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अमेरिका में भारत का बड़ा दांव: ट्रंप कनेक्शन वाली फर्म को क्यों मिली 100 दिन की जिम्मेदारी?

| Updated: August 25, 2025 11:06

भारत ने अमेरिका में लॉबिंग को तेज किया, ट्रंप कनेक्शन वाली फर्म Mercury Public Affairs को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी।

भारत और अमेरिका के रिश्तों में हाल के दिनों में आई दूरी को देखते हुए, वॉशिंगटन डी.सी. स्थित भारतीय दूतावास ने अपने लॉबिंग प्रयासों को और मज़बूत करने के लिए Mercury Public Affairs के साथ साझेदारी की है। यह समझौता अगस्त के मध्य से शुरू हुआ है और अगले 100 दिनों तक जारी रहेगा।

ट्रंप से जुड़े चेहरे वाली फर्म

Mercury Public Affairs का ट्रंप प्रशासन से गहरा संबंध रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदा चीफ ऑफ स्टाफ स्यूज़ी वाइल्स 2022 से लेकर 7 नवंबर 2023 तक इस कंपनी की सह-अध्यक्ष रहीं। इसके बाद उन्हें ट्रंप ने व्हाइट हाउस में अपना चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया।

इस अनुबंध पर पूर्व रिपब्लिकन सीनेटर डेविड विटर ने कंपनी की ओर से हस्ताक्षर किए। इससे पहले, भारतीय दूतावास ने अप्रैल में SHW Partners LLC (SHW) को भी लॉबिंग के लिए नियुक्त किया था। यह कदम पहलगाम आतंकी हमले के कुछ दिनों बाद उठाया गया था। उसी दौरान ट्रंप ने दावा किया था कि उनकी दखलंदाजी से भारत-पाकिस्तान के बीच टकराव टला था, जिसे भारत की मौजूदा भाजपा सरकार ने सकारात्मक रूप से लिया।

अनुबंध की शर्तें और भुगतान

अमेरिकी न्याय विभाग में दर्ज दस्तावेज़ के अनुसार, Mercury Public Affairs भारतीय दूतावास को निम्नलिखित सेवाएं देगी –

  • संघीय सरकार से संपर्क एवं सहयोग
  • मीडिया रणनीति और संचार सेवाएं
  • डिजिटल ऑडिट एवं रणनीति परामर्श
  • पेड विज्ञापन

यह अनुबंध 15 अगस्त से प्रभावी हुआ है और 14 नवंबर तक जारी रहेगा। इसके तहत भारतीय दूतावास हर महीने लगभग 75,000 डॉलर चुकाएगा। Mercury के जुड़ने के बाद दूतावास का कुल मासिक लॉबिंग खर्च लगभग 2.75 लाख डॉलर तक पहुँच गया है।

तनावपूर्ण रिश्ते और व्यापारिक असर

पहलगाम हमले के बाद अमेरिका ने भारत की अपेक्षा के अनुरूप प्रतिक्रिया नहीं दी। भारत की नाराज़गी का कारण यह भी रहा कि पाकिस्तान और भारत को समान तराज़ू में तौला गया, जबकि भारत ने साफ तौर पर पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था। इसी बीच, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर भी मतभेद गहराए।

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के हफ्तों में भारत के रूस से तेल आयात को लेकर भी आलोचना की है। 6 अगस्त को उन्होंने भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की, जो 27 अगस्त से लागू हो जाएगा। इसका मतलब है कि भारत से आने वाले उत्पादों पर कुल 50% शुल्क लगेगा, जो अमेरिका के अधिकांश व्यापारिक साझेदारों से कहीं अधिक है।

इस फैसले के बाद भारतीय डाक सेवा ने वित्तीय कारणों का हवाला देते हुए अमेरिका के लिए सरकारी डाक सेवा को बंद करने की घोषणा की है। यह सेवा आधिकारिक तौर पर 25 अगस्त से समाप्त हो रही है। इसी दिन वॉशिंगटन में दोनों देशों के बीच नए शुल्क पर बातचीत का दौर भी शुरू होना है।

भारत में यह धारणा भी बनी है कि ट्रंप प्रशासन भारतीय मूल के अमेरिकियों पर सख्ती बरत रहा है। छात्र, ग्रीन कार्ड धारक और एच-1बी वीज़ा नवीनीकरण अब सीधे ट्रंप की नीतियों पर निर्भर दिखाई दे रहे हैं।

रूस से तेल आयात पर विवाद

भारत ने 2023 में रूस से लगभग 56 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा, जो उसकी कुल तेल आयात का करीब 40% था। ट्रंप प्रशासन और उनके सलाहकार पीटर नवारो का कहना है कि भारत सस्ते रूसी तेल से मुनाफा कमा रहा है और उसके परिष्कृत उत्पादों को भारी मुनाफे पर निर्यात कर रहा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत का रूस से कच्चा तेल आयात लगातार बढ़ा है। जी7 देशों द्वारा तय की गई 60 डॉलर प्रति बैरल की प्राइस कैप ने रूस का तेल भारत और चीन जैसे देशों के लिए और आकर्षक बना दिया।

भारत में नए राजदूत की नियुक्ति

पिछले शुक्रवार ट्रंप ने सर्जियो गोर को भारत में अगला राजदूत नामित करने की घोषणा की। यह नियुक्ति अमेरिकी सीनेट की मंज़ूरी के बाद प्रभावी होगी। गोर दक्षिण एशियाई और मध्य एशियाई मामलों के लिए विशेष दूत की भूमिका भी निभाएंगे। 38 वर्षीय गोर वर्तमान में व्हाइट हाउस में कार्मिक निदेशक हैं और ट्रंप के बेहद वफ़ादार माने जाते हैं।

अमेरिका में भारत की लॉबिंग गतिविधियों का तेज होना इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली अपने रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए सक्रिय कूटनीतिक कदम उठा रही है। भले ही राजनीतिक रिश्ते तनावपूर्ण दिख रहे हों, लेकिन रक्षा क्षेत्र में सहयोग अभी भी दोनों देशों के बीच जारी है।

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