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H-1B वीजा नियमों में बड़ा बदलाव: अब लॉटरी नहीं, ज्यादा सैलरी और स्किल वालों को मिलेगी प्राथमिकता

| Updated: December 24, 2025 15:42

अमेरिका का बड़ा फैसला: H-1B वीजा के लिए लॉटरी सिस्टम खत्म, अब 27 फरवरी 2026 से इस आधार पर मिलेगा वर्क वीजा

वॉशिंगटन: अमेरिका में नौकरी करने का सपना देख रहे विदेशी कामगारों और आईटी प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि वह H-1B वर्क वीजा के लिए अपने पुराने लॉटरी सिस्टम को खत्म कर रहा है। इसकी जगह अब एक नई व्यवस्था लागू की जाएगी, जिसमें उच्च कौशल (High-skilled) और अधिक वेतन पाने वाले विदेशी कामगारों को वरीयता दी जाएगी।

यह बदलाव ट्रम्प प्रशासन द्वारा उठाए गए उन कदमों का ही हिस्सा है, जिनका उद्देश्य वीजा कार्यक्रम के ढांचे को बदलना है। जहां एक ओर आलोचकों का मानना है कि इस वीजा का इस्तेमाल विदेशी कामगारों को कम वेतन पर काम पर रखने के लिए किया जा रहा है, वहीं समर्थकों का तर्क है कि यह इनोवेशन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।

पुराने सिस्टम का हो रहा था दुरुपयोग

यूएस सिटिजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विसेज (USCIS) के प्रवक्ता मैथ्यू ट्रेगेसर ने इस फैसले के पीछे की वजह बताते हुए कहा, “H-1B रजिस्ट्रेशन की मौजूदा रैंडम चयन प्रक्रिया (लॉटरी सिस्टम) का अमेरिकी नियोक्ताओं द्वारा शोषण और दुरुपयोग किया जा रहा था। ये कंपनियां मुख्य रूप से ऐसे विदेशी कामगारों को बुलाना चाहती थीं, जिन्हें अमेरिकी कामगारों की तुलना में कम वेतन देना पड़े।”

ट्रम्प प्रशासन के कड़े फैसले और ‘गोल्ड कार्ड’

गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक उद्घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत अत्यधिक कुशल कामगारों पर $100,000 (करीब 1 लाख डॉलर) का वार्षिक H-1B वीजा शुल्क लगाया गया था। हालांकि, इस फैसले को अभी अदालत में चुनौती दी जा रही है। इसके अलावा, राष्ट्रपति ने अमीर व्यक्तियों के लिए अमेरिकी नागरिकता की राह आसान बनाने के लिए 1 मिलियन डॉलर के “गोल्ड कार्ड” वीजा की भी शुरुआत की थी।

नए नियमों की घोषणा करने वाली प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह बदलाव प्रशासन द्वारा किए गए अन्य प्रमुख निर्णयों के अनुरूप है, जैसे कि वह नियम जिसमें नियोक्ताओं को पात्रता की शर्त के रूप में प्रति वीजा अतिरिक्त $100,000 का भुगतान करना अनिवार्य है।

कब से लागू होगा नया नियम?

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत एक “वेटेड सिलेक्शन प्रोसेस” (भारित चयन प्रक्रिया) लागू की जाएगी। इससे यह संभावना बढ़ जाएगी कि H-1B वीजा उन लोगों को आवंटित किए जाएं जो अधिक कुशल हैं और जिन्हें ज्यादा वेतन मिल रहा है।

यह नया नियम 27 फरवरी, 2026 से प्रभावी होगा और आगामी H-1B कैप रजिस्ट्रेशन सीजन पर लागू होगा।

अमेज़न और टीसीएस रहे सबसे बड़े लाभार्थी

ऐतिहासिक रूप से H-1B वीजा अब तक लॉटरी सिस्टम के जरिए ही दिए जाते रहे हैं। आंकड़ों की बात करें तो इस साल ‘अमेज़न’ (Amazon) 10,000 से अधिक स्वीकृत वीजा के साथ सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है। इसके बाद टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल और गूगल का स्थान आता है। अगर क्षेत्र के हिसाब से देखें, तो कैलिफोर्निया में H-1B कामगारों की संख्या सबसे अधिक है।

पक्ष और विपक्ष की दलीलें

इस वीजा कार्यक्रम को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिलती है:

  • समर्थकों का कहना है: H-1B कार्यक्रम स्वास्थ्य कर्मियों और शिक्षकों की भर्ती के लिए एक महत्वपूर्ण जरिया है। यह अमेरिका में इनोवेशन और आर्थिक विकास को गति देता है और नियोक्ताओं को विशेष क्षेत्रों में रिक्त पदों को भरने की अनुमति देता है।
  • आलोचकों का तर्क है: वीजा अक्सर वरिष्ठ भूमिकाओं (Senior Roles) के बजाय एंट्री-लेवल पदों के लिए दिए जाते हैं। हालांकि कार्यक्रम का उद्देश्य वेतन में कटौती या अमेरिकी श्रमिकों के विस्थापन को रोकना है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि कंपनियां नौकरियों को निचले कौशल स्तर पर वर्गीकृत करके कम वेतन देती हैं, भले ही काम पर रखे गए कर्मचारियों के पास ज्यादा अनुभव हो।

वर्तमान में, सालाना जारी किए जाने वाले नए वीजा की संख्या 65,000 तक सीमित है। इसके अलावा, मास्टर डिग्री या उससे उच्च योग्यता वाले लोगों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा का प्रावधान है।

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