अहमदाबाद: गुजरात के राजकोट जिले में शुक्रवार की सुबह लोगों के लिए बेहद डरावनी साबित हुई। सुबह-सुबह आए भूकंप के लगातार झटकों ने पूरे जिले में दहशत का माहौल बना दिया। जेतपुर, धोराजी, उपलेटा और आसपास के इलाकों में एक के बाद एक कई झटके महसूस किए गए, जिससे लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए और एहतियात के तौर पर स्थानीय प्रशासन ने धोराजी और जेतपुर सहित कई इलाकों के स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है।
सुबह से लगातार हिलती रही धरती
इंस्टिट्यूट ऑफ सिस्मोलॉजिकल रिसर्च (ISR) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, राजकोट में अल सुबह से लेकर दोपहर तक कुल 11 बार भूकंप के झटके दर्ज किए गए। इन झटकों का सिलसिला सुबह 6 बजे से शुरू होकर दोपहर 12 बजे तक चला। इसमें सबसे शक्तिशाली झटका सुबह 6:19 बजे महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.8 मापी गई।
पहले बड़े झटके के बाद करीब एक घंटे तक छोटे-छोटे झटके (आफ्टरशॉक्स) आते रहे, और यह क्रम 9 जनवरी को दोपहर 11:45 बजे तक जारी रहा। वैज्ञानिकों के अनुसार, भूकंप का केंद्र उपलेटा से लगभग 27 से 30 किलोमीटर दूर पूर्व-उत्तरपूर्व (East-Northeast) दिशा में था। इसकी गहराई जमीन के नीचे 6.1 से 13.6 किलोमीटर के बीच आंकी गई है।

इससे पहले गुरुवार की रात भी 8:43 बजे 3.3 तीव्रता का भूकंप आया था। राहत की बात यह है कि इन घटनाओं में अभी तक किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि वे स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
साल 2000 की यादें हुईं ताज़ा: जब भावनगर में भी हुआ था ऐसा ही मंजर
राजकोट में मची यह खलबली बरबस ही साल 2000 की उस घटना की याद दिलाती है, जब भावनगर में भी धरती की कंपन ने लोगों की नींद हराम कर दी थी। उस समय एक रविवार का दिन वहां के निवासियों के लिए बेहद बेचैनी भरा रहा था।
साल 2000 की उस घटना में, भावनगर में सुबह 5 बजे से शाम 7 बजे के बीच कुल 6 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। पहला झटका सुबह 5:05 बजे, दूसरा 7 बजे, तीसरा 9:50 बजे, चौथा 10:20 बजे, पांचवां 11:45 बजे और आखिरी झटका शाम को 7 बजे आया था। उस समय हालात का जायजा लेने के लिए दिल्ली से सीस्मोलॉजिस्ट (भूकंप वैज्ञानिकों) की एक टीम ने वहां डेरा डाला था।
उस दौर में, डायमंड पॉलिशिंग और स्टील-प्लेट मैन्युफैक्चरिंग के लिए मशहूर इस तटीय शहर में दहशत का आलम यह था कि लोग अपने परिवार और कीमती सामान के साथ सड़कों पर आ गए थे। हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई थी, लेकिन शहर के बाहरी इलाकों में तेज झटके महसूस किए गए थे। भारत नगर और कालियाबीड सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके थे, जहां गुजरात हाउसिंग बोर्ड के मकानों में बड़ी दरारें आ गई थीं।
अफवाहों और दहशत का वह दौर
साल 2000 की उस घटना के चश्मदीद भरत ओझा ने बताया था, “हमें पूरी धरती हिलती हुई महसूस हुई और अलमारियों से बर्तन नीचे गिरने लगे। हम डर के मारे घर से बाहर भाग गए कि कहीं इमारत गिर न जाए।” ऊंची इमारतों में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा डरे हुए थे क्योंकि उन्हें अपनी इमारतें ‘झूलती’ हुई महसूस हो रही थीं।
उस समय भी अफवाहों का बाजार गर्म था। एक ऑटो-रिक्शा चालक को तो केवल इसलिए गिरफ्तार किया गया था क्योंकि वह यह अफवाह फैला रहा था कि धार्मिक गुरुओं ने शाम तक और बड़े भूकंप की भविष्यवाणी की है। उस वक्त के जिला कलेक्टर कांति पटेल और एसपी जे.के. भट्ट ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विशेष पुलिस वैन तैनात की थीं, जो लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से अफवाहों पर यकीन न करने की अपील कर रही थीं।
इतिहास से सबक और आज की तैयारी
जिस तरह साल 2000 में अहमदाबाद ग्रामीण, राजकोट और अमरेली के अधिकारियों को अलर्ट पर रखा गया था, ठीक उसी तरह आज राजकोट में भी प्रशासन मुस्तैद है। हालांकि समय बदल गया है और तकनीक बेहतर हो गई है, लेकिन प्रकृति का यह रूप आज भी इंसानों को डरा देता है। फिलहाल, राजकोट के लोग सहमे हुए हैं, लेकिन प्रशासन की मुस्तैदी से स्थिति नियंत्रण में है।
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