राज्यसभा सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने विदेशों में, विशेषकर रूस में भारतीय छात्रों के साथ हो रही उत्पीड़न और हमलों की बढ़ती घटनाओं पर संसद में गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि वह इन मामलों को पूरी गंभीरता से ले और विदेशों में पढ़ने तथा काम करने वाले भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त और प्रभावी कदम उठाए। गोहिल का मानना है कि दुनिया के किसी भी कोने में अगर किसी भारतीय नागरिक के साथ दुर्व्यवहार या हमला होता है, तो उसे केवल एक व्यक्ति विशेष पर हमला नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि यह पूरे राष्ट्र के सम्मान और गरिमा पर चोट है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, इसलिए इस पर मजबूत कूटनीतिक और प्रशासनिक ध्यान देने की सख्त जरूरत है।
भारत के छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए दुनिया भर के लगभग 196 देशों का रुख करते हैं, जो उन्हें वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदायों में से एक बनाता है। इतनी बड़ी संख्या में विदेशों में मौजूद इन छात्रों की सुरक्षा और भलाई सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल होनी चाहिए। रूस में हाल ही में घटी एक खौफनाक घटना का जिक्र करते हुए गोहिल ने बताया कि वहां भारतीय छात्रों पर कथित तौर पर चाकू से जानलेवा हमला किया गया, जिसमें चार छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए।
इस घटना के बाद ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने बकायदा एक शिकायत दर्ज कराई है और वहां पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर अपनी गहरी चिंता जाहिर की है।
यह ध्यान देने योग्य बात है कि रूस में भारतीय छात्रों की एक बहुत बड़ी आबादी रहती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में 27,000 से अधिक भारतीय छात्र रूसी विश्वविद्यालयों में नामांकित हैं, जिनमें से ज्यादातर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। भारत के निजी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में रूस में चिकित्सा शिक्षा का खर्च काफी कम है, और यही वजह है कि रूस एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के इच्छुक भारतीय छात्रों के लिए एक बेहद लोकप्रिय विकल्प बन गया है।
हालांकि, विदेश मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़े एक चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक साल 2025 में विदेश में पढ़ रहे कम से कम 350 भारतीय छात्रों को उत्पीड़न और सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। मंत्रालय को औपचारिक रूप से मिली इन 350 शिकायतों में से लगभग 200 शिकायतें केवल रूस से ही आई हैं, जो वहां भारतीय छात्रों के सामने आने वाली खतरनाक परिस्थितियों की ओर सीधा इशारा करती हैं। गोहिल ने सवाल उठाया कि आखिर वहां हालात इतने क्यों बिगड़ रहे हैं और इस मुद्दे की गहराई से जांच करने की मांग की।
इस समस्या के व्यापक संदर्भ पर बात करते हुए उन्होंने भारत में शिक्षा के बढ़ते निजीकरण पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इसी निजीकरण ने कई परिवारों के लिए उच्च शिक्षा को बेहद महंगा कर दिया है। मजबूरी में छात्रों को एमबीबीएस जैसे पेशेवर पाठ्यक्रमों के लिए विदेशों का रुख करना पड़ता है, जहां शिक्षा की कुल लागत काफी कम होती है।
सांसद ने सरकार से भारत में ही शिक्षा की लागत कम करने के उपाय करने का आग्रह किया, ताकि छात्रों को मजबूर होकर सस्ते विकल्पों की तलाश में विदेश न जाना पड़े।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सरकार को राजनीतिक विचारधारा या संबद्धता से ऊपर उठकर सभी भारतीय नागरिकों के कल्याण और सुरक्षा की चिंता करनी चाहिए। पश्चिम एशिया में चल रहे मौजूदा संघर्ष का हवाला देते हुए गोहिल ने कहा कि कई देश इस तनावपूर्ण स्थिति से प्रभावित होने वाले अपने नागरिकों के लिए सक्रिय रूप से सुविधाओं और सहायता की व्यवस्था कर रहे हैं।
लेकिन, भारतीयों के मामले में अभी तक कुछ जगहों पर इस तरह का पर्याप्त समर्थन नहीं देखा गया है। राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने गुजरात के छोटा उदयपुर जिले की निवासी अमीबेन शाह के साथ हुई अपनी एक फोन वार्ता का विशेष रूप से उल्लेख किया।
गोहिल के अनुसार, अमीबेन के परिवार के सदस्य फिलहाल बहरीन में फंसे हुए हैं और गंभीर मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में फंसे लोगों को अगर पीने का साफ पानी जैसी बुनियादी सरकारी मदद भी मिल जाए, तो यह उनके लिए एक बड़ी राहत होगी।
इसके अलावा, गोहिल ने संकट के इस समय में दुबई और अन्य अंतरराष्ट्रीय केंद्रों से उड़ान भरने वाली एयरलाइंस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विमानन कंपनियां वापसी के टिकट के लिए अत्यधिक मनमाना किराया वसूल रही हैं। हालात का फायदा उठाते हुए यात्रियों को अपने वतन लौटने के लिए भारी भरकम कीमतें चुकाने पर मजबूर किया जा रहा है, जो एक तरह से इस मजबूरी का खुला शोषण है।
अंत में, उन्होंने सरकार से पुरजोर मांग की कि वह विदेशों में भारतीय छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाए, अंतरराष्ट्रीय संकटों के दौरान हर संभव जरूरी सहायता प्रदान करे और यात्रा के अत्यधिक खर्च के मुद्दे को सुलझाए ताकि फंसे हुए भारतीय बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ के सुरक्षित अपने घर लौट सकें।
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