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जगदीप चोकर: नहीं रहे लोकतंत्र के प्रहरी, ADR के संस्थापक और चुनावी सुधार के योद्धा का कैसा था जीवनकाल?

| Updated: September 12, 2025 12:05

IIM के प्रोफेसर से लेकर चुनावी सुधारों के सबसे बड़े योद्धा बनने तक की कहानी, जानिए कैसे ADR ने महाराष्ट्र चुनावों में पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

नई दिल्ली: भारत के लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए अथक प्रयास करने वाले जगदीप चोकर अब नहीं रहे, शुक्रवार को हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया. लोकतंत्र के एक सच्चे प्रहरी के रूप में आज उन्हें याद किया जा रहा है। उन्होंने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की स्थापना की, एक ऐसी संस्था जो आज चुनावी सुधारों का पर्याय बन गई है।

आपको बता दें कि, चोकर और एडीआर ने भारतीय चुनावों में धन-बल और बाहुबल के प्रभाव को कम करने के लिए एक लंबी और अथक लड़ाई लड़ी है।

जगदीप चोकर कोई राजनेता नहीं हैं, बल्कि भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद (IIM-A) में एक प्रोफेसर थे। उनके जीवन में एक बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने महसूस किया कि भारतीय राजनीति में अपराधीकरण और भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें जम चुकी हैं।

आम आदमी के पास अपने उम्मीदवारों के बारे में कोई जानकारी नहीं होती थी। इसी समस्या का समाधान करने के लिए, उन्होंने कुछ अन्य प्रोफेसरों और छात्रों के साथ मिलकर 1999 में एडीआर की स्थापना की।

एडीआर का सफ़र आसान नहीं था। उनकी पहली और सबसे बड़ी लड़ाई उम्मीदवारों के आपराधिक, वित्तीय और शैक्षिक रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने की थी। एडीआर ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की।

2002 में, सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें चुनाव आयोग को निर्देश दिया गया कि वह सभी उम्मीदवारों के लिए अपनी संपत्ति, देनदारियों, शैक्षिक योग्यता और आपराधिक पृष्ठभूमि का खुलासा करना अनिवार्य करे। यह भारतीय लोकतंत्र में एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण कदम था।

इस फैसले के बाद, राजनीतिक दल एकजुट हो गए और उन्होंने इस फैसले को पलटने की कोशिश की। लेकिन चोकर और उनकी टीम ने हार नहीं मानी। वे फिर से सुप्रीम कोर्ट गए और 2003 में, अदालत ने अपने फैसले को बरकरार रखा। यह एडीआर और भारत के आम नागरिक की एक बड़ी जीत थी। आज, हर चुनाव से पहले, हम जो उम्मीदवारों के बारे में विस्तृत जानकारी देखते हैं, वह जगदीप चोकर और एडीआर के अथक प्रयासों का ही परिणाम है।

महाराष्ट्र चुनाव में गड़बड़ी के आरोप और ADR की भूमिका

हाल ही में, जगदीप चोकर और एडीआर एक बार फिर चर्चा में था, इस बार महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में कथित गड़बड़ियों को लेकर। एडीआर और “वोट फॉर डेमोक्रेसी” जैसे अन्य संगठनों ने 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में कई गंभीर अनियमितताओं और विसंगतियों की ओर इशारा किया है।

इन संगठनों द्वारा जारी की गई रिपोर्टों में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्टों में कहा गया है कि डाले गए वोटों और गिने गए वोटों के बीच एक बड़ा अंतर है। कई निर्वाचन क्षेत्रों में, मतदाताओं के नामों को मनमाने ढंग से हटाने और जोड़ने के भी आरोप लगे हैं।

एडीआर ने हमेशा से ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। हालांकि वे सीधे तौर पर ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप नहीं लगाते, लेकिन उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में और अधिक पारदर्शिता होनी चाहिए। उनका मानना है कि वोटर-वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) की पर्चियों का 100% मिलान होना चाहिए ताकि ईवीएम पर लोगों का भरोसा बना रहे।

महाराष्ट्र के चुनावों के संदर्भ में, एडीआर ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग ने इन विसंगतियों पर ध्यान नहीं दिया और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया। एडीआर की मांग है कि इन सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

जगदीप चोकर का मानना था कि एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव बहुत महत्वपूर्ण हैं। यदि लोगों का चुनावी प्रक्रिया से विश्वास उठ गया, तो यह लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा होगा। इसीलिए वे और उनकी संस्था लगातार चुनावी प्रक्रिया में सुधार के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

एक अथक योद्धा की कहानी

जगदीप चोकर की कहानी एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसने व्यवस्था की खामियों को देखा और चुप बैठने के बजाय उन्हें ठीक करने का बीड़ा उठाया। उन्होंने अकादमिक दुनिया के आराम को छोड़कर लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने का कठिन रास्ता चुना।

उनके काम ने न केवल भारत में, बल्कि दुनिया भर में चुनावी सुधारों के लिए काम करने वाले लोगों को प्रेरित किया है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि एक अकेला व्यक्ति भी, अगर दृढ़ निश्चय कर ले, तो समाज में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।

आज जब भारतीय लोकतंत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब जगदीप चोकर जैसे लोगों का होना हमें आशा देता है। वे हमें याद दिलाते हैं कि लोकतंत्र केवल वोट देने का अधिकार नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी हमारी जिम्मेदारी है कि चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी हों।

जगदीप चोकर वास्तव में हमारे लोकतंत्र के एक अनमोल रत्न और सच्चे प्रहरी हैं, जिनकी लड़ाई हम सभी की लड़ाई है। उनका संघर्ष हमें प्रेरणा देता है कि हम भी अपने लोकतंत्र की रक्षा के लिए हमेशा सजग और सक्रिय रहें।

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