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न्यूयार्क: पहले मुस्लिम मेयर जोहरान ममदानी ने भारतीय ‘नॉन-वायलेंट’ की टाई पहनकर रचा इतिहास

| Updated: January 3, 2026 14:19

दिल्ली के डिजाइनर कार्तिक कुमरा और असम के 'एरी सिल्क' का कमाल, मैनहट्टन में दिखा भारतीय कारीगरी और नैतिक फैशन का दम

न्यूयार्क: 1 जनवरी का दिन न्यूयार्क सिटी के लिए ऐतिहासिक रहा, जब जोहरान ममदानी ने शहर के पहले मुस्लिम मेयर के रूप में शपथ ग्रहण की। इस भव्य समारोह में न केवल उनका पद चर्चा का विषय बना, बल्कि उनके पहनावे ने भी एक सशक्त संदेश दिया। ममदानी ने इस खास मौके के लिए किसी बड़े पश्चिमी लग्जरी ब्रांड को न चुनकर, भारत की सांस्कृतिक विरासत और नैतिक फैशन (Ethical Fashion) को प्राथमिकता दी।

उन्होंने शपथ ग्रहण के दौरान दिल्ली के एक डिजाइनर द्वारा तैयार की गई सुनहरी कढ़ाई वाली एक कस्टम टाई पहनी थी। यह टाई असम के प्रसिद्ध एरी सिल्क (Eri Silk) से बनी थी, जिसे दुनिया भर में ‘अहिंसा सिल्क’ के नाम से जाना जाता है।

दिल्ली के डिजाइनर का ‘एंटी-फैक्ट्री’ विजन

इस नायाब टाई को दिल्ली स्थित लेबल ‘कार्तिक रिसर्च’ के विजनरी डिजाइनर कार्तिक कुमरा ने डिजाइन किया है। साल 2021 में अपने ब्रांड की स्थापना करने वाले कुमरा को उनकी ‘एंटी-फैक्ट्री’ (फैक्ट्री विरोधी) विचारधारा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

उनका लक्ष्य लग्जरी फैशन में मशीनों के बजाय मानवीय स्पर्श को वापस लाना है। कुमरा पूरे भारत में कारीगरों के साथ सीधे सहयोग करते हैं, जिससे एरी सिल्क की हथकरघा बुनाई जैसी पारंपरिक तकनीकों को आधुनिक मेंसवियर (Menswear) के रूप में दुनिया के सबसे प्रभावशाली मंचों पर जगह मिल रही है।

मेयर ममदानी को अपनी डिजाइन पहनाकर कुमरा ने भारतीय कारीगरी को नैतिक विलासिता (Ethical Luxury) के नए मानक के रूप में स्थापित कर दिया है। उनका मानना है कि हाथ से बने कपड़ों की “खूबसूरत खामियां” ही उन्हें आज के मशीनी दौर की एक जैसी दिखने वाली फैशन की भीड़ से अलग बनाती हैं। उन्होंने साबित कर दिया है कि टिकाऊ ‘अहिंसा’ सिल्क भी पेरिस या मिलान के बुटीक में मिलने वाले किसी भी पारंपरिक रेशम जितना ही शानदार और सोफेस्टिकेटेड हो सकता है।

क्या है ‘अहिंसा सिल्क’ और यह क्यों खास है?

एरी सिल्क का चुनाव अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी उत्पादन प्रक्रिया पूरी तरह से ‘नॉन-वायलेंट’ यानी अहिंसक है। सामान्य रेशम के उत्पादन में कोकून को उबाला जाता है, जिससे अंदर मौजूद लार्वा मर जाता है। इसके विपरीत, एरी सिल्क में रेशम निकालने से पहले रेशमकीट को अपना कायापलट पूरा करके पतंगे (Moth) के रूप में उड़ने दिया जाता है।

यही कारण है कि यह कपड़ा न केवल नैतिक मूल्यों पर खरा उतरता है, बल्कि यह बेहद टिकाऊ और हाइपोएलर्जेनिक भी है। इसकी एक दुर्लभ खासियत इसका थर्मल गुण है—यह पहनने वाले को सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडा रखता है।

अयोध्या से मैनहट्टन तक पहुंचा रेशम का सफर

मेयर का यह फैसला मैनहट्टन की गगनचुंबी इमारतों और पूर्वोत्तर भारत के बुनकर समूहों के बीच की दूरी को मिटाने जैसा है। गौरतलब है कि एरी सिल्क को साल 2024 में ‘ओको-टेक्स’ (Oeko-Tex) सर्टिफिकेशन मिला था और हाल ही में अयोध्या के राम मंदिर में औपचारिक पोशाकों के लिए भी इसका उपयोग किया गया था।

अब, जोहरान ममदानी के शपथ ग्रहण समारोह ने इस ‘अहिंसा’ वस्त्र को एक बड़ा वैश्विक मंच प्रदान किया है।

हर उपयोग के साथ और भी मुलायम होने वाले इस कपड़े को पहनकर और रेशमकीट के जीवन का सम्मान करते हुए, मेयर ममदानी ने एक नए युग का संकेत दिया है, जहाँ राजनीतिक नेतृत्व और पर्यावरण के प्रति जागरूकता साथ-साथ चल सकते हैं।

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