नई दिल्ली: ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर किए गए मिसाइल हमलों की कड़ी निंदा करने के ठीक बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की है। इस दौरान पीएम मोदी ने मध्य पूर्व में जारी शत्रुता और संघर्ष को जल्द से जल्द खत्म करने का आग्रह किया। गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर नई दिल्ली ने अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
सोमवार (2 मार्च) सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने नेतन्याहू के साथ “मौजूदा क्षेत्रीय स्थिति” पर विस्तार से चर्चा की है। मोदी ने हालिया घटनाक्रम पर भारत की चिंताओं से अवगत कराते हुए इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों की सुरक्षा हर हाल में प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने दोनों पक्षों से जल्द से जल्द युद्ध रोकने की आवश्यकता को दोहराया है।
नेतन्याहू से इस चर्चा से कुछ समय पहले, रविवार रात पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भी फोन पर बात की थी। इस दौरान उन्होंने अमीराती क्षेत्र पर हुए ईरानी हमलों की घोर निंदा की और यूएई के प्रति भारत की मजबूत एकजुटता व्यक्त की।
हालांकि भारत ने सीधे तौर पर खामेनेई की मौत पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन तेहरान से पुष्टि होने के बावजूद, विदेश मंत्रालय ने शुरुआती हमलों के बाद एक सामान्य बयान जारी कर ‘संयम’ बरतने और ‘संवाद’ का रास्ता अपनाने की अपील की थी।
तनाव के बीच इजरायल का दौरा और हमलों की शुरुआत
ध्यान देने वाली बात यह है कि तनाव के इस भारी माहौल के बीच, पीएम मोदी ने 25 फरवरी को इजरायल का दौरा किया था। वहां उन्होंने पश्चिम एशिया में कूटनीति और शांतिपूर्ण बातचीत का आह्वान करते हुए तेल अवीव के साथ भारत के समर्थन की पुष्टि की थी।
मोदी के वहां से लौटने के दो दिन बाद ही अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर समन्वित (coordinated) हमले शुरू कर दिए, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में जवाबी हमलों का सिलसिला तेज हो गया।
यूएई के राष्ट्रपति से बातचीत में मोदी ने हमलों में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त की। भले ही पीएम ने अपने बयान में ईरान का नाम नहीं लिया, लेकिन इस तेजी से भड़कते संघर्ष में किसी भी पक्ष की ओर से यह भारत की पहली आधिकारिक निंदा थी।
उन्होंने भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यूएई नेतृत्व को धन्यवाद दिया और “तनाव कम करने, क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता” के लिए भारत के समर्थन को दोहराया।
दिलचस्प बात यह है कि यूएई के राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी किए गए कॉल के ब्यौरे (readout) में मोदी के ट्वीट की तुलना में अधिक सख्त भाषा का इस्तेमाल किया गया। यूएई के बयान के अनुसार, मोदी ने अमीरात को निशाना बनाने वाले “ईरानी हमलों को पूरी तरह खारिज” किया और देश की संप्रभुता तथा नागरिकों की सुरक्षा के लिए उठाए जाने वाले हर कदम में पूरा समर्थन जताया।
दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को बनाए रखने के लिए संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
हमलों का असर और भारत-यूएई संबंध
अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास ने पुष्टि की है कि इन हमलों में घायल हुए 58 लोगों में एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। गनीमत यह है कि वह फिलहाल खतरे से बाहर है और दूतावास उसकी पूरी मदद कर रहा है।
यूएई लगभग 3.9 मिलियन (39 लाख) भारतीयों का घर है, जो विदेशों में भारत का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है। इसके अलावा, पिछले वित्तीय वर्ष में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के पार पहुंच गया था।
घटनाक्रम पर नजर डालें तो, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों, मिसाइल साइटों और परमाणु बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हुए एक संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया था।
ईरानी रेड क्रिसेंट के अनुसार, इन हमलों में शीर्ष अधिकारियों सहित सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत हो गई। ईरान के 24 प्रांतों में 201 लोगों की जान गई और 747 लोग घायल हुए। इस दौरान तीन अमेरिकी सैनिकों की भी मौत हुई।
ईरान का पलटवार और यूएई में तबाही
इसके जवाब में ईरान ने इजरायल, अमेरिकी ठिकानों और यूएई समेत खाड़ी देशों पर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उनके हवाई सुरक्षा तंत्र ने 167 मिसाइलों और 541 ड्रोनों को मार गिराया, लेकिन 35 हथियार अमीराती जमीन पर गिरे। इससे तीन लोगों की मौत हो गई और 58 घायल हो गए।
एक ड्रोन ने अबू धाबी के अल सलाम नेवल बेस पर भी हमला किया। दुबई हवाई अड्डे के कॉन्कोर्स (concourse) में नुकसान के चलते चार कर्मचारी घायल हो गए, जिसके बाद एयरपोर्ट को खाली कराना पड़ा। बुर्ज अल अरब और पाम जुमेरा में भी आग लगने की घटनाएं सामने आईं। इसके बाद यूएई ने ईरान से अपना दूतावास बंद करते हुए राजदूत को वापस बुला लिया है और इन मिसाइल हमलों को ‘राष्ट्रीय संप्रभुता का खुला उल्लंघन’ करार दिया है।
पी.वी. सिंधु फंसी, खौफनाक अनुभव किया साझा
इस अफरातफरी के बीच भारतीय बैडमिंटन स्टार और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पी.वी. सिंधु भी यूएई में फंस गईं। वह बर्मिंघम में ऑल इंग्लैंड ओपन चैंपियनशिप के लिए दुबई के रास्ते जा रही थीं।
सिंधु ने सोशल मीडिया पर अपना डरावना अनुभव साझा करते हुए लिखा कि, “हवा में मिसाइलों को नष्ट होते देखना और इतनी तेजी से बिगड़ते हालात सच में खौफनाक हैं।”
उन्होंने बताया कि उनके कोच जहां खड़े थे, वहां से महज 100 मीटर की दूरी पर एक धमाका हुआ था, जिसने उन्हें अंदर तक हिला कर रख दिया।
असंवेदनशील टिप्पणियों पर भाजपा नेता की फटकार
इस बीच, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर यूएई को निशाना बनाकर की जा रही कुछ भारतीयों की टिप्पणियों की भाजपा के विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने कड़ी आलोचना की। एक सत्ताधारी पार्टी के सांसद सहित कुछ यूजर्स सोशल मीडिया पर तंज कस रहे थे कि मोदी के नेतृत्व में भारत सुरक्षित है और दुबई में नौकरी व टैक्स छूट के लिए जाने वालों के लिए यह एक “सबक” है।
इस पर चौथाईवाले ने विदेश मंत्री एस जयशंकर, पीएम मोदी और दोनों देशों के दूतावासों को टैग करते हुए एक्स पर लिखा, “जब किसी देश पर हमला हो रहा हो, तब भारत में कुछ लोगों द्वारा यूएई के खिलाफ की गई सस्ती टिप्पणियां बेहद निंदनीय हैं।”
उक्त रिपोर्ट मूल रूप से द वायर द्वारा प्रकाशित किया जा चुका है.
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