अमेरिकी आईटी दिग्गज ओरेकल (Oracle) में एक बड़े पैमाने पर छंटनी की खबर सामने आई है। प्रभावित कर्मचारियों ने मंगलवार, 31 मार्च 2026 को बताया कि कंपनी ने भारत में अपने लगभग 12,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। इसके साथ ही अगले एक महीने के भीतर छंटनी का एक और दौर आने की आशंका जताई जा रही है।
इस छंटनी का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो ओरेकल ने दुनिया भर में अपने लगभग 30,000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया है। भारत में कंपनी की कुल वर्कफोर्स करीब 30,000 थी, जिसमें अब निकाले गए ये कर्मचारी भी शामिल हैं।
इस फैसले से प्रभावित हुए दो लोगों ने स्थिति की गंभीरता को साझा किया। इनमें से एक कंपनी के मानव संसाधन (HR) विभाग का हिस्सा थे। उन्होंने बताया कि भारत में बड़े पैमाने पर लोगों को निकाला गया है और प्रबंधन जल्द ही एक और बड़ी छंटनी की योजना बना रहा है।
इस पूरे मामले पर ओरेकल ने फिलहाल कोई भी आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, कर्मचारियों को भेजे गए एक आंतरिक ईमेल में कंपनी ने इस कदम के पीछे के कारणों को स्पष्ट करने की कोशिश की है।
ईमेल में प्रबंधन ने कहा है कि कंपनी में कुछ संगठनात्मक बदलाव किए जा रहे हैं। इन बदलावों के कारण कामकाज को सुव्यवस्थित करने का निर्णय लिया गया है। कंपनी ने खेद जताते हुए कहा कि इसके परिणामस्वरूप कर्मचारियों के वर्तमान पद अब अनावश्यक हो गए हैं।
निकाले गए कर्मचारियों को राहत देने के लिए कंपनी की तरफ से एक मुआवजा पैकेज (सेवरेंस पैकेज) दिया जा रहा है। भारत में एक साल की सेवा पूरी करने वाले प्रत्येक कर्मचारी को 15 दिनों का वेतन दिया जाएगा।
इसके अलावा टर्मिनेशन की तारीख तक एक महीने का अवैतनिक वेतन, लीव एनकैशमेंट, योग्यता के आधार पर ग्रेच्युटी और एक महीने के नोटिस पीरियड का वेतन भी इस पैकेज में शामिल है। ओरेकल ने अतिरिक्त राहत के तौर पर कर्मचारियों को दो महीने के वेतन (टॉप-अप) की भी पेशकश की है।
हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि यह सेवरेंस पैकेज केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जो स्वेच्छा से और शांतिपूर्ण तरीके से कंपनी से इस्तीफा देंगे।
इस बीच, कंपनी के काम करने के तरीके को लेकर भी कुछ गंभीर बातें सामने आई हैं। ओरेकल के एक पूर्व कर्मचारी मेरुगु श्रीधर ने बताया कि उन्हें पिछले साल सितंबर में ही नौकरी से निकाल दिया गया था। उन्होंने भारत में कंपनी की 16 घंटे की लंबी वर्किंग शिफ्ट का कड़ा विरोध किया था।
श्रीधर ने आगे बताया कि उन्होंने अपने दोस्तों और मानव संसाधन विभाग के जानकारों से इस छंटनी को लेकर चर्चा की थी। बातचीत में यह बात सामने आई कि अमेरिका में ओरेकल के साथ काम करने वाले अधिकांश भारतीय इस फैसले से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसका मुख्य कारण अमेरिका के सख्त स्थानीय कानून हैं, जो वहां के नागरिकों की छंटनी को काफी मुश्किल बनाते हैं।
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