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अमेरिका के सपने ने पहुंचाया अज़रबैजान की कैद में: गुजरात के दो युवा ऐसे बने शिकार

| Updated: February 11, 2026 13:45

डंकी रूट का खौफनाक सच: 65 लाख की फिरौती और टॉर्चर के बाद मिली आजादी, सांसद मितेश पटेल की पहल पर विदेश मंत्रालय ने 24 घंटे में किया रेस्क्यू।

वडोदरा/आणंद: विदेश जाकर सेटल होने और डॉलर्स में कमाने की चाहत ने गुजरात के दो युवाओं को मुसीबत के ऐसे दलदल में फंसा दिया, जहां से उनका निकलना नामुमकिन लग रहा था। मुंबई के एजेंटों के झांसे में आकर अमेरिका जाने का सपना देखने वाले ये युवा अज़रबैजान में बंधक बना लिए गए।

हालांकि, राहत की खबर यह है कि अब ये दोनों अज़रबैजान स्थित भारतीय दूतावास में पूरी तरह सुरक्षित हैं। आणंद के सांसद मितेश पटेल ने मंगलवार को मीडिया को यह जानकारी दी।

सांसद मितेश पटेल ने बताया कि मामला विदेश मंत्रालय (MEA) के संज्ञान में लाने के महज 24 घंटे के भीतर ही कार्यवाही हुई और दोनों पीड़ितों को सुरक्षा मुहैया करा दी गई।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ितों की पहचान झांखरिया गांव के ध्रुव पटेल और आणंद जिले के वासद की दीपिका पटेल के रूप में हुई है। इन्हें मुंबई स्थित एजेंटों ने कनाडा के रास्ते अमेरिका भेजने का सपना दिखाया था। लेकिन अमेरिका की जगह उन्हें अज़रबैजान भेज दिया गया, जहां उन्हें बंधक बनाकर रखा गया।

परिजनों का आरोप है कि वहां उनके बच्चों के साथ मारपीट की गई, उन्हें भूखा रखा गया और यहां तक कि अंगों की तस्करी (Organ Trafficking) की धमकियां भी दी गईं। रिहाई के बदले में कुल 65 लाख रुपये की फिरौती वसूली गई, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा क्रिप्टोकरेंसी के जरिए दिया गया।

सांसद की तत्परता और विदेश मंत्रालय का एक्शन

पीड़ित परिवारों ने जब अपनी आपबीती सांसद मितेश पटेल को सुनाई, तो उन्होंने बिना देर किए सोमवार को संसद सत्र के दौरान नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। पटेल ने कहा, “विदेश मंत्रालय के तुरंत हस्तक्षेप की बदौलत तेजी से कार्रवाई संभव हो पाई और पीड़ितों को ट्रेस कर उन्हें सुरक्षा प्रदान की गई।”

30 जनवरी से शुरू हुआ खौफनाक सफर

सांसद द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को सौंपी गई विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, ध्रुव और दीपिका 30 जनवरी को अलग-अलग फ्लाइट से वडोदरा से दिल्ली के लिए निकले थे। वहां एजेंटों ने उन्हें महिपालपुर के एक होटल में ठहराया। इसके बाद, 1 फरवरी को उन्हें दिल्ली से अज़रबैजान एयरलाइंस की फ्लाइट से बाकू (Baku) भेज दिया गया।

बाकू पहुंचते ही एजेंटों के इशारे पर उनके मोबाइल फोन बंद करवा दिए गए। इसके बाद असली खेल शुरू हुआ। परिवारों को वीडियो कॉल किए गए जिसमें ध्रुव को बुरी तरह पीटते हुए दिखाया गया। एजेंटों ने धमकी दी कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो अंजाम बहुत बुरा होगा।

65 लाख की फिरौती और क्रिप्टो का खेल

रिपोर्ट के अनुसार, अपने बच्चों की जान बचाने के लिए परिवारों ने भारी रकम चुकाई। ध्रुव के परिवार ने मुंबई में मुख्य एजेंट को 35 लाख रुपये नकद दिए और एक संदिग्ध हैंडलर को 15 लाख रुपये USDT क्रिप्टोकरेंसी में दिए।

वहीं, दीपिका के परिवार ने भी 15 लाख रुपये क्रिप्टोकरेंसी के रूप में चुकाए।

पुलिस जांच और सांसद की अपील

पीड़ित परिवारों की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए, आणंद टाउन पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच लोकल क्राइम ब्रांच (LCB) को सौंप दी गई है। पुलिस मुंबई स्थित उन एजेंटों की तलाश कर रही है जो इस मानव तस्करी रैकेट के पीछे हैं।

इस घटना के बाद सांसद मितेश पटेल ने युवाओं से एक भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि विदेश जाने के लिए कभी भी अवैध रास्तों (Donkey Route) का सहारा न लें और केवल रजिस्टर्ड और आधिकारिक ट्रैवल एजेंटों पर ही भरोसा करें, ताकि भविष्य में कोई और युवा ऐसे जाल में न फंसे।

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