गुजरात विधानसभा की कार्यवाही के अनिवार्य सीधे प्रसारण (लाइव टेलीकास्ट) की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर शुक्रवार (27 मार्च) को गुजरात उच्च न्यायालय में निर्धारित सुनवाई नहीं हो सकी। यह महत्वपूर्ण जनहित याचिका पिछले छह वर्षों से अदालत में लंबित है।
भारत की 30 राज्य विधानसभाओं में से गुजरात एकमात्र ऐसा राज्य है जो अपनी सदन की कार्यवाही का सीधा प्रसारण नहीं करता है। विधानसभा परिसर के भीतर बिना पूर्व अनुमति के किसी भी प्रकार की वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी सख्त वर्जित है।
सितंबर 2023 में, गुजरात द्वारा नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन (नेवा – NeVA) को अपनाने के बाद स्पीकर शंकर चौधरी ने सीधा प्रसारण शुरू करने की बात कही थी। इस प्रणाली ने सभी विधायी प्रक्रियाओं को एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ला दिया था। हालांकि, स्पीकर ने तब यह स्पष्ट नहीं किया था कि लाइव टेलीकास्ट असल में कब शुरू होगा।
एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने बताया था कि सरकार की ओर से इसके लिए कोई मनाही नहीं है और विधानसभा का यूट्यूब चैनल तथा नेवा के जरिए वेबसाइट भी तैयार है, लेकिन इसके साथ कुछ तकनीकी और प्रक्रियात्मक सीमाएं भी जुड़ी हुई हैं।
दूसरी ओर, विधानसभा सचिवालय इस याचिका का लगातार विरोध कर रहा है। सचिवालय ने यूनाइटेड किंगडम के हाउस ऑफ कॉमन्स के विशेषाधिकारों और सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के कुछ प्रावधानों का हवाला देते हुए लाइव टेलीकास्ट का विरोध किया है।
विपक्षी आम आदमी पार्टी (आप) ने 25 मार्च को संपन्न हुए गुजरात विधानसभा के महीने भर चले बजट सत्र के दौरान कार्यवाही के सीधे प्रसारण की पुरजोर मांग की थी। गौरतलब है कि इसी सत्र के दौरान समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) को अपनाने और अशांत क्षेत्र अधिनियम (डिस्टर्ब्ड एरियाज एक्ट) में एक महत्वपूर्ण संशोधन सहित कई अहम विधेयक पारित किए गए थे। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी पिछले साल इसी तरह की मांग उठाई थी।
यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता नीता हार्दिकर और डॉ. सिद्धार्थ जितेंद्र पाठक द्वारा साल 2020 में दायर की गई थी। याचिका में अदालत से यह निर्देश देने की मांग की गई है कि विधानसभा की कार्यवाही का लाइव प्रसारण अनिवार्य किया जाए।
इसके साथ ही, आरटीआई अधिनियम और संविधान के अनुच्छेद 19(ए) (वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) तथा 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण) के तहत राज्य के दायित्वों के अनुसार, सभी कानूनों के पाठ, प्रतिलेख और प्रश्न-उत्तर की सूची विधानसभा की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि देश की अन्य विधानसभाओं की तरह गुजरात विधानसभा भी अपनी वेबसाइट पर गुजराती और अंग्रेजी में जानकारी अपडेट करने के लिए बाध्य है।
अप्रैल 2021 में, गुजरात विधानसभा सचिवालय ने इस याचिका का विरोध करते हुए दो हलफनामे दाखिल किए थे। उप सचिव रीता मेहता ने सचिवालय की ओर से प्रस्तुत हलफनामे में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) और 21 के तहत दायित्वों का पालन करने का कोई पूर्ण कानूनी कर्तव्य नहीं है, क्योंकि मौलिक अधिकार पूर्ण प्रकृति के नहीं हैं और उन पर उचित प्रतिबंध लागू होते हैं।
हलफनामे में संविधान के अनुच्छेद 194 का इतिहास भी बताया गया, जो यूके के हाउस ऑफ कॉमन्स द्वारा दावा किए गए विशेषाधिकारों के समान है। इसमें कहा गया कि सदन को अपनी कार्यवाही के प्रकाशन को नियंत्रित या प्रतिबंधित करने का पूरा विशेषाधिकार है।
आरटीआई अधिनियम की धारा 8 का हवाला देते हुए यह भी कहा गया कि राज्य विधायिका को उस जानकारी के प्रकटीकरण पर विशेषाधिकार प्राप्त है, जिससे उसके नियमों का उल्लंघन होता हो।
याचिकाकर्ताओं ने 31 जुलाई, 2021 को इस हलफनामे के जवाब में अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वे केवल आरटीआई अधिनियम की धारा 4(1)(बी) के तहत दायित्वों के अनुपालन की प्रार्थना कर रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि प्रेस के ‘प्रकाशित करने के अधिकार’ और नागरिकों के ‘जानने के अधिकार’ के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, एक प्रतिनिधि लोकतंत्र में नागरिकों को अपने प्रतिनिधियों की कार्यवाही जानने का पूरा हक है और यह मांग सदन के किसी भी विशेषाधिकार का उल्लंघन नहीं करती है।
इसके बाद, 30 सितंबर, 2021 को दायर एक अन्य हलफनामे में तत्कालीन उप सचिव सी बी पंड्या ने बताया कि विधानसभा ने सभी सार्वजनिक दस्तावेजों को नेवा (NeVa) वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विधानसभा का विशेषाधिकार केवल प्रेस द्वारा कार्यवाही के प्रकाशन को रोकना नहीं है, बल्कि यह विधानसभा को अपनी इच्छानुसार प्रकाशन को नियंत्रित करने का अधिकार देता है।
उन्होंने बताया कि सत्र के दौरान दिन की सभी महत्वपूर्ण कार्यवाहियों को ‘लोकशाही ना धबकारा’ (लोकतंत्र की धड़कन) नामक एक विशेष कार्यक्रम के रूप में हर दिन शाम 06:30 बजे डीडी गिरनार और यूट्यूब पर प्रसारित किया जाता है। साथ ही, बजट भाषण का सभी क्षेत्रीय गुजराती चैनलों पर सीधा प्रसारण होता है और पूरी बहस का पाठ नेवा वेबसाइट पर उपलब्ध रहता है।
अगर देश के अन्य राज्यों की बात करें, तो वहां आम जनता विभिन्न माध्यमों से सदन की कार्यवाही देख सकती है। असम, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में ‘नेवा’ (NeVA) के माध्यम से कार्यवाही देखी जा सकती है।
वहीं, आंध्र प्रदेश में साक्षी टीवी, अरुणाचल प्रदेश में डीडी अरुणप्रभा, छत्तीसगढ़ में डीडी छत्तीसगढ़ और गोवा में प्रूडेंट मीडिया गोवा के जरिए लाइव प्रसारण होता है।
कर्नाटक में लोग डीडी चंदना और यूट्यूब पर इसे देख सकते हैं, जबकि केरल और मध्य प्रदेश में निजी टीवी चैनलों पर इसका प्रसारण होता है। जम्मू-कश्मीर में ‘द न्यूज नाउ’ और मिजोरम में यूट्यूब के जरिए कार्यवाही दिखाई जाती है।
हिमाचल प्रदेश और नागालैंड में क्रमशः एचपी विधानसभा चैनल और डीडी पर मुख्य अंश (हाईलाइट्स) दिखाए जाते हैं। पश्चिम बंगाल में भी कार्यवाही को कभी-कभी लाइव स्ट्रीम किया जाता है।
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