एक नियमित गतिविधि बनी हुई है।
प्रशासन की दलील और छात्रों का गुस्सा
जांच प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि ये बोतलें बाहरी लोगों द्वारा फेंकी गई हो सकती हैं और शराब का असली स्रोत कैंपस के बाहर हो सकता है। हालांकि, छात्र और फैकल्टी इस तर्क से आश्वस्त नहीं हैं।
इस खुलासे के बाद स्वाभाविक रूप से छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। एनएसयूआई के सदस्यों ने वाइस चांसलर (VC) की लॉबी और रजिस्ट्रार के कार्यालय के बाहर इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन किया। जानकारी के मुताबिक, यह प्रदर्शन उग्र नहीं था; छात्रों ने प्रतीकात्मक रूप से कुर्सियों पर खाली बोतलें और पोस्टर रखकर अपना विरोध दर्ज कराया।
एनएसयूआई ने मांग की है कि मौजूदा सुरक्षा एजेंसियों को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए, पुलिस शिकायत दर्ज हो और जिम्मेदारी तय की जाए। छात्र नेताओं का कहना है कि प्रशासन अब इसे ‘रूटीन समस्या’ बताकर पल्ला नहीं झाड़ सकता।
लापरवाही का इतिहास और प्रशासनिक चूक
यह पहली बार नहीं है जब कैंपस में शराब की बोतलें मिली हैं। इससे पहले भी हॉस्टल के पास या सुनसान कोनों में इक्का-दुक्का बोतलें मिलती रही हैं। एक बार तो शिक्षा मंत्री के दौरे से पहले सफाई अभियान के दौरान भी बोतलें मिली थीं, लेकिन उन मामलों को छोटी-मोटी चूक बताकर रफा-दफा कर दिया गया था।
लेकिन इस बार सवाल मात्रा का है। सैकड़ों एकड़ में फैली सरकारी यूनिवर्सिटी के भीतर इतनी भारी मात्रा में शराब का जखीरा प्रशासन की नाक के नीचे कैसे पहुंच गया?
छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी के मुख्य प्रशासनिक कार्यालय गेट के पास हैं, जबकि हॉस्टल वहां से काफी दूर हैं। दूरी की वजह से हॉस्टल का इलाका एक ‘उपेक्षित जोन’ (Neglected Zone) बन गया है, जहां न तो नियमित सफाई होती है और न ही कड़ी निगरानी। छात्रों ने वीसी ऑफिस, रजिस्ट्रार और हॉस्टल अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी का भी आरोप लगाया है।
जांच कमेटी गठित, नोटिस जारी
दबाव बढ़ने पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने हॉस्टल वार्डन और सुरक्षा अधिकारी को नोटिस जारी किया है। दिए गए स्पष्टीकरण में दावा किया गया कि बोतलें शाम से वहां पड़ी थीं। इस दावे ने और भी सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या उस दौरान कोई सफाई नहीं हुई? क्या कोई नाइट पेट्रोलिंग नहीं थी?
मामले की गंभीरता को देखते हुए यूनिवर्सिटी ने 5 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है।
सुरक्षा पर खर्च करोड़ों, फिर भी सीसीटीवी नदारद
सुरक्षा एक बड़ी चिंता बनकर उभरी है। कुछ समय पहले वनस्पति विज्ञान (Botany) विभाग में तोड़फोड़ की घटना हुई थी, जिसके बाद समिति ने नई एजेंसी की सिफारिश की थी। फैसला महीनों पहले लिया गया था, लेकिन अभी तक लागू नहीं हुआ है।
छात्रों ने बताया कि परिसर में सीसीटीवी कैमरों (CCTV) की भारी कमी है। उनका तर्क है कि आधिकारिक कार्यक्रमों पर करोड़ों खर्च किए जाते हैं, लेकिन बुनियादी सुरक्षा प्रणालियों में बड़ी खामियां हैं।
हालांकि, यूनिवर्सिटी का कहना है कि सफाई और सुरक्षा एजेंसियों के लिए ई-टेंडरिंग प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस है।
यह घटना गुजरात में शराबबंदी पर फिर से बहस छेड़ती है। आलोचकों का तर्क है कि यदि राज्य की फ्लैगशिप यूनिवर्सिटी में थोक में शराब मिल सकती है, तो बाकी जगहों पर कानून का क्या हाल होगा?
कैंपस में रहने वाले छात्रों, उनके अभिभावकों और फैकल्टी के लिए यह मुद्दा सिर्फ नियमों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि सुरक्षा और भरोसे का है। छतों और झाड़ियों में मिली ये बोतलें सिर्फ कचरा नहीं हैं, ये उस प्रशासनिक लापरवाही का सबूत हैं जो तब तक जारी रहेगी जब तक ‘इनकार’ की जगह ‘जवाबदेही’ नहीं ले लेती।
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