कोरोना महामारी की खौफनाक यादें अभी लोगों के जेहन से मिटी भी नहीं थीं कि अब एक नए वेरिएंट ने फिर से चिंताएं बढ़ा दी हैं। इन दिनों दुनिया भर में अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का असर साफ देखा जा रहा है। इसी तनाव के बीच एलपीजी गैस की आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ गए हैं और कई होटल-रेस्तरां बंद करने पड़े हैं।
इस गैस संकट की वजह से कोविड जैसे लॉकडाउन की अफवाहें भी जोर पकड़ रही हैं। ऐसे मुश्किल हालात में कोरोना के नए स्ट्रेन का सामने आना लोगों को और भी डरा रहा है।
इस नए कोरोना स्ट्रेन को वैज्ञानिकों ने BA.3.2 नाम दिया है। हालिया स्वास्थ्य निगरानी रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वायरस अमेरिका के करीब आधे राज्यों के साथ-साथ दुनिया के लगभग 22 अन्य देशों में भी फैल चुका है। इस वेरिएंट में बहुत ज्यादा म्यूटेशन देखे गए हैं, जिसने वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
आम बोलचाल में इस नए स्ट्रेन को ‘सिकाडा’ (Cicada) कहा जा रहा है। यह नाम एक ऐसे कीड़े से लिया गया है जो लंबे समय तक जमीन के नीचे रहने के बाद बाहर निकलता है। हालांकि टीकाकरण से कोविड काफी हद तक नियंत्रण में था, लेकिन अब इस वायरस के फिर से सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। सिकाडा वेरिएंट की पहचान सबसे पहले नवंबर 2024 में दक्षिण अफ्रीका में हुई थी।
इसके बाद यह लंबे समय तक छिपा रहा, लेकिन अब 2026 की शुरुआत में इसके मामले अचानक फिर से बढ़ने लगे हैं। इसी वजह से विशेषज्ञों ने इसे यह खास नाम दिया है।
शुरुआती जांच में पता चला है कि सिकाडा वेरिएंट में लगभग 75 म्यूटेशन मौजूद हैं। यह संख्या जेएन.1 (JN.1) जैसे पुराने वेरिएंट्स की क्षमता की तुलना में दोगुनी है। इनमें से ज्यादातर बदलाव वायरस के स्पाइक प्रोटीन में हुए हैं। यही वह हिस्सा है जिसके जरिए वायरस इंसानी कोशिकाओं में प्रवेश करता है और जिसे वैक्सीन या पुरानी बीमारियों से बनी एंटीबॉडीज अपना मुख्य निशाना बनाती हैं।
म्यूटेशन की इतनी बड़ी संख्या के कारण यह नया सिकाडा वेरिएंट टीकों या पुराने संक्रमणों से मिली इम्युनिटी को चकमा देने में ज्यादा माहिर हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि म्यूटेट हुए वायरस के लिए स्पाइक प्रोटीन बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह इसके फैलने की रफ्तार और इम्युनिटी के असर को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है।
प्रयोगशालाओं में हुए अध्ययनों से पता चलता है कि BA.3.2 में इम्युनिटी से बचने की क्षमता बहुत ज्यादा है। इसका सीधा मतलब यह है कि जिन लोगों ने वैक्सीन लगवाई है या जो पहले कोरोना संक्रमित हो चुके हैं, उनके शरीर में मौजूद एंटीबॉडीज इस नए वेरिएंट को बेअसर करने में पहले की तुलना में कम प्रभावी साबित हो रही हैं।
हालांकि, वैज्ञानिक अभी भी इसके पूरे प्रभाव को समझने के लिए रियल-टाइम डेटा का इंतजार कर रहे हैं।
BA.3.2 वंशावली सीधे तौर पर ओमिक्रॉन (Omicron) परिवार के BA.3 से जुड़ी है। गौरतलब है कि 2021 के अंत से 2022 की शुरुआत तक आई ओमिक्रॉन लहर के शुरुआती चरण के दौरान BA.1 और BA.2 के साथ BA.3 वेरिएंट भी मौजूद था। यह नया वंश पहली बार नवंबर 2024 में दक्षिण अफ्रीका से लिए गए एक श्वसन नमूने में पाया गया था।
महीनों तक जीनोमिक डेटाबेस में इस वंशावली के कुछ ही मामले दर्ज हुए। लेकिन 2025 के दौरान और 2026 की शुरुआत में यह कई क्षेत्रों की निगरानी प्रणालियों में लगातार दिखाई देने लगा।
अमेरिका के स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग का मानना है कि इन आंकड़ों से पता चलता है कि रूटीन जीनोमिक निगरानी पूरी होने से पहले ही यह वायरस संभवत: निचले स्तर पर फैल रहा था।
अमेरिका में BA.3.2 का पहला मामला 27 जून 2025 को सामने आया था। यह मामला सैन फ्रांसिस्को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नीदरलैंड से आए एक यात्री के श्वसन नमूने में पकड़ा गया था। इसके बाद सीवेज वाटर मॉनिटरिंग और एयरपोर्ट ट्रैवलर स्क्रीनिंग जैसे सिस्टम के जरिए इसके अन्य मामले भी सामने आए।
दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच, अमेरिका में इस वेरिएंट से संक्रमित पहले तीन मरीजों की पुष्टि हुई। राहत की बात यह है कि ये सभी मरीज पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं।
अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि फिलहाल ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जो साबित करे कि BA.3.2 पुराने वेरिएंट्स की तुलना में अधिक गंभीर बीमारी पैदा करता है।
अगर इस नए वेरिएंट के लक्षणों की बात करें तो इसमें बुखार या ठंड लगना, लगातार खांसी आना और भारी थकान होना शामिल है। इसके अलावा मरीजों में सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, नाक बहना या बंद होना, स्वाद या गंध का चला जाना, मतली, उल्टी, डायरिया और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं भी देखी जा रही हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक, इस नए स्ट्रेन से संक्रमित होने पर सबसे आम लक्षण के रूप में बहुत तेज गले में दर्द (गंभीर खराश) की शिकायत सामने आ रही है।
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