अमेरिका में रहने वाले 30 वर्षीय भारतीय नागरिक शशिकांत रेड्डी डोंथिरेड्डी का कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) पड़ने से निधन हो गया है। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए भारत वापस लाने और उनके परिवार की मदद करने के उद्देश्य से ‘गोफंडमी’ (GoFundMe) पर एक अभियान शुरू किया गया है।
यह दुखद घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका में एच-1बी (H-1B) सहित इमिग्रेशन नीतियों और वर्क वीजा के नियमों को लेकर लगातार अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
वीजा की जद्दोजहद और बढ़ता तनाव
फंडरेजर कैंपेन में दी गई जानकारी के अनुसार, शशिकांत साल 2018 में उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए थे और वहां उन्होंने अपनी डबल मास्टर डिग्री पूरी की थी। एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले शशिकांत अपने और अपने परिवार के बेहतर भविष्य का सपना लेकर गए थे और इसके लिए वह दिन-रात कड़ी मेहनत कर रहे थे।
अपील में बताया गया है कि उन्होंने एच-1बी (H-1B) वर्क वीजा पाने के लिए लॉटरी सिस्टम में कई बार अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन दुर्भाग्य से हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी। शानदार योग्यता और अथक परिश्रम के बावजूद हर बार वीजा न मिल पाने की वजह से पिछले कुछ महीनों में उनका तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया था।
8 साल से घर वापसी का था इंतजार
साल 2018 में अमेरिका जाने के बाद से शशिकांत एक बार भी अपने परिवार से मिलने भारत नहीं आ सके थे। उनके माता-पिता पिछले 8 सालों से अपने बेटे की घर वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। वे उसका खुशी और गर्व के साथ स्वागत करना चाहते थे, लेकिन अफ़सोस कि अब वे उसकी जगह उसके पार्थिव शरीर का इंतजार कर रहे हैं ताकि उसका अंतिम संस्कार कर सकें।
अचानक बिगड़ी तबीयत
लगातार मिल रही वीजा संबंधी चुनौतियों और मानसिक तनाव के बावजूद शशिकांत हार माने बिना लंबे समय तक काम कर रहे थे। कैंपेन के मुताबिक, 16 फरवरी की तड़के उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। उन्हें आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
परिवार की मदद के लिए फंडरेजर की शुरुआत
शशिकांत के करीबियों ने उनके दुखी माता-पिता की मदद के लिए ‘गोफंडमी’ पर “After 8 Years Apart – Help His Family See Him One Last Time” (8 साल की दूरी के बाद – उनके परिवार को उन्हें आखिरी बार देखने में मदद करें) नाम से एक अभियान शुरू किया है।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शशिकांत के पार्थिव शरीर को भारत भेजने में आने वाले भारी खर्च को उठाना और अंतिम संस्कार की प्रक्रियाओं के लिए आर्थिक मदद जुटाना है। इस समय उनका परिवार न सिर्फ एक गहरे भावनात्मक सदमे से गुजर रहा है, बल्कि उन्हें गंभीर आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ रहा है।
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