पश्चिम एशिया में चल रहे भारी तनाव और उसके परिणामस्वरूप उड़ानों में आई अचानक रुकावटों के बीच, दुबई से कुछ किलोमीटर दूर अजमान में कई फंसे हुए भारतीय यात्रियों को एक सुरक्षित ठिकाना मिल गया है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रहने वाले व्यवसायी डॉ. धीरज जैन इन मुश्किल हालातों में जरूरतमंदों के लिए किसी मसीहा से कम साबित नहीं हो रहे हैं। उन्होंने अपने एक विशाल फार्महाउस को ऐसे लोगों के लिए अस्थायी आश्रय स्थल में तब्दील कर दिया है, जो उड़ानें रद्द होने के कारण तुरंत अपने घर लौटने में असमर्थ हैं।
जिन यात्रियों के पास पैसे खत्म हो गए थे या जिनके पास ठहरने की कोई जगह नहीं बची थी, उन्हें इस जगह पर मुफ्त में रहने और भोजन की पूरी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
महाराष्ट्र और राजस्थान से यूएई घूमने आए पर्यटकों के परिवारों ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि युद्ध जैसे हालात की खबरें और धमाकों से जुड़ी आवाजें सुनकर वे शुरुआत में काफी ज्यादा खौफजदा हो गए थे। हालांकि, इस आश्रय स्थल में पहुंचने के बाद अब वे खुद को पूरी तरह से सुरक्षित महसूस कर रहे हैं और उन्होंने राहत की लंबी सांस ली है।
दुबई के जाने-माने डेवलपर डॉ. धीरज जैन का 80 हजार वर्ग फुट में फैला यह भव्य फार्महाउस अब यात्रा संकट से जूझ रहे अनगिनत पर्यटकों का अस्थायी घर बन चुका है। यहां हर कुछ घंटों में गाड़ियां ऐसे यात्रियों को लेकर पहुंच रही हैं जो मौजूदा अफरातफरी के कारण बुरी तरह फंस गए हैं।
1एक्सएल होल्डिंग्स के चेयरमैन डॉ. जैन पिछले छह दिनों से इन परेशान यात्रियों के लिए अपने दरवाजे खोले हुए हैं। मदद की यह नेक पहल 28 फरवरी के आसपास तब शुरू हुई, जब यात्रा की स्थिति अचानक बिगड़ने लगी और कई पर्यटकों को इस बात का एहसास हुआ कि वे अब आसानी से देश से बाहर नहीं निकल सकते। लोगों को सुरक्षित इस आश्रय तक पहुंचाने के लिए उन्होंने कुल 11 गाड़ियां तैनात की हैं, जिनमें छह बेहद लग्जरी रोल्स-रॉयस कारें भी शामिल हैं। ये गाड़ियां विभिन्न होटलों और अन्य स्थानों से फंसे हुए यात्रियों को लेकर सीधे फार्महाउस पहुंच रही हैं।
यहां शरण लेने वालों में भारत का एक राष्ट्रीय स्तर का फुटबॉलर हरप्रीत भी शामिल है, जिसने अपनी दर्दभरी दास्तां साझा की। उसने बताया कि वह पहले से ही एक बहुत मुश्किल दौर से गुजर रहा था, क्योंकि एक एजेंट ने उसे राष्ट्रीय स्तर पर फुटबॉल खेलने का मौका दिलाने का झांसा देकर बुरी तरह ठग लिया था। इस धोखाधड़ी के कारण उसकी जीवन भर की सारी जमा-पूंजी डूब गई।
इस बीच यात्रा में आई रुकावटों और संघर्ष की स्थिति ने उसे बिना पैसों के यूएई में फंसा दिया। हरप्रीत ने बताया कि वह लगभग 10 किलोमीटर तक पैदल चला और फिर अजनबियों से लिफ्ट लेकर किसी तरह इस सुरक्षित आश्रय स्थल तक पहुंचने में कामयाब रहा, जहां वह अब पूरी तरह महफूज है।
इस फार्महाउस में ईरान के मूल निवासी मुस्तफा भी ठहरे हुए हैं। उन्होंने बताया कि मौजूदा तनाव के बीच अपने ईरानी पासपोर्ट पर लगी पाबंदियों के कारण वे ओमान के मस्कट की आगे की यात्रा करने में पूरी तरह असमर्थ हैं। इस पूरी अफरातफरी के दौरान मुस्तफा की साइकिल भी कहीं खो गई है, जिससे उनकी मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं। फिलहाल उन्हें भी डॉ. जैन द्वारा बनाए गए इसी आश्रय स्थल में सुरक्षित पनाह मिली हुई है।
उड़ानें रद्द होने के अलावा, हवाई टिकटों की आसमान छूती कीमतों ने भी फंसे हुए भारतीयों की पीड़ा को कई गुना बढ़ा दिया है। कई यात्रियों ने अपनी गहरी परेशानी जाहिर करते हुए बताया कि हवाई किराए में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। एक यात्री का दर्द छलक पड़ा और उसने हताशा में कहा कि हम तो आम इंसान हैं, भला एक लाख रुपये का टिकट कैसे खरीद सकते हैं।
फिलहाल, अजमान का यह आश्रय घर अलग-अलग पृष्ठभूमि से आने वाले कई व्यक्तियों और परिवारों का बहुत बड़ा सहारा बना हुआ है। ये सभी फंसे हुए यात्री यहां सुरक्षित रहकर उस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं जब हालात पूरी तरह सामान्य होंगे और उनकी वापसी की उड़ानें फिर से सुचारू रूप से शुरू हो सकेंगी।
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