नई दिल्ली: अगर आप भी ऑनलाइन शॉपिंग के शौकीन हैं और अक्सर सामान ऑर्डर करते या लौटाते (return) रहते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। साइबर ठगों ने अब लोगों को लूटने का एक नया तरीका खोज निकाला है— और वह है ‘रिफंड स्कैम’।
साइबर अपराध अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जालसाज फर्जी कस्टमर केयर एजेंट बनकर ऑनलाइन शॉपर्स को निशाना बना रहे हैं। रिफंड में मदद करने के बहाने वे लोगों की मेहनत की कमाई और बैंकिंग डिटेल्स चुरा रहे हैं।
क्या है यह रिफंड का खेल?
ऑनलाइन शॉपिंग में रिफंड मिलना एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन अब ठग इसी रूटीन प्रोसेस का इस्तेमाल अपना जाल बिछाने के लिए कर रहे हैं। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के तहत आने वाले साइबर सुरक्षा जागरूकता प्लेटफॉर्म ‘CyberDost I4C’ ने इस बढ़ते खतरे को लेकर यूज़र्स को आगाह किया है।
ठग फर्जी कस्टमर केयर नंबर फैलाते हैं और जैसे ही कोई ग्राहक मदद के लिए संपर्क करता है, वे उसे बातों में उलझाकर ठगी का शिकार बना लेते हैं।
कैसे काम करता है यह रिफंड स्कैम?
इस ठगी की शुरुआत अक्सर तब होती है जब किसी ग्राहक का रिफंड अटक जाता है या उसे पेमेंट से जुड़ी कोई दिक्कत आती है।
- गूगल सर्च की गलती: ग्राहक मदद के लिए गूगल या सोशल मीडिया पर उस कंपनी का कस्टमर केयर नंबर खोजता है।
- फर्जी नंबर का जाल: आधिकारिक हेल्पलाइन की जगह, यूजर का सामना ठगों द्वारा प्रमोट किए गए फर्जी नंबरों या विज्ञापनों से होता है।
- असली एजेंट होने का नाटक: जैसे ही आप कॉल करते हैं, सामने वाला व्यक्ति कंपनी का प्रतिनिधि बनकर बात करता है। वह भरोसा दिलाता है कि आपका रिफंड अटक गया है और उसे ‘प्रोसेस’ करने के लिए वेरिफिकेशन की जरूरत है।
इसके बाद, ठग आपसे निम्नलिखित चीजें मांग सकते हैं:
- OTP शेयर करना या बैंक डिटेल्स बताना।
- रिमोट एक्सेस ऐप (जिससे वे आपके फोन का कंट्रोल ले सकें) इंस्टॉल करवाना।
- वेरिफिकेशन के नाम पर छोटा सा ट्रांजेक्शन करवाना।
- QR कोड स्कैन करवाना।
जैसे ही आप इनमें से कोई भी कदम उठाते हैं, रिफंड आने के बजाय आपके खाते से मिनटों में पैसे गायब हो जाते हैं। कई मामलों में तो ठग भरोसा जीतने के लिए फर्जी रिफंड डैशबोर्ड भी दिखाते हैं।
क्यों तेजी से फैल रहा है यह स्कैम?
इस तरह की धोखाधड़ी के बढ़ने के पीछे कई कारण हैं:
- ऑनलाइन शॉपिंग और रिटर्न की बढ़ती संख्या।
- देरी होने पर ग्राहकों में घबराहट और चिंता।
- फर्जी हेल्पलाइन पेज बनाना बेहद आसान होना।
- लोगों का गूगल सर्च के नतीजों पर आंख मूंदकर भरोसा करना।
ठग हमेशा आपकी ‘जल्दबाजी’ का फायदा उठाते हैं। जब कोई अपने पैसे फंसने को लेकर परेशान होता है, तो वह बिना जांच-पड़ताल किए निर्देशों का पालन कर लेता है।
खतरे की घंटी: इन संकेतों को पहचानें
रिफंड स्कैम को पहचानने के लिए कुछ ‘रेड फ्लैग्स’ (Red Flags) यानी चेतावनी संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है:
- अगर कस्टमर केयर नंबर आधिकारिक ऐप या वेबसाइट के बाहर (जैसे गूगल सर्च या सोशल मीडिया) से मिला हो।
- अगर कोई रिफंड के लिए OTP या UPI पिन मांगे।
- बातचीत के दौरान तुरंत कार्रवाई करने का दबाव बनाया जाए।
- स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करने को कहा जाए।
- रिफंड के लिए पैसे ‘भेजने’ या ‘स्कैन’ करने को कहा जाए। (याद रखें: रिफंड हमेशा ‘रिवर्स’ होता है, उसके लिए पेमेंट नहीं करना पड़ता)।
ऑनलाइन रिफंड फ्रॉड से कैसे बचें?
अपनी गाढ़ी कमाई सुरक्षित रखने के लिए इन सुरक्षा मंत्रों का पालन करें:
- सही जरिया चुनें: मदद के लिए हमेशा शॉपिंग ऐप या आधिकारिक वेबसाइट के ‘Help’ या ‘Support’ सेक्शन का ही इस्तेमाल करें।
- गूगल पर भरोसा न करें: सर्च इंजन पर मिले रैंडम नंबरों पर कभी कॉल न करें।
- गोपनीयता बनाए रखें: अपना OTP, पिन या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
- लिंक और QR कोड से बचें: किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही पैसा प्राप्त करने के लिए कोई QR कोड स्कैन करें।
- ऐप्स से सावधान: फोन करने वाले के कहने पर कोई भी ऐप (जैसे AnyDesk या TeamViewer) इंस्टॉल न करें।
- धैर्य रखें: अगर रिफंड में देरी हो रही है, तो आधिकारिक अपडेट का इंतजार करें।
अगर आप ठगी के शिकार हो जाएं तो क्या करें?
अगर आपको लगता है कि आपके साथ धोखा हुआ है, तो बिना वक्त गंवाए ये कदम उठाएं:
- तुरंत अपने बैंक कार्ड या UPI को ब्लॉक करें।
- अपने बैंक को इस घटना की सूचना दें।
- भारत की साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
- साइबर क्राइम पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
त्वरित कार्रवाई से आपके पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है। हमेशा याद रखें, ऑनलाइन शॉपिंग का रिफंड अपने आप उसी माध्यम से वापस आता है जिससे पेमेंट किया गया था। ‘वेरिफिकेशन पेमेंट’ की मांग करने वाली कोई भी कॉल सौ फीसदी स्कैम है।
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