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जापान चुनाव: पीएम साना ताकाइची की एलडीपी ने रचा इतिहास, प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी

| Updated: February 9, 2026 16:21

जापान में रूढ़िवादी एलडीपी की ऐतिहासिक वापसी: साना ताकाइची को मिला दो-तिहाई बहुमत, पीएम मोदी ने दी बधाई, जानिए भारत-चीन संबंधों पर क्या होगा इसका असर।

टोक्यो: जापान की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत करते हुए, प्रधानमंत्री साना ताकाइची के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ ‘लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी’ (LDP) ने रविवार को हुए मध्यावधि चुनावों (Snap Election) में ऐतिहासिक जीत हासिल की है। अनुमानों के मुताबिक, एलडीपी भारी बहुमत (Landslide Victory) की ओर बढ़ रही है, जो पार्टी के इतिहास का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जा रहा है।

आंकड़ों का खेल और एलडीपी का दबदबा

निचले सदन की कुल 465 सीटों में से, रूढ़िवादी नेता ताकाइची की एलडीपी को अकेले 316 सीटें मिलने की उम्मीद है। अपने गठबंधन सहयोगी ‘जापान इनोवेशन पार्टी’ (Ishin) के साथ मिलकर, सत्ताधारी ब्लॉक के पास अब कुल 352 सीटें होंगी, जो संसद में उन्हें एकतरफा ताकत प्रदान करती हैं।

एनएचके (NHK) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इशिन को 36 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि विपक्षी दलों को संयुक्त रूप से सिर्फ 113 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा है।

एक बार इन नतीजों की आधिकारिक पुष्टि हो जाने के बाद, ताकाइची के पास अपने रूढ़िवादी एजेंडे को आगे बढ़ाने का पूरा अवसर होगा। संसद में दो-तिहाई बहुमत होने के कारण, वह जापान के शांतिवादी संविधान में संशोधन करने के अपने लंबे समय से देखे गए सपने को पूरा करने की मजबूत स्थिति में होंगी।

संसदीय गणित: बहुमत के मायने

यदि गठबंधन कम से कम 261 सीटें सुरक्षित करता है—जिसे “पूर्ण स्थिर बहुमत” कहा जाता है—तो वह सभी संसदीय समितियों को नियंत्रित कर सकता है, जिससे प्रमुख बजट प्रस्तावों सहित अन्य कानूनों को पास करना बेहद आसान हो जाएगा। वहीं, 310 सीटों का ‘सुपरमेजॉरिटी’ (Supermajority) गठबंधन को ऊपरी सदन (Upper House) के फैसलों को पलटने की शक्ति देता है, जहां वर्तमान में उनके पास बहुमत नहीं है।

चुनाव से पहले ताकाइची ने स्पष्ट किया था कि यदि जनमत सर्वेक्षण गलत साबित हुए और वह निचले सदन में बहुमत खो देती हैं, तो वह इस्तीफा दे देंगी। लेकिन नतीजों ने साबित कर दिया कि जनता उनके साथ है।

ताकाइची का जुआ और पार्टी का पुनरुद्धार

64 वर्षीय ताकाइची ने पिछले साल के अंत में लंबे समय से सत्ता में रही एलडीपी का नेतृत्व संभाला था। अपनी व्यक्तिगत लोकप्रियता को भुनाने के लिए उन्होंने समय से पहले चुनाव कराने का फैसला किया, जो एक बड़ा राजनीतिक जोखिम था। एलडीपी पिछले सात दशकों में से अधिकांश समय जापान की सत्ता में रही है, लेकिन हाल ही में फंडिंग की अनियमितताओं और धार्मिक घोटालों के कारण संघर्ष कर रही थी।

ताकाइची ने अपना कार्यकाल शुरू होने के महज तीन महीने बाद ही संसद भंग कर दी, ताकि अपनी लोकप्रियता कम होने से पहले वह एक नया जनादेश प्राप्त कर सकें और पार्टी को स्थिर कर सकें।

