नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने सोमवार को एक ऐसा रूप दिखाया, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अक्सर संसद में तीखे सवालों और बहसों के लिए पहचाने जाने वाले राघव चड्ढा, क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ‘ब्लिंकिट’ (Blinkit) की पीली वर्दी पहने नजर आए।
उन्होंने न केवल वर्दी पहनी, बल्कि एक डिलीवरी एजेंट के साथ बाइक पर पीछे बैठकर शहर भर में ऑर्डर भी डिलीवर किए।
सांसद का यह कदम गिग इकॉनमी (Gig Economy) और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े लाखों कर्मचारियों की समस्याओं को समझने और उनके बेहतर कामकाजी हालात की वकालत करने के उद्देश्य से उठाया गया था।
बंद कमरों से निकलकर सड़क पर उतरे सांसद
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर अपने इस अनुभव का वीडियो साझा किया है। वीडियो में उन्हें हेलमेट लगाकर डिलीवरी पार्टनर की बाइक पर पीछे बैठे हुए और ग्राहकों के घर तक सामान पहुँचाते हुए देखा जा सकता है। उन्होंने एक आम डिलीवरी एजेंट की तरह ही पूरी शिफ्ट के दौरान काम किया।
वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, “बोर्डरूम (बंद कमरों) से दूर, जमीनी स्तर पर। मैंने उनका एक दिन जिया।”
चड्ढा की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब गिग वर्कर अपनी मांगों को लेकर मुखर हो रहे हैं। इन मांगों में 10-मिनट की डिलीवरी जैसे बेहद दबाव वाले मॉडल को खत्म करना और सुरक्षा व वेतन से जुड़े सुधार शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि इतने कम समय में डिलीवरी का दबाव उनकी जान को जोखिम में डालता है।
गिग वर्कर्स के हक की लड़ाई
पिछले कुछ महीनों से ‘आप’ सांसद गिग वर्कर्स की स्थितियों को लेकर काफी सक्रिय रहे हैं। इससे पहले, उन्होंने एक डिलीवरी एजेंट को अपने घर लंच पर बुलाया था और उनकी समस्याओं को गहराई से समझने के लिए इंटरव्यू भी लिया था। उस दौरान वेतन, सुरक्षा और नौकरी की अनिश्चितता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
इस महीने की शुरुआत में, चड्ढा ने क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी कंपनियों के बिजनेस मॉडल पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि अगर कंपनियों को अपना काम चलाने के लिए पुलिस की मदद लेनी पड़ रही है, तो यह इस बात का सबूत है कि उनका सिस्टम सही नहीं है।
दीपिंदर गोयल के बयान पर पलटवार
राघव चड्ढा का यह कदम जोमैटो और ब्लिंकिट के फाउंडर दीपिंदर गोयल के हालिया बयानों के बाद आया है। दरअसल, हाल ही में डिलीवरी वर्कर्स ने हड़ताल की थी, जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए गोयल ने हड़ताल करने वाले कर्मचारियों को ‘उपद्रवी’ (miscreants) करार दिया था। उन्होंने तर्क दिया था कि डिलीवरी प्लेटफॉर्म ने बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा किए हैं।
गोयल के इस बयान पर राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
उन्होंने लिखा था, “भारत भर में डिलीवरी पार्टनर्स सम्मान, उचित वेतन, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर हड़ताल पर गए थे। लेकिन प्लेटफॉर्म का जवाब उन्हें ‘उपद्रवी’ कहना था और मजदूरों की जायज मांग को कानून-व्यवस्था का मुद्दा बना दिया गया। यह न केवल अपमानजनक है, बल्कि खतरनाक भी है।”
उन्होंने जोर देकर कहा, “उचित वेतन मांगने वाले कर्मचारी अपराधी नहीं हैं।”
संसद से सड़क तक संघर्ष का वादा
हड़ताल के सीमित असर के बाद, दीपिंदर गोयल ने ‘X’ पर दावा किया था कि नए साल की पूर्व संध्या (New Year’s Eve) पर जोमैटो और ब्लिंकिट ने रिकॉर्ड डिलीवरी की और हड़ताल के आह्वानों का उन पर कोई असर नहीं पड़ा। गोयल ने लिखा था कि स्थानीय पुलिस के सहयोग से ‘मुट्ठी भर उपद्रवियों’ को काबू में रखा गया।
इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने संसद के शीतकालीन सत्र में भी गिग वर्कर्स का मुद्दा उठाया था और वे इसे आगे भी जारी रखेंगे।
उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा, “यह एक ऐसी लड़ाई है जिसे मैं अंजाम तक पहुँचाऊंगा। संसद के अंदर भी और संसद के बाहर भी। जब तक जवाबदेही तय नहीं हो जाती। जिन कामगारों ने एक-एक ऑर्डर और एक-एक किलोमीटर तय करके इन प्लेटफॉर्म्स को खड़ा किया है, वे इंसान के तौर पर सम्मान पाने के हकदार हैं, न कि ‘उपद्रवी’ कहलाने के।”
यह भी पढ़ें-










