नई दिल्ली: ईरान में लगातार बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच वहां फंसे कई भारतीय नागरिक शुक्रवार देर रात सुरक्षित अपने देश लौट आए। नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही यात्रियों ने राहत की सांस ली। यह वापसी भारत सरकार द्वारा जारी उस एडवाइजरी के बाद हुई है, जिसमें ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों को वहां के हालात देखते हुए जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह दी गई थी।
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वे स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
‘मोदी जी हैं तो हर चीज मुमकिन है’
ईरान से लौटे एक यात्री ने वहां के हालात को “बेहद खराब” बताया और सुरक्षित निकासी के लिए सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा, “वहां स्थितियां बहुत बिगड़ चुकी हैं। भारत सरकार और दूतावास ने हमें जल्द से जल्द वहां से निकालने में बहुत सहयोग किया। हमें जानकारी दी गई कि कैसे निकलना है… सच में, मोदी जी हैं तो हर चीज मुमकिन है।”
सड़कों पर प्रदर्शन और इंटरनेट ठप
वहां के मौजूदा हालात बयां करते हुए एक अन्य यात्री ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों में स्थिति काफी भयानक हो गई है।
उन्होंने कहा, “हम वहां एक महीने से थे, लेकिन पिछले एक-दो हफ्तों से ही दिक्कतें शुरू हुईं। जब हम बाहर निकलते थे, तो प्रदर्शनकारी हमारी गाड़ी के सामने आ जाते थे और परेशान करते थे। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि इंटरनेट पूरी तरह बंद कर दिया गया था, जिससे हम न तो अपने परिवार को कुछ बता पा रहे थे और न ही दूतावास से संपर्क कर पा रहे थे।”
जम्मू-कश्मीर के रहने वाले एक अन्य नागरिक ने भी वहां के खतरों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मैं जम्मू-कश्मीर का निवासी हूं… वहां हो रहे विरोध प्रदर्शन काफी खतरनाक थे। लेकिन भारत सरकार ने बहुत अच्छा प्रयास किया और छात्रों को सुरक्षित वापस ले आई।”
हवाई अड्डे पर भावुक हुए परिजन
अपने करीबियों की वापसी का इंतजार कर रहे परिवारों के लिए यह पल बेहद भावुक था। तीर्थयात्रा पर गई अपनी पत्नी की चाची का इंतजार कर रहे एक व्यक्ति ने कहा, “ईरान हमेशा से भारत का अच्छा दोस्त रहा है और हमें मोदी सरकार पर पूरा भरोसा था कि वे मदद करेंगे। हम बहुत खुश हैं कि हमारे परिवार का सदस्य सुरक्षित वापस आ गया है।”
वहीं, अपनी भाभी को लेने आए एक शख्स ने बताया कि वहां “युद्ध जैसे हालात” थे। उन्होंने कहा, “इंटरनेट बंद होने की वजह से हमारा उनसे संपर्क टूट गया था, जिससे हम बहुत चिंतित थे। हम भारत सरकार के शुक्रगुजार हैं कि इस मुश्किल समय में उन्होंने उनकी वापसी का इंतजाम किया।” एक अन्य परिजन ने बताया कि उनकी मां और मौसी तीन दिन से संपर्क से बाहर थीं, लेकिन आज उनके लौटने की खबर से परिवार ने राहत की सांस ली है।
दूतावास और विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी
इससे पहले, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने बिगड़ते हालात को देखते हुए एक एडवाइजरी जारी की थी। इसमें छात्रों, व्यापारियों, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों सहित सभी भारतीयों को उपलब्ध कमर्शियल उड़ानों के जरिए तुरंत ईरान छोड़ने को कहा गया था।
इसके अलावा, नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने भी भारतीयों को अगली सूचना तक ईरान की यात्रा न करने की सख्त सलाह दी है। मंत्रालय ने 5 जनवरी को जारी अपनी पुरानी एडवाइजरी को दोहराते हुए वहां मौजूद लोगों को सतर्क रहने और किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन से दूर रहने को कहा है।
आर्थिक संकट से उपजा है आक्रोश
गौरतलब है कि ईरान में यह अशांति 28 दिसंबर को तेहरान के ग्रैंड बाजार से शुरू हुई थी, जिसका मुख्य कारण ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ में भारी गिरावट थी। धीरे-धीरे यह प्रदर्शन पूरे देश में फैल गया। मुद्रा के गिरते स्तर के अलावा, वहां के लोग पानी की भारी किल्लत, बिजली कटौती, बढ़ती बेरोजगारी और आसमान छूती महंगाई जैसी कई समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिसने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है।
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