सोने और चांदी की कीमतों में हाल ही में देखे गए भारी उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद, पिछले हफ्ते इन कीमती धातुओं के दाम अचानक लुढ़क गए। बाजार की इस अस्थिरता को देखते हुए, आम निवेशक यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि इस समय उनके लिए निवेश का सबसे सुरक्षित और फायदेमंद विकल्प कौन सा है।
इसी उधेड़बुन के बीच, एडलवाइज म्यूचुअल फंड (Edelweiss Mutual Fund) की एमडी और सीईओ राधिका गुप्ता ने निवेशकों का मार्गदर्शन किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए उन्होंने सलाह दी है कि कहीं भी पैसा लगाने से पहले फाइनेंस और निवेश की बुनियादी बातों को समझना बेहद जरूरी है।
निवेशकों के मन में भारी कन्फ्यूजन
कीमतों में जारी उठापटक के कारण बहुत से लोग इस बात को लेकर भ्रमित हैं कि क्या उन्हें म्यूचुअल फंड से पैसा निकालकर सोने-चांदी में लगाना चाहिए। हमेशा से ही सोने को महंगाई के खिलाफ एक सुरक्षित ढाल (Hedge) माना जाता रहा है। दुनिया भर में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते पिछले कुछ महीनों में सोने के भाव आसमान छूने लगे थे।
ज्यादा से ज्यादा रिटर्न पाने की होड़ में, कई निवेशक सलाह के लिए रेडिट (Reddit) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भी रुख कर रहे हैं। सोने में निवेश को लेकर चर्चा नई नहीं है, लेकिन ऑनलाइन मिलने वाली अलग-अलग तरह की राय अक्सर लोगों को और ज्यादा कंफ्यूज कर देती है।
राधिका गुप्ता की निवेशकों को नसीहत
अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में राधिका गुप्ता ने बताया कि उनसे कई लोगों ने संपर्क किया और अपने पोर्टफोलियो को लेकर सलाह मांगी। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए लिखा, “मेरे पास निवेश करने के लिए 30,000 रुपये हैं, क्या मुझे चांदी खरीदनी चाहिए? मुझे कौन सा फंड खरीदना चाहिए?”
राधिका गुप्ता ने स्पष्ट किया कि न तो वह और न ही कोई और व्यक्ति किसी को इसका ‘क्विक फिक्स’ या तुरंत समाधान दे सकता है, क्योंकि निवेश की सलाह देने के लिए समय और संदर्भ (Context) को समझना जरूरी होता है। उन्होंने लोगों को पहले निवेश के मूल सिद्धांतों को सीखने की सलाह दी।
निवेश से पहले इन 4 बातों का रखें ध्यान
राधिका गुप्ता ने निवेशकों को एक व्यावहारिक तरीका बताया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले अपनी आर्थिक स्थिति और जरूरतों को एक जगह नोट करें। इसमें इन चार चीजों को शामिल करना चाहिए:
- आय और खर्च: आपकी कमाई कितनी है और खर्चे क्या हैं।
- मौजूदा निवेश और देनदारियां: आपके पास पहले से क्या निवेश है और आप पर कोई कर्ज या उधारी तो नहीं है।
- लक्ष्य और समय सीमा: आप किस उद्देश्य के लिए पैसा जोड़ रहे हैं और आपको कब इसकी जरूरत पड़ेगी।
- जोखिम पर विचार: आप कितना जोखिम उठा सकते हैं और पैसा खोने पर आपकी प्रतिक्रिया क्या होगी।
जल्दबाजी से बचें निवेशक
उन्होंने आगे समझाया, “जल्दबाजी में कोई बड़ा वित्तीय ढांचा खड़ा करने की कोशिश न करें। आपको सीधे स्टॉक पोर्टफोलियो बनाने की जरूरत नहीं है, और न ही अभी यह तय करने की जरूरत है कि चांदी खरीदें या कोई पीएमएस (PMS) खोजें। ये सब चीजें तब की जा सकती हैं जब आप एक बार अपने पैरों पर खड़े हो जाएं (यानी, जब आपकी समझ पक्की हो जाए)।”
अंत में, उन्होंने अपने फॉलोअर्स को सलाह दी कि वे अपना यह ‘पर्सनल इन्वेस्टमेंट स्टेटमेंट’ लेकर किसी पेशेवर (Professional) सलाहकार के पास जाएं और एक ठोस योजना बनवाएं। राधिका गुप्ता का कहना है कि लोगों को शांत रहना चाहिए, चिंतन करना चाहिए और आगे बढ़ने के लिए अपनी पुरानी वित्तीय गलतियों से सीखना चाहिए।
राधिका गुप्ता की यह सलाह इस बात पर जोर देती है कि अगर कुछ आसान नियमों का पालन किया जाए, तो निवेश की योजना बनाना काफी सरल और लाभदायक हो सकता है। सबसे बड़ी कुंजी यह है कि बाजार को समझा जाए और किसी भी नए ट्रेंड या प्लान के पीछे भागने के बजाय, धैर्य और समझदारी के साथ आगे बढ़ा जाए।
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