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अमेरिका में गुजराती युवक का कारनामा: खुद को अमेरिकी अफसर बताकर बुजुर्ग से ठगे $500,000

| Updated: January 23, 2026 13:35

4 करोड़ की ठगी: 'सैम विल्सन' बनकर डराया, घर से मंगवाए नोटों के बक्से; उर्विशकुमार पटेल ने अमेरिकी कोर्ट में कबूला जुर्म

वॉशिंगटन/बोस्टन: अमेरिका में बसे एक 23 वर्षीय गुजराती मूल के युवक ने साइबर अपराध की दुनिया में एक बड़ा फर्जीवाड़ा करने का जुर्म कबूल कर लिया है। साउथ बोस्टन में रहने वाले उर्विशकुमार विपुलकुमार पटेल ने मैसाचुसेट्स के बर्कशायर काउंटी के एक 75 वर्षीय बुजुर्ग को अपना शिकार बनाया। उसने खुद को कानून प्रवर्तन अधिकारी (Law Enforcement Officer) बताकर बुजुर्ग से करीब 500,000 डॉलर (लगभग 4.1 करोड़ रुपये) की ठगी की।

यह मामला ‘वायर फ्रॉड’ का है, जो भारत में आजकल चर्चा में चल रहे “डिजिटल अरेस्ट” जैसा ही है, बस इसमें वीडियो कॉल की जगह टेलीकम्युनिकेशन और कूरियर का इस्तेमाल किया गया।

क्या था पूरा मामला?

कोर्ट में दी गई जानकारी के अनुसार, उर्विशकुमार ने “वायर फ्रॉड की साजिश” (Conspiracy to commit wire fraud) का एक आरोप स्वीकार किया है। उसने और उसके साथियों ने एक बुजुर्ग दंपत्ति को जाल में फंसाया। उर्विशकुमार ने अपनी पहचान “सैम विल्सन” के रूप में बताई और बुजुर्ग को डराया कि वे मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले में फंस चुके हैं। बचने के लिए उन्हें तुरंत अधिकारियों के “निर्देशों” का पालन करना होगा।

मैसाचुसेट्स डिस्ट्रिक्ट के यूएस अटॉर्नी एल. बी. फोले के कार्यालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, यह घटना 2024 की शुरुआत में घटी। पीड़ित बुजुर्ग के कंप्यूटर पर अचानक एक ‘पॉप-अप’ मैसेज आया, जिसमें लिखा था कि उनका कंप्यूटर फ्रीज हो गया है और उन्हें स्क्रीन पर दिए गए नंबर पर कॉल करना होगा, जो कथित तौर पर माइक्रोसॉफ्ट से जुड़ा था।

जब पीड़ित ने कॉल किया, तो उसे एक ऐसे व्यक्ति के पास ट्रांसफर कर दिया गया जिसने खुद को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (U.S. Treasury Department) का संघीय अधिकारी बताया और अपना नाम ‘सैम विल्सन’ कहा। विल्सन ने बुजुर्ग को यकीन दिलाया कि उनकी संपत्ति खतरे में है और उन्हें अपने बैंक खातों से नकद राशि निकालकर सुरक्षा के लिए ट्रेजरी विभाग को भेजनी होगी।

पैसे ऐंठने का शातिर तरीका

आरोपी ने पीड़ित को निर्देश दिया कि वह नकदी को एक बॉक्स में रखें, उसे टेप से सील करें और उस पर अपना नाम व पता लिखें। इसके बाद, विल्सन (पटेल) ने नकदी के बक्से लेने के लिए कूरियर भेजे।

हैरानी की बात यह है कि हर पिकअप से पहले, विल्सन पीड़ित से पूछता था कि उसने कौन से कपड़े पहने हैं और उसे एक ‘पिन’ (PIN) कोड देता था। जब कूरियर वाला घर आता, तो उसे बॉक्स लेने से पहले वही कोड बताना होता था, ताकि पीड़ित को लगे कि यह सब आधिकारिक प्रक्रिया है।

गिरफ्तारी और सजा का प्रावधान

केस की फाइलों के अनुसार, 7 अक्टूबर 2024 को उर्विशकुमार पटेल साउथ बोस्टन से गाड़ी चलाकर नॉर्थ एडम्स, मैसाचुसेट्स पहुंचा। उसका मकसद पीड़ित से नकदी वाला बॉक्स लेना था। वहां उसने पीड़ित (या जो व्यक्ति उस वक्त वहां मौजूद था) को पहले से तय पासकोड बताया। जैसे ही उसने नोटों से भरा बॉक्स लिया और वहां से निकलने लगा, उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।

पटेल पर अक्टूबर में आपराधिक शिकायत दर्ज की गई थी और नवंबर 2024 में एक संघीय ग्रैंड जूरी ने उसे दोषी ठहराया। यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज मार्क जी. मैस्ट्रोियानी ने सजा सुनाने के लिए 13 फरवरी की तारीख तय की है।

इस अपराध के लिए पटेल को अधिकतम 20 साल की जेल, रिहाई के बाद तीन साल की निगरानी और 250,000 डॉलर तक के जुर्माने की सजा हो सकती है। संघीय जिला अदालत के न्यायाधीश अमेरिकी सजा दिशानिर्देशों (Sentencing Guidelines) के आधार पर अंतिम सजा तय करेंगे।

पहले भी सामने आए हैं ऐसे मामले

अमेरिका में बुजुर्गों को निशाना बनाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले साल दिसंबर में, 38 वर्षीय भारतीय नागरिक लिग्नेशकुमार पटेल (जो भी गुजराती मूल का था) को इसी तरह की धोखाधड़ी के लिए साढ़े सात साल (90 महीने) की जेल की सजा सुनाई गई थी। उसने इलिनोइस और मिसौरी के 11 पीड़ितों को ठगा था। जज ने उसे 2 मिलियन डॉलर से अधिक का हर्जाना भरने का भी आदेश दिया था।

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