नतीजे आने के दौरान एक टीवी साक्षात्कार में उन्होंने कहा, “इस चुनाव में प्रमुख नीतिगत बदलाव शामिल थे—विशेष रूप से आर्थिक और राजकोषीय नीति में बदलाव, साथ ही सुरक्षा नीति को मजबूत करना। ये ऐसी नीतियां हैं जिनका काफी विरोध हुआ है… यदि हमें जनता का समर्थन मिला है, तो हमें पूरी ताकत से इन मुद्दों का समाधान करना होगा।”

विरोधियों का सूपड़ा साफ़

यह अनुमानित जीत एलडीपी की हालिया मुसीबतों से बिल्कुल उलट है। ताकाइची के दो पूर्ववर्तियों के कार्यकाल में, भ्रष्टाचार के घोटालों और बढ़ती महंगाई के बीच पार्टी ने अपना संसदीय बहुमत खो दिया था। 2024 में, एलडीपी ने संसद के दोनों सदनों में अपना बहुमत गंवा दिया था और कोमेइटो के साथ उसका दशकों पुराना गठबंधन टूट गया था।

इस चुनाव में, कोमेइटो ने ‘कॉन्स्टिट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ जापान’ के साथ हाथ मिलाकर सबसे बड़ा विपक्षी गुट बनाया। लेकिन अधिक संगठित विपक्ष का सामना करने के बावजूद, ताकाइची की व्यक्तिगत लोकप्रियता ने पार्टी की किस्मत बदल दी, और सरकार की अप्रूवल रेटिंग 70% से ऊपर बनी रही।

सुदूर-दक्षिणपंथ (Far-Right) की स्थिति

सुदूर-दक्षिणपंथी पार्टी ‘सनसीटो’ (Sanseito) ने रिकॉर्ड 190 उम्मीदवार मैदान में उतारे और संसद में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है। ओपिनियन पोल बताते हैं कि यह पार्टी लगभग 15 सीटें जीत सकती है, जो पहले सिर्फ दो थीं।

सनसीटो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘MAGA’ आंदोलन के साथ संबंध बनाने की कोशिश की है। भले ही यह एक छोटी पार्टी बनी रहेगी, लेकिन इसके उदय ने जापान के राजनीतिक विमर्श को दक्षिणपंथ की ओर मोड़ने में मदद की है।

कौन हैं साना ताकाइची?

जापान की पहली निर्वाचित महिला प्रधानमंत्री, साना ताकाइची एक अति-रूढ़िवादी नेता हैं जो अपनी सख्त विचारधारा और विशिष्ट व्यक्तिगत शैली के लिए जानी जाती हैं। खुद को मार्गरेट थैचर की प्रशंसक बताने वाली ताकाइची लंबे समय से जापान की “आयरन लेडी” बनने की ख्वाहिश रखती हैं। अक्टूबर में पदभार संभालने के बाद उन्होंने “काम, काम, काम” (work, work, work) का संकल्प लिया था।

एक कट्टर रूढ़िवादी के रूप में, वह समलैंगिक विवाह और विवाहित जोड़ों द्वारा अलग-अलग सरनेम का उपयोग करने का विरोध करती हैं। वह साम्राज्यिक सिंहासन पर महिलाओं के उत्तराधिकार के विचार के भी खिलाफ हैं।

रक्षा के मामले में वह बेहद सख्त हैं और अमेरिका के साथ घनिष्ठ गठबंधन बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करती हैं, साथ ही जापान की अपनी सैन्य क्षमताओं को भी मजबूत कर रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनके संबंध काफी गर्मजोशी भरे हैं, और पदभार संभालने के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने उनसे मुलाकात की थी।

