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पीएम मोदी 31 मार्च को करेंगे कोबा में ‘सम्राट सम्प्रति म्यूजियम’ का उद्घाटन

| Updated: March 28, 2026 13:46

2 लाख किमी की पदयात्रा से जुटाई गई दुर्लभ जैन कलाकृतियों और पांडुलिपियों का होगा दर्शन; टोरेंट ग्रुप के सहयोग से हुआ भव्य निर्माण

अहमदाबाद के कोबा में आगामी 31 मार्च को महावीर जयंती (जन्म कल्याणक) के शुभ अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन होने जा रहा है। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘सम्राट सम्प्रति म्यूजियम’ का उद्घाटन करेंगे। यह समारोह श्री महावीर जैन आराधना केंद्र के आचार्य पद्मसागरसूरीश्वरजी, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और केंद्र के अध्यक्ष सुधीर मेहता की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न होगा।

अधिकारियों के अनुसार, यह अनूठा संग्रहालय जैन धर्म की महान विभूति और अहिंसा के उपदेशक सम्राट सम्प्रति महाराज (224-215 ईसा पूर्व) के जीवन और उनके उच्च आदर्शों को समर्पित है। सम्राट सम्प्रति, महान मौर्य शासक सम्राट अशोक के पौत्र थे और जैन धर्म में उनका अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।

टोरेंट ग्रुप के यूएनएम फाउंडेशन (UNM Foundation) के विशेष सहयोग से निर्मित इस म्यूजियम में सदियों पुरानी दुर्लभ प्राचीन वस्तुओं, जैन कलाकृतियों और पारंपरिक धरोहरों को सहेज कर रखा गया है। इन ऐतिहासिक संग्रहों को कुल सात अलग-अलग दीर्घाओं (गैलरी) में प्रदर्शित किया गया है, जो दर्शकों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र होंगी।

इन दीर्घाओं में पत्थर और धातु की मूर्तियां, विशाल तीर्थ पट्ट, यंत्र पट्ट और लघु चित्रों का अद्भुत संग्रह मौजूद है। इसके साथ ही यहां चांदी के रथ, प्राचीन सिक्के और कई पुरानी पांडुलिपियों को भी दर्शनार्थियों के लिए रखा गया है।

अधिकारियों ने बताया कि यह भव्य संग्रहालय दरअसल आचार्य पद्मसागरसूरी जी का एक सपना था, जो अब साकार हो रहा है। उन्होंने पिछले छह दशकों के दौरान भारत और नेपाल में लगभग 2,00,000 किलोमीटर की लंबी पदयात्रा की है। इसी यात्रा के दौरान उन्होंने इन अमूल्य सांस्कृतिक धरोहरों को एकत्रित किया था।

संग्रहालय की सात दीर्घाओं में जैन धर्म और दर्शन का प्रारंभिक परिचय, तीर्थंकरों की कथाएं, और प्राचीन जैन मूर्तियां शामिल हैं। इसके अलावा यहां रक्षक देवी-देवताओं की धातु व पत्थर की मूर्तियां, यंत्र चित्र, जैन आगमों के नक्शे और मुगल काल के अहम दस्तावेज भी देखे जा सकते हैं।

इन ऐतिहासिक दस्तावेजों में सम्राट अकबर का फरमान विशेष रूप से शामिल है। वहीं, लकड़ी की नक्काशी, जैन मंदिरों के मॉडल, रजत रथ और विभिन्न शताब्दियों के प्राचीन ग्रंथों का संग्रह इस म्यूजियम की ऐतिहासिक महत्ता को और बढ़ा देता है।

श्री महावीर जैन आराधना केंद्र के अध्यक्ष सुधीर मेहता ने अपने एक बयान में कहा कि यह संग्रहालय हमारी साझा विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बनेगा। उनके मुताबिक, यह आने वाली पीढ़ियों को भारत की आध्यात्मिकता, संस्कृति और कला को गहराई से जानने के लिए प्रेरित करेगा। इस म्यूजियम का संचालन और रखरखाव यूएनएम फाउंडेशन द्वारा ही किया जाएगा।

श्री महावीर जैन आराधना केंद्र के एक अधिकारी ने बताया कि सम्राट सम्प्रति म्यूजियम भारत की प्राचीन परंपरा और आधुनिकता का एक बेहतरीन संगम है। इसमें आगंतुकों, शोधकर्ताओं और विद्वानों को एक समकालीन अनुभव देने के लिए आधुनिक ऑडियो-विजुअल तकनीक और आध्यात्मिक संगीत का बखूबी उपयोग किया गया है।

अपनी आकर्षक वास्तुकला और शानदार प्रस्तुति से परे, यह संग्रहालय लोगों को एक गहरी आध्यात्मिक यात्रा पर ले जाता है। यह समाज को अहिंसा, संयम और करुणा जैसे शाश्वत मूल्यों का एक स्पष्ट और सकारात्मक संदेश देता है।

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