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अमेरिका जाने की चाह: 2025 में हर 20 मिनट में एक भारतीय बॉर्डर पर पकड़ा गया, ट्रम्प की सख्ती के बावजूद नहीं रुक रहा अवैध प्रवास

| Updated: January 26, 2026 14:05

साल 2025 में 23,830 भारतीय हुए इंटरसेप्ट; मैक्सिको में कड़ाई के बाद अब तस्करों ने कनाडा के बर्फीले और खतरनाक रास्तों को बनाया निशाना।

वाशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका में बसने का सपना और डॉलर कमाने की चाहत भारतीय युवाओं को किस कदर जोखिम उठाने पर मजबूर कर रही है, इसके ताजा आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। साल 2025 में अमेरिकी सीमा पर हर 20 मिनट में एक भारतीय नागरिक को अवैध रूप से घुसपैठ की कोशिश करते हुए पकड़ा गया। यह आंकड़े बताते हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन द्वारा लागू किए गए कड़े नियमों और सख्त निगरानी के बावजूद अवैध प्रवास का सिलसिला थम नहीं रहा है।

आंकड़े क्या कहते हैं?

यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (US Customs and Border Protection) की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच कुल 23,830 भारतीयों को सीमा पर रोका गया। हालांकि, यह संख्या 2024 के मुकाबले काफी कम है, जब 85,119 भारतीय पकड़े गए थे। गिरावट के बावजूद, भारत अभी भी उन शीर्ष देशों की सूची में बना हुआ है जहां से लोग अवैध तरीके से अमेरिका में दाखिल होने की कोशिश कर रहे हैं।

नौकरी की तलाश और बच्चों की सुरक्षा पर चिंता

पकड़े गए लोगों में सबसे बड़ी संख्या उन अकेले वयस्कों (single adults) की थी जो बेहतर वेतन और रोजगार की तलाश में अमेरिका पहुंचे थे। लेकिन अमेरिकी एजेंसियों ने एक बेहद चिंताजनक प्रवृत्ति की ओर इशारा किया है—सीमा के पास लावारिस हालत में बच्चों का मिलना।

जनवरी 2022 की वह दर्दनाक ‘डिंगुचा घटना’ शायद ही कोई भूला हो, जब गुजरात के एक ही परिवार के चार सदस्यों की कनाडा से अमेरिका जाते समय ठंड से मौत हो गई थी। उस घटना के करीब चार साल बाद भी, खतरनाक रास्तों पर बच्चों को अकेला छोड़ दिए जाने या पाए जाने के मामले सामने आ रहे हैं, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाते हैं।

स सख्ती बढ़ी, पर मोह नहीं छूटा

आंकड़े एक स्पष्ट पैटर्न दिखाते हैं। सख्त नियमों ने कुल संख्या को तो कम कर दिया है, लेकिन प्रयासों को पूरी तरह नहीं रोका है। कई प्रवासियों के लिए, अमेरिका में मिलने वाले आर्थिक अवसर खतरनाक रास्तों, कड़ी गश्त और कठोर दंड के जोखिमों पर भारी पड़ रहे हैं।

अमेरिकी सीमा अधिकारियों ने घुसपैठ में आई इस कमी का श्रेय ट्रम्प प्रशासन की नई नीतियों, बढ़ी हुई निगरानी और इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) की आक्रामक कार्रवाई को दिया है। तस्करी के रास्ते अब बेहद संकरे हो गए हैं और गश्त बढ़ा दी गई है, फिर भी लोग रास्ता खोज रहे हैं।

‘रास्ते बदले हैं, इरादे नहीं’

प्रवासन के रुझानों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि डेटा केवल यह दिखाता है कि लोग डर रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह समस्या खत्म हो गई है। अमेरिका का आर्थिक और सामाजिक आकर्षण अब भी बहुत मजबूत है। जैसे ही एक रास्ते पर दबाव बढ़ता है, मानव तस्करी करने वाले नेटवर्क तुरंत अपना रास्ता बदल लेते हैं।

अवैध प्रवास, विशेष रूप से गुजरात से होने वाले पलायन पर नजर रखने वाली भारतीय एजेंसियों का भी यही मानना है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “ICE जैसी एजेंसियों की सख्ती और अमेरिकी नीतियों के कारण इसमें भारी कमी आई है। लेकिन संख्या अभी भी दिख रही है क्योंकि अमेरिका में बसने की आकांक्षा, खासकर गुजरातियों में, अभी भी बरकरार है।”

मैक्सिको से कनाडा की ओर शिफ्ट

मैक्सिको अभी भी एक महत्वपूर्ण पारगमन मार्ग (transit route) बना हुआ है, लेकिन 2025 में एक बड़ा बदलाव देखा गया। अब तस्करों ने लैटिन अमेरिका के भारी निगरानी वाले रास्तों के बजाय कनाडा-अमेरिका बॉर्डर का रुख किया है, जो कम प्रचलित लेकिन अधिक खतरनाक है।

अधिकारी ने आगे कहा, “दुबई और इस्तांबुल जैसे हब के जरिए मैक्सिको और कनाडा जाने वाले मुख्य अवैध रास्ते अब बुरी तरह बाधित हो चुके हैं। लेकिन जो लोग अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करना चाहते हैं, वे अब और भी नए और जोखिम भरे रास्ते आजमा रहे हैं।”

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