एक मोटरबाइक उत्साही और ‘हैवी मेटल’ ड्रमर के रूप में, ताकाइची युवाओं के बीच एक पॉप-कल्चर फेनोमेनन बन गई हैं। आलोचक भले ही यह कहें कि उन्होंने अपनी कैबिनेट में महिलाओं को कम बढ़ावा दिया है, लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग है।

चीन के साथ तनाव और विदेश नीति

जापान के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदार चीन के साथ संबंध तब और तनावपूर्ण हो गए जब ताकाइची ने पिछले नवंबर में सुझाव दिया कि यदि चीन ने ताइवान पर बलपूर्वक कब्जा करने की कोशिश की, तो जापान सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है। उन्हें पहले से ही ‘चीन हॉक’ (China Hawk) के रूप में देखा जाता था, और उनके प्रधानमंत्री बनने के बमुश्किल दो सप्ताह बाद आए इन बयानों ने चिंताओं को बढ़ा दिया।

विश्लेषकों का कहना है कि दक्षिण कोरिया के साथ वह स्थिर संबंध बनाए रखेंगी, क्योंकि दोनों देश उत्तर कोरिया और चीन से सुरक्षा खतरों को लेकर समान चिंताएं साझा करते हैं।

आर्थिक वादे और जनता की राय

उनका एक प्रमुख चुनावी वादा—भोजन पर 8% बिक्री कर (Sales Tax) को निलंबित करना—परिवारों को बढ़ती कीमतों से निपटने में मदद करने के लिए था। हालांकि, जापान के भारी कर्ज को देखते हुए निवेशकों में चिंता है कि इस नीति के लिए धन कहां से आएगा।

टोक्यो की एक मतदाता, रितसुको निवोमिया ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “लोग चाहते हैं कि उनका जीवन बेहतर और अधिक आरामदायक हो क्योंकि हम महंगाई के आदी नहीं हैं… इसलिए लोग बहुत चिंतित हैं। मुझे लगता है कि हमें अल्पकालिक सुधारों के बजाय दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता है।”

अभियान के दौरान, ताकाइची ने आव्रजन नियमों को सख्त करने और विदेशी नागरिकों द्वारा कर व स्वास्थ्य बीमा के भुगतान न करने के मुद्दों से निपटने पर जोर दिया। आलोचकों का कहना है कि ये नीतियां ऐसे देश में चिंता और विभाजन पैदा कर सकती हैं जहां केवल 3% आबादी विदेशी नागरिकों की है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताकाइची को उनकी “ऐतिहासिक जीत” पर बधाई दी और कहा कि जापान और भारत की दोस्ती “नई ऊंचाइयों” तक पहुंच सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ताकाइची को बधाई देते हुए उन्हें “अत्यधिक सम्मानित और बहुत लोकप्रिय” नेता कहा। ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखते हुए ट्रंप ने कहा, “मैं आपके रूढ़िवादी, ‘शक्ति के माध्यम से शांति’ (Peace Through Strength) के एजेंडे को पारित करने में बड़ी सफलता की कामना करता हूं।”

उन्होंने यह भी कहा कि जापान के अद्भुत लोग, जिन्होंने इतने उत्साह के साथ मतदान किया, उन्हें हमेशा मेरा मजबूत समर्थन मिलेगा।

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इसे “बड़ी जीत” बताया और कहा, “जब जापान मजबूत होता है, तो एशिया में अमेरिका मजबूत होता है।”

बर्फबारी के बीच मतदान

जापान के लोगों ने 36 वर्षों में देश के पहले मध्य-शीतकालीन (mid-winter) चुनाव में मतदान करने के लिए बर्फ और खराब मौसम का सामना किया। परिवहन मंत्रालय ने बताया कि रविवार की सुबह तक 37 ट्रेन लाइनें और 58 नौका मार्ग बंद थे, जबकि 54 उड़ानें रद्द कर दी गई थीं। टोक्यो में भी दुर्लभ बर्फबारी देखी गई जब मतदाता पोलिंग बूथ की ओर जा रहे थे।

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