कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक हालिया बयान ने एक नए राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। 1 फरवरी, 2025 को केरल के इडुक्की जिले में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने यह टिप्पणी की।
अपने भाषण के दौरान खड़गे ने केरल के लोगों की जमकर तारीफ की। उन्होंने वहां की जनता को ‘शिक्षित और चतुर’ बताते हुए कहा कि उन्हें आसानी से गुमराह नहीं किया जा सकता है।
विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने केरल के लोगों के शैक्षिक स्तर की तुलना गुजरात और कुछ अन्य क्षेत्रों के लोगों से की। खड़गे ने अपने संबोधन में गुजरात और अन्य राज्यों के लोगों को कथित तौर पर ‘अनपढ़’ करार दिया।
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन समेत अन्य नेताओं को केरल की जनता को गुमराह न करने की नसीहत दी। उन्होंने मंच से स्पष्ट शब्दों में कहा, “केरल के लोगों को गुमराह मत करो। वे बहुत चतुर हैं, वे शिक्षित हैं।”
उनके इस बयान का भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कड़ा विरोध किया है। बीजेपी नेताओं ने इसे गुजरात की जनता का सीधा अपमान माना है, जिससे केरल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दोनों पार्टियों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है।
गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर खड़गे की कड़ी आलोचना की। संघवी ने कहा कि यह बयान गुजरात के लगभग छह करोड़ निवासियों के लिए बेहद अपमानजनक है।
उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि यह महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल और नरेंद्र मोदी जैसी महान हस्तियों सहित राज्य के ऐतिहासिक योगदान को कमतर आंकने की एक कोशिश है।
संघवी के मुताबिक, गुजरात की सत्ता से बाहर होने की हताशा में कांग्रेस लगातार राज्य के खिलाफ ऐसा अभियान चला रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुजरात के लोग राजनीतिक रूप से काफी जागरूक हैं और वे अपने राज्य का अपमान कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे।
चेतावनी भरे लहजे में संघवी ने कहा, “गुजरात कभी माफ नहीं करेगा।” उनका यह बयान इस बात का संकेत है कि खड़गे की टिप्पणियों का असर आगामी केरल चुनावों के साथ-साथ गुजरात की राजनीति पर भी पड़ेगा।
बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी इस मामले में कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने खड़गे से सवाल किया कि क्या वे महात्मा गांधी और सरदार पटेल जैसे गुजरात के दिग्गज नेताओं की बौद्धिक क्षमता पर भी संदेह कर रहे हैं।
त्रिवेदी ने कांग्रेस पर चुनाव से पहले ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाने का गंभीर आरोप लगाया।
गौरतलब है कि 9 अप्रैल, 2025 को केरल में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। ऐसे में खड़गे और बीजेपी के बीच हुई इस जुबानी जंग ने राज्य के सियासी माहौल को और भी ज्यादा गर्म कर दिया है।
केरल अपने अनोखे राजनीतिक परिदृश्य और जागरूक मतदाताओं के लिए जाना जाता है। यहां दोनों ही प्रमुख पार्टियां अपना-अपना जनाधार बढ़ाने की पूरी कोशिश कर रही हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि खड़गे के बयान को केरल के शिक्षित मतदाताओं के बीच कांग्रेस की पैठ मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, बीजेपी की तीखी प्रतिक्रियाएं गुजरात के क्षेत्रीय गौरव को बचाने और कांग्रेस को घेरने की रणनीति का हिस्सा हैं।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदान के दिन तक इन बयानों का केरल के मतदाताओं पर क्या असर पड़ता है। चुनाव नजदीक आते ही दोनों पार्टियों द्वारा अपने प्रचार अभियान को और तेज करने की उम्मीद है।
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