नई दिल्ली: बुधवार को ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ (India AI Impact Summit) में दुनिया भर के दिग्गजों का जमावड़ा लगा। वैश्विक नेताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास में जिम्मेदारी, सहयोग और समानता की जरूरत पर जोर दिया। चर्चा का मुख्य केंद्र शिक्षा में सुधार, ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) के साथ साझेदारी और एक जवाबदेह शासन व्यवस्था (accountable governance) रहा, जो AI के भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभाएंगे।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी को स्टॉल खाली करने का आदेश
समिट के दौरान उत्साह के बीच एक विवाद भी सामने आया। सूत्रों के मुताबिक, गलगोटिया यूनिवर्सिटी को एआई समिट एक्सपो (AI Summit Expo) से अपना स्टॉल तुरंत खाली करने का निर्देश दिया गया है। यह विवाद वहां प्रदर्शित एक ‘रोबोटिक डॉग’ को लेकर खड़ा हुआ, जिसमें उक्त तकनीक की उत्पत्ति (origin) और मालिकाना हक को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे।
छात्रों और आगंतुकों के लिए अच्छी खबर
आयोजन में आम लोगों की दिलचस्पी को देखते हुए कुछ अहम घोषणाएं भी की गईं। आईटी सचिव एस. कृष्णन ने जानकारी दी कि एआई इम्पैक्ट समिट एक्सपो शनिवार को भी खुला रहेगा। इसका मकसद यह है कि छात्र और अन्य आगंतुक बिना किसी वीवीआईपी (VVIP) मूवमेंट या बाधा के आराम से एक्सपो देख सकें।
वहीं, डिजिटल इंडिया के प्रबंध निदेशक और सीईओ अखिल कुमार ने बताया कि प्रतिनिधियों और जनता के भारी उत्साह को देखते हुए, एआई एक्सपो क्षेत्र अब बुधवार (18 फरवरी, 2026) से रात 8 बजे तक खुला रहेगा।
पहले दिन की अव्यवस्था पर मंत्री की माफी
आयोजन के शुरुआती दिन हुए प्रबंधन संबंधी मुद्दों पर भी राजनीति गरमाई रही। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार (17 फरवरी, 2026) को उपस्थित लोगों को हुई परेशानियों के लिए माफी मांगी थी। दूसरी ओर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार की आलोचना करते हुए इसे “घोर कुप्रबंधन और अराजकता” करार दिया था।
बिजली क्षेत्र में क्रांति ला सकता है AI
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अध्यक्ष घनश्याम प्रसाद ने समिट के एक सत्र में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस देश में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता दोनों को सुधार सकता है। उन्होंने कहा, “बिजली क्षेत्र में बड़े बदलाव हो रहे हैं और एआई के इस्तेमाल के ढेरों अवसर मौजूद हैं। हमें अपनी गति बढ़ानी होगी ताकि हम किसी से पीछे न रहें।”
एनवीडिया और L&T की बड़ी साझेदारी
अमेरिकी टेक दिग्गज एनवीडिया (Nvidia) ने इस समिट में भारतीय कंपनियों के साथ बड़े समझौतों का ऐलान किया। मुंबई स्थित क्लाउड और डेटा सेंटर प्रदाता कंपनी L&T ने बताया कि वह एनवीडिया के साथ मिलकर “भारत की सबसे बड़ी गीगावाट-स्केल एआई फैक्ट्री” का निर्माण करेगी।
एनवीडिया के प्रमुख जेनसन हुआंग ने कहा, “हम विश्व स्तरीय एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव रख रहे हैं जो भारत के विकास को नई ऊर्जा देगा।”
डेटा की सुरक्षा और संप्रभुता सबसे अहम: AI4Bharat
AI4Bharat के संस्थापक और आईआईटी मद्रास के एसोसिएट प्रोफेसर मितेश खापरा ने तकनीक के सुरक्षित इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में एआई का उपयोग बहुत सावधानी से होना चाहिए।
खापरा ने ‘डेटा सॉवरेन्टी’ (डेटा संप्रभुता) का मुद्दा उठाते हुए कहा, “अगर हमारे पास अपने एआई और डेटा पर नियंत्रण नहीं होगा, खासकर सरकारी और स्वास्थ्य सेवाओं में, तो यह हमारे लिए एक चुनौती बन सकता है। एआई हर किसी के लिए समान रूप से काम करना चाहिए, चाहे उनकी भाषा या पृष्ठभूमि कुछ भी हो।”
असमानता कम करने का जरिया बने तकनीक
ब्राजील की एड-टेक कंपनी ‘लेट्रस’ (Letrus) के सह-संस्थापक थियागो रचद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एआई का असली मकसद असमानता को बढ़ाना नहीं, बल्कि कम करना होना चाहिए। उन्होंने कहा, “आज हमारे सामने बड़ा सवाल रोजगार का है और यह भी कि सरकारें इस तकनीक-केंद्रित दुनिया में डेटा की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेंगी।”
सौर ऊर्जा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के महानिदेशक आशीष खन्ना ने विकेंद्रीकृत (decentralised) सौर ऊर्जा के विस्तार के लिए डिजिटल ढांचे की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों में सौर ऊर्जा में हुए निवेश का 40% हिस्सा विकेंद्रीकृत था (जैसे रूफटॉप सोलर), लेकिन भारत में यह आंकड़ा केवल 15% है।
उन्होंने कहा कि सस्ती बिजली के लिए भारत को इस दिशा में और काम करना होगा, जिसके लिए वितरण कंपनियों (Discoms) को अपनी डिजिटल क्षमताएं बढ़ानी होंगी।
AI की रेस में टॉप-3 में हो सकता है भारत
इंफोसिस के सह-संस्थापक और एक्सिलर वेंचर्स के चेयरमैन क्रिस गोपालकृष्णन ने भारत की क्षमता पर पूरा भरोसा जताया। उन्होंने कहा, “भारत एआई के विभिन्न पहलुओं में दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल हो सकता है।”
गोपालकृष्णन ने कहा कि एआई का असली प्रभाव उन ‘एप्लिकेशन्स’ से तय होगा जो हम बनाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के पास विशाल डेवलपर इकोसिस्टम है, जो इस तकनीक का लाभ उठाने में हमें एक अनूठी बढ़त दिलाता है।
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