नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने सीज़फायर (युद्धविराम) के लिए गुहार लगाई, लेकिन दुनिया के किसी भी नेता ने भारत को ऑपरेशन रोकने को नहीं कहा।
प्रधानमंत्री ने दावा किया कि भारत को विश्व समुदाय का व्यापक समर्थन मिला और केवल तीन देशों ने पाकिस्तान का साथ दिया।
“हमने पहले दिन से कहा था कि हमारी कार्रवाई गैर-उत्तेजक है। किसी भी वैश्विक नेता ने हमें ऑपरेशन सिंदूर रोकने को नहीं कहा,” प्रधानमंत्री ने लोकसभा में कहा।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति का फोन, लेकिन भारत ने दिया ठोस जवाब: मोदी
पीएम मोदी ने बताया कि 9 मई की रात अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने कई बार उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वह सेना अधिकारियों के साथ बैठक में व्यस्त थे।
पीएम ने कहा, “उन्होंने लगभग एक घंटे तक कॉल करने की कोशिश की, लेकिन मैं सेना के साथ मीटिंग में था। बाद में मैंने उन्हें कॉल बैक किया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान एक बड़ा हमला करने की योजना बना रहा है।”
“मैंने स्पष्ट रूप से कहा — ‘हम गोली का जवाब गोले से देंगे’। 10 मई को हमने पाकिस्तान की सैन्य क्षमता को नष्ट कर दिया। अब पाकिस्तान समझ गया है कि भारत का हर जवाब पहले से बड़ा होता है।”
22 मिनट में लिया पुलवामा का बदला: ऑपरेशन सिंदूर
प्रधानमंत्री ने कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को मालूम था कि भारत करारा जवाब देगा।
उन्होंने कहा, “पाकिस्तान हमें परमाणु हमले की धमकी दे रहा था। लेकिन हमने 6-7 मई की रात को अपने तरीके से ऑपरेशन को अंजाम दिया। केवल 22 मिनट में हमने 22 अप्रैल के हमले का बदला ले लिया।”
उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के मिलिट्री ऑपरेशंस के महानिदेशक (DGMO) ने भारत से युद्ध रोकने की गुहार लगाई।
पीएम मोदी ने बताया, “पाकिस्तान ने कहा, ‘बहुत मारा, अब ज्यादा मार झेलने की ताकत नहीं है’। उन्होंने हमसे हमला रोकने की अपील की।”
कांग्रेस पर हमला, विदेश नीति पर सफाई
प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी पार्टी ने भारत के रुख को कमजोर दिखाने की कोशिश की।
उन्होंने कहा, “दुनिया के 193 में से सिर्फ 3 देश पाकिस्तान के साथ खड़े थे। बाकी सभी ने भारत का समर्थन किया। लेकिन कांग्रेस ने हमारी नीयत पर सवाल उठाए।”
उन्होंने कांग्रेस की पिछली सरकारों पर भी हमला बोला और कहा कि POK और अक्साई चिन उन्हीं के समय खोया गया।
“जो आज हमसे पूछते हैं कि POK क्यों नहीं लेते, मैं पूछता हूं – उसे खोया किसके राज में गया? अक्साई चिन को भी उन्होंने ‘बंजर ज़मीन’ कहकर छोड़ दिया।”

कांग्रेस का पलटवार: ट्रंप के दावे पर मोदी चुप क्यों?
इससे पहले, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर सवाल उठाया जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने भारत-पाक युद्ध रोकवाया।
खड़गे ने कहा, “युद्धविराम की घोषणा भारत के प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री या रक्षा मंत्री ने नहीं की। यह घोषणा वॉशिंगटन से ट्रंप ने की।”
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को संसद में ट्रंप को “झूठा” कहने की चुनौती दी।
“डोनाल्ड ट्रंप ने 29 बार कहा कि उन्होंने युद्ध रुकवाया। अगर प्रधानमंत्री में इंदिरा गांधी की 50% भी हिम्मत है, तो संसद में खड़े होकर कहें — ‘ट्रंप झूठ बोल रहे हैं’।”
राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने सिर्फ 30 मिनट में पाकिस्तान को युद्ध न लड़ने का संदेश भेज दिया था और भारत की वायु सेना को पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने से रोका गया।
राहुल गांधी का आरोप: ‘हमने हमला किया, लेकिन पायलटों के हाथ बांध दिए’
राहुल गांधी ने इंडोनेशिया में भारतीय रक्षा अटैची कैप्टन शिव कुमार का हवाला देते हुए कहा कि भारत को नुकसान इसलिए हुआ क्योंकि सरकार ने सेना को पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों को नहीं निशाना बनाने का आदेश दिया था।
उन्होंने कहा, “हमने हमला किया, लेकिन पायलटों के हाथ बांध दिए।”
उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के वक्तव्य को उद्धृत करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर रात 1:05 बजे शुरू हुआ और 1:35 पर ही भारत ने पाकिस्तान को बता दिया कि हम युद्ध नहीं चाहते।
उन्होंने कहा, “आपने DGMO से कहा कि पाकिस्तान को बताएं कि भारत अब आगे नहीं बढ़ेगा। ये बताता है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी थी।”
मोदी ने भारत की नई नीति स्पष्ट की
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण के अंत में भारत की नई आतंकवाद विरोधी नीति के तीन प्रमुख बिंदु गिनाए:
“ऑपरेशन सिंदूर से तीन बातें स्पष्ट हो गई हैं:
- भारत पर आतंकी हमला होगा तो जवाब हमारे तरीके, समय और शर्तों पर मिलेगा।
- परमाणु ब्लैकमेल अब काम नहीं आएगा।
- हम आतंकवाद का समर्थन करने वाली सरकारों और आतंकियों को अब अलग नहीं मानेंगे।”
राजनीतिक टकराव तेज, विपक्ष के सवाल जारी
जहां एक ओर सरकार ऑपरेशन सिंदूर को भारत की सैन्य शक्ति और कूटनीतिक सफलता के तौर पर पेश कर रही है, वहीं विपक्ष ने युद्धविराम, अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर सवाल उठाए हैं।
अब देखना यह है कि संसद के आगामी सत्रों में यह बहस राष्ट्रीय सुरक्षा पर आम सहमति की ओर बढ़ेगी या राजनीतिक ध्रुवीकरण को और तेज करेगी।
यह भी पढ़ें- गिर के शेरों की मशहूर जोड़ी ‘जय-वीरू’ नहीं रही, वन विभाग की तमाम कोशिशें नाकाम











