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मध्य पूर्व युद्ध का असर: गुजरात के मोरबी में सिरेमिक उद्योग पर गहराया संकट, लाखों नौकरियां खतरे में

| Updated: March 4, 2026 16:22

खाड़ी देशों में तनाव से गैस की भारी किल्लत, 4 लाख मजदूरों की रोजी-रोटी पर मंडराया खतरा

मध्य पूर्व में जारी युद्ध की आंच अब भारत के उद्योगों तक पहुंचने लगी है। गुजरात के मोरबी में स्थित दुनिया के प्रमुख सिरेमिक टाइल उद्योग पर इस समय एक बड़ा संकट मंडरा रहा है। खाड़ी क्षेत्र में चल रहे तनाव के कारण प्रोपेन और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है, जो इन टाइलों के निर्माण के लिए सबसे अहम ईंधन हैं।

600 कारखाने और 4 लाख मजदूरों के भविष्य पर सवाल

मोरबी में सिरेमिक टाइल्स बनाने वाली 600 से अधिक औद्योगिक इकाइयां मौजूद हैं। इन फैक्टरियों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 4 लाख से ज्यादा लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है।

ये सभी कारखाने पूरी तरह से प्रोपेन और प्राकृतिक गैस पर निर्भर हैं। अगर गैस की आपूर्ति में आ रही ये रुकावटें जारी रहीं, तो इन औद्योगिक इकाइयों पर ताला लगाने की नौबत आ सकती है।

सिरेमिक टाइल्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के सदस्यों के अनुसार, पिछले महीने सऊदी के एक बंदरगाह पर आई किसी समस्या के कारण गैस आपूर्ति में बाधा आनी शुरू हुई थी, लेकिन अब युद्ध ने इस मुश्किल को कई गुना बढ़ा दिया है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष हरेशभाई बोपलिया ने चिंता जताते हुए कहा कि उनके पास प्रोपेन का स्टॉक सिर्फ तीन दिन का बचा है, जबकि प्राकृतिक गैस मुश्किल से एक हफ्ते तक ही चल पाएगी।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर जल्द ही गैस सप्लाई बहाल नहीं हुई, तो हमें उद्योगों को बंद करना पड़ेगा। हमारी सप्लाई चेन बुरी तरह से चरमरा गई है।”

इसके अलावा, एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने गुजरात गैस के अधिकारियों के साथ भी बैठक की है और दोनों पक्षों का मानना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो हालात और भी ज्यादा बिगड़ जाएंगे।

उद्योग के सामने खड़ी एक बड़ी आर्थिक चुनौती

स्थानीय उद्योगपति मणिभाई बावरवा ने इस स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि सिरेमिक उद्योग एक भयानक संकट के मुहाने पर है। उन्होंने बताया, “हमारा सारा ईंधन खाड़ी देशों से ही आता है। अगर गैस की आपूर्ति पहले की तरह सामान्य नहीं हुई, तो कई कारखाने हमेशा के लिए बंद हो सकते हैं।”

उन्होंने यह भी आशंका जताई कि युद्ध लंबा चलने पर गैस की कीमतें आसमान छुएंगी, जिससे उत्पादन लागत में भारी उछाल आएगा। बावरवा के मुताबिक:

“अगर गैस की कीमतों में 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है और उसी हिसाब से हम टाइल्स के दाम बढ़ाते हैं, तो यह देखना होगा कि बाजार उसे स्वीकार करता है या नहीं। यह इस उद्योग के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती है।”

कारखाने बंद होने से न केवल लाखों मजदूर बेरोजगार होंगे, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा। इसे देखते हुए अब इस उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने और उत्पादन जारी रखने के लिए ईंधन के किसी वैकल्पिक स्रोत की व्यवस्था करने की गुहार लगा रहे हैं।

वैश्विक गैस सप्लाई चेन हुई ठप

मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते इस संघर्ष ने वैश्विक गैस सप्लाई चेन का दम घोंट दिया है:

दुनिया भर की लगभग 20 प्रतिशत एलएनजी (LNG) आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है। युद्ध शुरू होने के बाद से यहां व्यापारिक जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है।

ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वह इस रास्ते से गुजरने वाले किसी भी जहाज को निशाना बनाएगा। इसके चलते गैस की भारी किल्लत पैदा हो गई है और कीमतों में आग लग गई है।

इसके साथ ही, अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हवाई हमलों के जवाब में ईरान ने अपने कुछ पड़ोसी देशों पर बमबारी करते हुए मध्य पूर्व में कई गैस सुविधाओं को निशाना बनाया है।

इन पड़ोसी देशों में कतर जैसे खाड़ी राष्ट्र शामिल हैं, जो दुनिया के सबसे प्रमुख गैस निर्यातकों में गिने जाते हैं। अगर यह युद्ध और लंबा चला, तो गैस आपूर्ति पर निर्भर दुनिया भर के उद्योगों को एक बहुत बड़ा और गहरा आर्थिक झटका लगेगा।

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