इस साल भारत से लगभग 8,000 धनकुबेरों के देश छोड़ने का अनुमान है। यह पिछले साल की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक है। यह धनकुबेरों में देश छोड़ने की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है। दुनिया भर में निजी धन और निवेश इमीग्रेशन के ट्रेंड को ट्रैक करने वाली हेनले ग्लोबल सिटीजन्स रिपोर्ट में हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल की ग्रोथ के आंकड़ों के पूर्वानुमान के अनुसार, भारत में दस उन देशों में शामिल है, जहां इस साल धनकुबेरों में सबसे अधिक पलायन का अनुमान है। इन शीर्ष दस देशों में रूस, चीन, भारत, हांगकांग, यूक्रेन, ब्राजील, यूके, मैक्सिको, सऊदी अरब और इंडोनेशिया हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, “भारत को 2022 में लगभग 8,000 धनकुबेरों का शुद्ध नुकसान होने की आशंका है, जो 2019 के बाद से 14% बढ़ा है, तब यह शुद्ध घाटा 7,000 था।”
वैसे कोविड-19 के कारण लगे लॉकडाउन और यात्रा प्रतिबंधों से 2020 और 2021 के लिए किसी खास देश के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
इसमें यह भी कहा गया है कि भारत में एक तरफ जहां धनकुबेरों में पलायन बढ़ा है, वहीं नए करोड़पति भी अधिक पैदा हो रहे हैं। रिपोर्ट ने खुलासा किया कि उसे 2022 की पहली तिमाही में रिकॉर्ड पर निवेश प्रवास कार्यक्रम की सबसे अधिक संख्या प्राप्त हुई है- पिछली तिमाही की तुलना में 55% की वृद्धि, जो खुद रिकॉर्ड-तोड़ थी।
इस समय देश छोड़ने के मामले में इन चार देशों के धनकुबेर सबसे अधिक हैं- रूसी, भारतीय, अमेरिकी और ब्रितानी। वैसे बाहर जाने संबंधी पूछताछ मामले में पहली बार यूक्रेन वालों ने भी विश्व स्तर पर शीर्ष 10 में स्थान बनाया है।
वैश्विक हालात
उम्मीद के मुताबिक ही रूस के 15,000 धनकुबेर देश छोड़ने की तैयारी में हैं। वहीं चीन से 10,000, हांगकांग से 3,000 और यूक्रेन से 2,800 धनकुबेर अपना अपना देश छोड़ने को तैयार हैं। रिपोर्ट का मानना है कि लोग अमीर होने पर ठिकाना बदल लेते हैं। यही वजह है कि 2013 में लगभग 51,000 धनकुबेरों अपना देश छोड़ा था। ये आंकड़े 2019 में 110,000 तक पहुंच गए और इस साल अनुमान है कि देश छोड़ने वाले अमीरों की संख्या दुनियाभर में 88,000 होगी। रिपोर्ट का मानना है कि 2023 में यह संख्या बढ़ कर 125,000 तक पहुंचने वाली है।
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले 2022 में यूएई सबसे ज्यादा धन कुबेरों को आकर्षित करेगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस साल यूएई में 4000 धनकुबेर बस जाएंगे। वहीं ऑस्ट्रेलिया को 3,500 और सिंगापुर को 2,800 धनकुबेरों ने अपने नए निवास स्थान के रूप में चुना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ऐतिहासिक रूप से कनाडा और अमेरिका भारतीयों के लिए बेहद लोकप्रिय शिक्षा केंद्र रहे हैं, लेकिन गोल्डन वीजा के कारण अमीरों की रुचि ग्रीस, माल्टा, पुर्तगाल और यूरोपीय महाद्वीप पर बसने में बढ़ती जा रही है। सिंगापुर तकनीकी उद्यमियों के लिए एक पसंदीदा स्थान है। इसके अलावा ये देश अपनी मजबूत कानूनी व्यवस्था और विश्व स्तरीय वित्तीय सलाहकारों की उपलब्धता के कारण भी मशहूर हैं।











