अहमदाबाद: भारत में सुरक्षा के नाम पर सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया जा रहा है, लेकिन अब यही कैमरे निजता (Privacy) के लिए सबसे बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, देश के एक मैटरनिटी हॉस्पिटल (प्रसूति गृह) के हैक किए गए सीसीटीवी फुटेज टेलीग्राम पर बेचे जा रहे थे। इस घटना ने देशभर में लगे लाखों कैमरों की सुरक्षा और प्राइवेसी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यूट्यूब वीडियो से खुला राज
इस साल की शुरुआत में, गुजरात पुलिस को मीडिया के माध्यम से कुछ ऐसे यूट्यूब वीडियो के बारे में पता चला जो बेहद आपत्तिजनक थे। शहर के एक प्रसूति अस्पताल के इन वीडियो में गर्भवती महिलाओं को मेडिकल चेकअप कराते और इंजेक्शन लेते हुए दिखाया गया था।
हैरानी की बात यह थी कि इन वीडियो के साथ एक लिंक दिया गया था, जो सीधे टेलीग्राम चैनलों पर ले जाता था। वहां इन फुटेज के लंबे संस्करण (Longer videos) पैसे देकर खरीदने का विकल्प मौजूद था।
50,000 कैमरों का ‘साइबर रैकेट’
पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, एक बड़े साइबर क्राइम रैकेट का पर्दाफाश हुआ। पुलिस का कहना है कि हैकर्स ने न केवल उस अस्पताल को निशाना बनाया, बल्कि देश भर से कम से कम 50,000 सीसीटीवी कैमरों का फुटेज चुराया और उसे इंटरनेट पर बेच दिया।
भारत में, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में सीसीटीवी अब हर जगह मौजूद हैं। मॉल, दफ्तर, अस्पताल, स्कूल और यहां तक कि निजी घरों के बेडरूम तक के वीडियो इस रैकेट ने लीक कर दिए।
कैसे काम करता था यह नेटवर्क?
अहमदाबाद साइबर क्राइम विभाग की प्रमुख लवीना सिन्हा ने मामले की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए बताया, “ये अपराधी कई राज्यों में वीडियो सर्विलांस सिस्टम – यानी सीसीटीवी सिस्टम – को हैक कर रहे थे। इसमें अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, कॉर्पोरेट ऑफिस और निजी आवास शामिल थे।”
गुजरात के शीर्ष साइबर अपराध अधिकारी, हार्दिक मकड़िया ने खुलासा किया कि ये वीडियो 800 से 2,000 रुपये (लगभग $9-22) में बेचे जा रहे थे। टेलीग्राम चैनलों पर तो बाकायदा ‘सब्सक्रिप्शन’ के जरिए लाइव सीसीटीवी फीड भी ऑफर की जा रही थी।
डिफॉल्ट पासवर्ड: सुरक्षा में सबसे बड़ी चूक
जांच में पता चला है कि अधिकांश हैक किए गए कैमरों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे। श्री मकड़िया ने बताया कि कई यूजर्स ने कैमरों के ‘डिफॉल्ट पासवर्ड’ (जैसे Admin123) को बदला ही नहीं था। हैकर्स ने ‘ब्रूट फोर्स’ (Brute Force) तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसमें सॉफ्टवेयर के जरिए हजारों पासवर्ड कॉम्बिनेशन आजमाकर सिस्टम को तोड़ा जाता है।
साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेटर रितेश भाटिया चेतावनी देते हैं कि वायरलेस सीसीटीवी सिस्टम दूर से फुटेज देखने की सुविधा तो देते हैं, लेकिन इंटरनेट से कनेक्ट होते ही ये हैकर्स के निशाने पर आ जाते हैं।
भाटिया कहते हैं, “एक बार सिस्टम हैक होने पर अपराधी लाइव फुटेज देख सकते हैं, रिकॉर्ड कर सकते हैं या सिस्टम को बंद भी कर सकते हैं।” उन्होंने सलाह दी कि पासवर्ड मजबूत होना चाहिए जिसमें अक्षर, नंबर और सिंबल का मिश्रण हो, और समय-समय पर साइबर सुरक्षा ऑडिट कराना जरूरी है।
गिरफ्तारियां और कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए टेलीग्राम और यूट्यूब से संपर्क किया, जिसके बाद वीडियो हटा दिए गए। फरवरी से अब तक पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। ये गिरफ्तारियां महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, दिल्ली और उत्तराखंड से की गई हैं।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ महिला मरीज की निजता के हनन, अश्लीलता फैलाने, ताक-झांक (voyeurism) और साइबर आतंकवाद (जो कि एक गैर-जमानती अपराध है) जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
हालांकि, तीन आरोपियों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील यश कोष्टी ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उनके मुवक्किल हैकर नहीं हैं और डेटा में सेंधमारी किसी और ने की है।
शर्म के कारण सामने नहीं आईं पीड़ित महिलाएं
इस पूरे प्रकरण का सबसे दुखद पहलू यह है कि किसी भी पीड़ित महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई। प्रभावित अस्पताल के निदेशक ने बताया कि डॉक्टरों को झूठे आरोपों से बचाने के लिए ये कैमरे लगाए गए थे, जिन्हें अब संवेदनशील क्षेत्रों से हटा दिया गया है।
गुजरात पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, “महिला मरीजों को डर है कि उनकी पहचान उजागर हो जाएगी, इसलिए वे शिकायत दर्ज कराने को तैयार नहीं हैं।”
अंततः, पुलिस अधिकारी की ओर से ही शिकायत दर्ज की गई।
मजलिस (महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के लिए कानूनी केंद्र) की ऑड्रे डी’मेलो का कहना है कि भारतीय समाज में पितृसत्तात्मक सोच के कारण अक्सर अपराध के लिए महिलाओं को ही दोषी ठहराया जाता है।
उन्होंने कहा, “अगर हम चाहते हैं कि अपराधी कानून की गिरफ्त में आएं, तो हमें सबसे पहले महिलाओं को शर्मिंदा करना बंद करना होगा।”
क्या कहते हैं नियम?
साल 2023 में भी एक यूट्यूबर के घर का निजी वीडियो वायरल होने की खबर आई थी। पिछले साल केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया था कि वे ऐसे आपूर्तिकर्ताओं से सीसीटीवी न खरीदें जिनका सुरक्षा उल्लंघन का इतिहास रहा हो। इसके बावजूद, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और कमजोर पासवर्ड के कारण ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय है कि सीसीटीवी निर्माताओं को भी सिगरेट के पैकेट की तरह चेतावनी देनी चाहिए कि यूजर्स डिफॉल्ट पासवर्ड को तुरंत बदलें।
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