नई दिल्ली: गुजरात से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने उच्च सदन में देश की विदेश नीति, गैस संकट और महंगाई के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को संबोधित करते हुए अपने धारदार भाषण में गोहिल ने तीखे तंज कसे और सरकार की कार्यप्रणाली की तुलना ‘शुतुरमुर्ग’ (शाहमृग) से कर दी।
शक्तिसिंह गोहिल के भाषण की प्रमुख बातें इस प्रकार रहीं:
‘नाले से गैस निकालने वाले फॉर्मूले पर खर्च करें 58 हजार करोड़’
गोहिल ने सरकार द्वारा लाए जा रहे 58,000 करोड़ रुपये के आर्थिक स्थिरीकरण कोष (Economic Stabilization Fund) का जिक्र करते हुए तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के एक चर्चित पुराने बयान की ओर स्पष्ट इशारा करते हुए वित्त मंत्री पर तंज कसा।
गोहिल ने कहा, “एक ‘नॉन-बायोलॉजिकल’ वैज्ञानिक ने कहा था कि नाली में उल्टा बर्तन रखकर उसमें छेद करने से गैस निकलती है, जिससे चाय का ठेला लग सकता है। सरकार को अपने 58 हजार करोड़ के फंड में से इस योजना के लिए भी प्रावधान करना चाहिए। हर जगह नालियां हैं, उल्टा बर्तन डालो, पाइप लगाओ और गैस का इंतजाम हो गया।”
विदेश नीति पर सरकार को नसीहत
कांग्रेस सांसद ने विदेश नीति को दलगत राजनीति से ऊपर रखने की वकालत की। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि केवल ‘जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस ने कोई नीति बनाई थी’, महज इस आधार पर बिना सोचे-समझे उसे बदल देना देश के हित में नहीं है।
गोहिल ने कहा कि विदेश नीति किसी पार्टी की नहीं बल्कि देश की होती है, और मौजूदा नीतियों के खामियाजे के कारण ही आज सरकार को 58,000 करोड़ रुपये का फंड लेकर आना पड़ रहा है।
‘शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर छिपा रही है सरकार’
जमीनी हकीकत से मुंह मोड़ने का आरोप लगाते हुए गोहिल ने एक रोचक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “हमारे गुजरात में एक पक्षी होता है शहामृग (शुतुरमुर्ग)। जब कोई उसके पीछे लगता है, तो वह अपना सिर रेत में छिपा लेता है। वह सोचता है कि जब वह किसी को नहीं देख रहा, तो कोई उसे भी नहीं देख रहा है। सरकार भी ठीक ऐसी ही नीति अपना रही है।”
गैस सिलेंडरों की लाइन दिखाने की खुली चुनौती
गैस सप्लाई में किसी भी तरह की किल्लत से इनकार करने वाले मंत्रियों को गोहिल ने खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर मंत्री जी कहते हैं कि कांग्रेस वाले झूठ बोल रहे हैं, तो वह उनके साथ चलें।
गोहिल ने कहा, “मैं आपको अहमदाबाद से लेकर हर जगह गैस सिलेंडर के लिए लगी लोगों की लंबी कतारें दिखाऊंगा। क्या ये लाइनें विपक्ष ने लगवाई हैं?”
अपने भाषण के अंत में गोहिल ने सरकार से अपील की कि जब तक जनता की मूल समस्याओं को स्वीकार नहीं किया जाएगा, तब तक उनका कोई हल नहीं निकलेगा। इसलिए सरकार को इस विषय पर पूरी गंभीरता के साथ विचार करना चाहिए।
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