कांग्रेस की बीट कवर करने वाले पत्रकारों के लिए दिल्ली में रात साढ़े दस बजे का मतलब आमतौर पर दिन का खत्म होना होता है। लेकिन इस बुधवार की रात कुछ अलग ही कहानी बयां कर रही थी।
अगले महीने होने वाले केरल विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची पहले ही आ चुकी थी और मैं फील्ड से वापस घर लौट रहा था। तभी एक सूत्र ने कुछ हलचल की जानकारी दी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास 10 राजाजी मार्ग पर कई गाड़ियां दाखिल हो रही थीं।
उत्सुकता के चलते मैंने कुछ फोन घुमाए और पता चला कि कांग्रेस केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) की एक बेहद अहम बैठक शुरू होने वाली है। जाहिर तौर पर, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी केरल में टिकट बंटवारे के तरीके से खुश नहीं थे।
सूत्रों की मानें तो राहुल गांधी ने राज्य इकाई द्वारा सुझाए गए नामों पर पूरी तरह से निर्भर रहने के बजाय सीईसी में एक व्यवस्थित प्रस्तुति की वकालत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि टिकट बंटवारे में जातीय समीकरण, जीतने की क्षमता और उम्मीदवारों के चुनावी ट्रैक रिकॉर्ड को गहराई से ध्यान में रखा जाना चाहिए।
रात करीब साढ़े दस बजे शुरू हुई यह बैठक देर रात ढाई बजे तक चली। इस मैराथन मंथन में राहुल गांधी, खड़गे और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उम्मीदवारों की बारीकी से समीक्षा की। इस दौरान एक बड़ा फैसला भी लिया गया कि किसी भी मौजूदा सांसद को विधानसभा चुनाव के मैदान में नहीं उतारा जाएगा।
कांग्रेस में इतनी देर रात तक बैठकों का दौर काफी दुर्लभ है। बीते पांच सालों की मेरी रिपोर्टिंग के दौरान तो ऐसा शायद ही कभी हुआ हो। यह दिखाता है कि पार्टी केरल चुनाव को कितनी गंभीरता से ले रही है। अमूमन इस तरह की देर रात की बैठकें भाजपा में अधिक देखने को मिलती हैं, जहां अक्सर प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और रक्षा मंत्री ऐसे मंथन में शामिल होते हैं।
उम्मीदवारों की सूची में केसी वेणुगोपाल गुट का दबदबा
केरल कांग्रेस की चुनावी मशीनरी से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि लगभग 60 प्रतिशत उम्मीदवार सीधे तौर पर लोकसभा सांसद और पार्टी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल के करीबी माने जा रहे हैं।
सूत्र ने साफ किया कि केरल के 55 उम्मीदवारों की एक शुरुआती सूची में 17 नाम केसी वेणुगोपाल गुट के थे। इसके अलावा रमेश चेन्निथला गुट के नौ और वीडी सतीशन गुट के पांच नेताओं को टिकट मिला।
कई अन्य सांसदों ने भी अपने करीबियों के लिए एक या दो सीटें हासिल करने में सफलता पाई। हालांकि, सूत्रों के अनुसार शशि थरूर ने अपने किसी समर्थक के लिए टिकट नहीं मांगा और इस पूरी प्रक्रिया में ज्यादा हस्तक्षेप भी नहीं किया।
सीईसी बैठकों का हिस्सा रहे कांग्रेस के एक नेता ने साफ किया कि भले ही राज्य के नेताओं से नाम आए हों, लेकिन टिकट पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही दिए गए हैं। इसके लिए बकायदा सर्वे रेटिंग और जिला कांग्रेस कमेटियों से मिले फीडबैक को आधार बनाया गया।
पार्टी अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ मिलकर 140 में से करीब 95 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। पुरानी पार्टी ने अपने 22 मौजूदा विधायकों में से 19 को दोबारा मैदान में उतारा है और टिकट बंटवारे के बाद अपनी जीत को लेकर काफी आश्वस्त नजर आ रही है।
ईसाई, नायर और एझावा समुदाय को तरजीह
इस बार कांग्रेस काफी हद तक ईसाई समुदाय पर भरोसा जता रही है। पार्टी ने 22 ईसाई उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जिनमें से 10 टिकट अकेले सिरो-मालाबार समुदाय के खाते में गए हैं।
इसके साथ ही नायर समुदाय को 21 और एझावा उम्मीदवारों को 20 टिकट बांटे गए हैं।
सामाजिक समीकरणों को संतुलित रखने के लिए जहां मुसलमानों को 12 टिकट दिए गए हैं, वहीं ब्राह्मण समुदाय को भी तीन टिकट हासिल हुए हैं। पार्टी ने उम्र की सीमा को भी थोड़ा कम रखा है। घोषित 92 उम्मीदवारों में से 52 उम्मीदवार 50 वर्ष से कम उम्र के हैं।
विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए सांसदों को साफ ‘ना’
के. सुधाकरन, अदूर प्रकाश और शफी परम्बिल सहित कम से कम पांच सांसदों ने केरल विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। लेकिन राहुल गांधी इस बात पर अड़े थे कि सांसदों को मैदान में उतारने का मतलब होगा कई लोकसभा उपचुनावों को न्यौता देना।
इसके अलावा, इससे मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर भी असमंजस की स्थिति पैदा हो सकती थी।
हालांकि, कांग्रेस के एक अंदरूनी सूत्र का कहना है कि अगर पार्टी बहुमत हासिल कर लेती है, तो विधायक अभी भी किसी सांसद को मुख्यमंत्री के रूप में प्रस्तावित कर सकते हैं। ऐसी किसी भी सलाह पर आलाकमान द्वारा विचार किया जाएगा।
पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं
इस व्यापक कवायद के बावजूद, पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर थम नहीं रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने टिकट वितरण में महिलाओं की कम भागीदारी का मुद्दा उठाया है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि घोषित 92 सीटों में से केवल 9 सीटें ही महिला उम्मीदवारों के हिस्से में आई हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर राहुल गांधी को टैग करते हुए उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने इसे केरल में महिलाओं के प्रति पार्टी की भारी उदासीनता करार दिया।
सूत्रों का कहना है कि अगर मौजूदा सांसद के. सुधाकरन कन्नूर से चुनाव नहीं लड़ते, तो शमा मोहम्मद खुद वहां से टिकट की उम्मीद कर रही थीं। टिकट न मिलने के कारण अब वह राज्य नेतृत्व से नाराज बताई जा रही हैं।
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