महिला आरक्षण कानून को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने की दिशा में सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। एक शुरुआती पहल के तहत सरकार ने लोकसभा और विधानसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया है। सबसे खास बात यह है कि राज्यों के बीच मौजूद सीटों का वर्तमान अनुपात पहले की तरह ही बरकरार रहेगा। विपक्षी दलों के साथ आम सहमति बनाने के उद्देश्य से सरकार ने यह प्रस्ताव दिया है कि सीटों में यह इजाफा 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाए। इसका सीधा अर्थ है कि इस पूरी प्रक्रिया को वर्तमान में चल रही नई जनगणना से अलग रखा जाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में सोमवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में मौजूद एक विपक्षी सांसद ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि चर्चा के दौरान एक प्रस्ताव यह आया कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 कर दी जाए। इनमें से करीब 270 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं।
संसद भवन में आयोजित इस अहम बैठक में अमित शाह ने बीजेडी, वाईएसआरसीपी, एनसीपी (एसपी), शिव सेना (यूबीटी) और एआईएमआईएम के नेताओं के साथ विस्तार से चर्चा की। उम्मीद जताई जा रही है कि वे जल्द ही कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और सपा के नेताओं के साथ भी बातचीत करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस मुद्दे पर मंगलवार को एक सर्वदलीय बैठक भी बुला सकती है, जिसके बाद प्रस्तावित बदलावों पर कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।
बैठक में शामिल दो अन्य दलों के नेताओं ने भी गृह मंत्री द्वारा दिए गए सुझावों की पुष्टि की है। सूत्रों ने बताया कि अमित शाह ने लोकसभा के साथ-साथ विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं में भी सीटों की संख्या 50% तक बढ़ाने का सुझाव दिया है।
सरकार की योजना साल 2029 के आम चुनावों से इस नई व्यवस्था और महिला कोटे को पूरी तरह लागू करने की है।
भाजपा के एक सहयोगी दल के सांसद ने स्पष्ट किया कि राज्यों का मौजूदा सीट अनुपात जस का तस रखा जाएगा। इस फैसले से दक्षिण भारतीय राज्यों की उन तमाम चिंताओं को दूर किया जा सकेगा, जिनमें यह आशंका जताई जा रही थी कि नई जनगणना और परिसीमन के बाद आबादी के हिसाब से उनकी सीटों का नुकसान हो सकता है।
एससी/एसटी कोटे में भी महिलाओं की हिस्सेदारी का सुझाव
अमित शाह ने एक और महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित सीटों के भीतर भी महिलाओं को कोटा देने की बात कही है। गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी, आरजेडी और कई पिछड़े वर्ग के नेता लंबे समय से इस तरह की व्यवस्था लागू करने की मांग करते आ रहे हैं।
इस पूरी प्रक्रिया को मौजूदा जनगणना से अलग करने का एक बड़ा मतलब यह भी है कि जातीय गणना के नतीजों को परिसीमन में शामिल नहीं किया जाएगा। सोमवार की बैठक में शामिल एक विपक्षी नेता के अनुसार, गृह मंत्री ने बताया कि देश में करीब 81 लाख जातीय समूह हैं, ऐसे में उन सभी को परिसीमन प्रक्रिया में ध्यान में रखना लगभग असंभव है।
कानूनों में करना होगा संशोधन
इन बदलावों को अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार को महिला आरक्षण अधिनियम और परिसीमन आयोग अधिनियम में संशोधन करना होगा। मौजूदा कानून में यह स्पष्ट रूप से कहा गया था कि कोटा नई जनगणना और परिसीमन के बाद ही लाया जाएगा। माना जा रहा है कि 2011 की जनगणना के आधार पर इसी साल जून तक एक नए परिसीमन आयोग का गठन किया जा सकता है।
सूत्रों का कहना है कि इन कानूनों में आवश्यक संशोधन करने के लिए सरकार संसद के मौजूदा सत्र की अवधि बढ़ा सकती है या फिर एक विशेष सत्र भी बुला सकती है।
गृह मंत्री अमित शाह ने क्या कहा?
विपक्षी नेताओं के साथ हुई बातचीत में अमित शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार वर्तमान जनगणना के पूरा होने का इंतजार नहीं करना चाहती। यह प्रक्रिया 2029 तक खिंच सकती है, जिससे महिला आरक्षण कानून को लागू करने में बेवजह की देरी होगी। दिलचस्प बात यह है कि सितंबर 2023 में जब ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया जा रहा था, तब भी कई विपक्षी दलों ने इसे नई जनगणना के बाद परिसीमन से जोड़ने की सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे और इसे तुरंत लागू करने की मांग की थी।
यद्यपि सरकार ने सोमवार की वार्ता के लिए सभी दलों को आमंत्रित किया था, लेकिन कांग्रेस, वामपंथी दल, टीएमसी, आम आदमी पार्टी (आप) और डीएमके जैसे प्रमुख दल इस बैठक से दूर रहे। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के सहयोगियों की एक अलग बैठक बुलाई। इस बैठक में यह फैसला लिया गया कि सरकार से इन प्रस्तावित बदलावों को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट की मांग की जाएगी।
टीडीपी सूत्रों का कहना है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने इस पूरे प्रस्ताव पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के साथ भी चर्चा की है।
बैठक में मौजूद एक सांसद के मुताबिक, हर राज्य में महिलाओं के लिए आरक्षित होने वाली सीटों का फैसला ‘लॉटरी सिस्टम’ के जरिए करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक इस बात पर कोई ठोस चर्चा नहीं हुई है कि ये सीटें स्थायी रूप से तय होंगी या फिर रोटेशन के आधार पर आरक्षित की जाएंगी।
बता दें कि 10 मार्च को प्रकाशित एक हालिया मीडिया रिपोर्ट में भी इस बात का जिक्र किया गया था कि सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम (संविधान का 106वां संशोधन अधिनियम) को परिसीमन और जनगणना की प्रक्रिया से पूरी तरह अलग करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है।
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