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अमेरिका: अवैध प्रवासी की मदद करना गुजराती बिजनेसमैन को पड़ा भारी, कोर्ट ने सुनाई सजा और लगाया भारी जुर्माना

| Updated: January 13, 2026 13:49

अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे भारतीय की मदद करना महंगा पड़ा; राजेश पटेल ने न केवल नौकरी दी बल्कि किराया और राशन भी दिया, अब चुकानी होगी भारी कीमत।

अहमदाबाद/वेस्ट वर्जीनिया: अमेरिका में अवैध आप्रवास (Illegal Immigration) के खिलाफ चल रही संघीय जांच अब केवल घुसपैठियों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि उन्हें पनाह देने वालों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है। इसी कड़ी में वेस्ट वर्जीनिया में रहने वाले एक गुजराती मूल के व्यवसायी को अमेरिकी रोजगार कानूनों का जानबूझकर उल्लंघन करने का दोषी पाया गया है।

मामला सिर्फ नौकरी देने तक सीमित नहीं था; कोर्ट में पेश किए गए सबूतों से पता चला कि आरोपी ने अवैध प्रवासी को नकद भुगतान से लेकर रहने-खाने तक की सुविधा मुहैया कराई थी। इसके बाद अदालत ने व्यवसायी को तीन साल के संघीय प्रोबेशन (Federal Probation) की सजा सुनाई है और 10,000 डॉलर का जुर्माना लगाया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला ‘ऑपरेशन टेक बैक अमेरिका’ (Operation Take Back America) के तहत की गई कार्रवाई का हिस्सा है। ग्रीनब्रियर काउंटी के रॉनसेवर्ट (Ronceverte) निवासी 51 वर्षीय राजेश पटेल ने स्वीकार किया कि उन्होंने 30 वर्षीय भारतीय नागरिक आकाश मकवाना को काम पर रखा और उसकी मदद की।

आकाश गुजरात का रहने वाला है और अमेरिका में वीजा की अवधि खत्म होने के बावजूद अवैध रूप से रह रहा था। 9 जनवरी को बेकली (Beckley) में संघीय अभियोजकों ने राजेश पटेल की सजा की घोषणा की।

किराए से लेकर राशन तक, हर तरह से की मदद

कोर्ट के दस्तावेजों से पता चला है कि आकाश मकवाना ने नवंबर 2020 से कम से कम सितंबर 2024 तक फेयरलिया (Fairlea) में राजेश पटेल के स्वामित्व वाले व्यवसाय में काम किया। पटेल ने माना कि उन्हें पूरी जानकारी थी कि मकवाना का वीजा एक्सपायर हो चुका है और वह गैरकानूनी तरीके से देश में रुका हुआ है, फिर भी उन्होंने उसे नौकरी पर रखा।

जांचकर्ताओं ने पाया कि पटेल की भूमिका सिर्फ रोजगार देने तक सीमित नहीं थी। चूंकि मकवाना के पास गाड़ी नहीं थी, इसलिए पटेल नियमित रूप से उसे काम पर लाने और ले जाने का काम करते थे। इतना ही नहीं, पटेल ने मकवाना के किराए का भुगतान किया और उसके काम करने की अवधि के दौरान अधिकांश समय उसे राशन भी मुहैया कराया।

पेरोल टैक्स (Payroll Taxes) से बचने के लिए पटेल ने मकवाना को ‘ऑफ द बुक्स’ यानी बिना किसी रिकॉर्ड के नकद वेतन दिया।

ग्रीन कार्ड के लिए रची गई थी फर्जी शादी की साजिश

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब आकाश मकवाना को एक अलग इमिग्रेशन फ्रॉड जांच में गिरफ्तार किया गया। 8 अक्टूबर, 2025 को मकवाना को ‘एग्रवेटेड आइडेंटिटी थेफ्ट’ (Aggravated Identity Theft) का दोषी मानते हुए दो साल की जेल की सजा सुनाई गई थी।

रिकॉर्ड्स के मुताबिक, मकवाना ने अमेरिका में स्थायी निवास या ‘ग्रीन कार्ड’ हासिल करने के लिए एक अमेरिकी नागरिक से फर्जी शादी की थी। अपनी अर्जी को मजबूत करने के लिए, मकवाना और उसके साथियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार किए और घरेलू हिंसा (Domestic Violence) की झूठी शिकायत भी दर्ज कराई।

हालांकि, संघीय जांच के दौरान इस धोखाधड़ी की पोल खुल गई। अपनी जेल की सजा पूरी करने के बाद मकवाना को डिपोर्ट (Deportation) किए जाने की संभावना है।

पत्नी और अन्य सहयोगी भी नपे

अपनी दलील के दौरान, राजेश पटेल ने स्वीकार किया कि उन्हें इस फर्जी शादी की साजिश की जानकारी थी और उन्होंने मकवाना के सह-साजिशकर्ताओं को नकद भुगतान करके इसमें मदद की थी।

इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों पर भी गाज गिरी है। मकवाना से फर्जी शादी करने वाली इलिनोइस की केली एन हफ (Kalee Ann Huff) को पहले ही शादी में धोखाधड़ी और झूठी गवाही के लिए पांच साल के संघीय प्रोबेशन की सजा सुनाई जा चुकी है। वहीं, इस शादी का इंतजाम कराने वाले उसके जीजा, जोसेफ सांचेज (Joseph Sanchez) को भी पांच साल के प्रोबेशन की सजा मिली है।

इस मामले में राजेश पटेल की पत्नी, 44 वर्षीय अवनी पटेल ने भी गैरकानूनी रूप से एक विदेशी को नौकरी देने का जुर्म कबूल कर लिया है। उनकी सजा पर फैसला 13 जनवरी को होना तय है। होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशन्स और यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज ने न्याय विभाग के साथ मिलकर इस जांच को अंजाम दिया है।

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