नई दिल्ली: राज्यसभा में मंगलवार को देश भर के सरकारी अस्पतालों में रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर सरकार की कथनी और जमीनी हकीकत का बड़ा अंतर सामने आया। गुजरात से राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता शक्तिसिंह गोहिल ने माननीय सभापति सी.पी. राधाकृष्णन के समक्ष यह गंभीर मुद्दा उठाते हुए स्वास्थ्य मंत्री से तीखे सवाल किए और सिस्टम की खामियों पर गहरी चिंता व्यक्त की।
कागजों पर वैक्सीन उपलब्ध, तो अस्पतालों से मरीज खाली हाथ क्यों?
सदन की कार्यवाही के दौरान गोहिल ने मंत्री के उस बयान पर सीधा प्रहार किया जिसमें दावा किया गया था कि देश में ‘रेबीज इम्यूनोग्लोबिन’ और ‘एंटी-रेबीज वैक्सीन’ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
गोहिल ने सवालिया निशान लगाते हुए कहा, “जब वैक्सीन पूरी तरह से देश में उपलब्ध है, तो सिस्टम में आखिर कहां दिक्कत आ रही है? गरीब आदमी इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में जाता है, लेकिन वहां उसे निराशा हाथ लगती है।”
गुजरात के कई जिलों से आ रही हैं रोज शिकायतें
सांसद गोहिल ने जमीनी हकीकत का ब्यौरा देते हुए सदन को बताया कि उनके पास हर दिन गुजरात के विभिन्न हिस्सों से फोन आते हैं। उन्होंने विशेष रूप से बोटाद, भावनगर और अमरेली जैसे जिलों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां रेबीज के टीकों का भारी संकट है।
उन्होंने स्थानीय संदर्भ देते हुए समझाया कि गुजरात में पागल कुत्ते को ‘हड़कायु कुत्रू’ और रेबीज की बीमारी को ‘हड़कवा’ कहा जाता है। कुत्ते के काटने के बाद इस जानलेवा वायरस से बचने का एकमात्र उपाय समय पर वैक्सीन मिलना है, जो सरकारी अस्पतालों से नदारद है।
सांसद की प्रमुख मांग: केंद्र सरकार सीधे अस्पतालों में पहुंचाए वैक्सीन
मानव जीवन के मूल्य को सर्वोपरि बताते हुए गोहिल ने सदन में भावुक लेकिन दृढ़ शब्दों में कहा, “इंसान की जिंदगी से महंगा और कुछ भी नहीं है।”
उन्होंने सरकार से एक ठोस व्यवस्था बनाने की मांग करते हुए सीधा सवाल पूछा:
- अगर सरकार के पास वैक्सीन का पूरा स्टॉक है, तो क्या यह सप्लाई चेन या सिस्टम का फेलियर नहीं है?
- क्या भारत सरकार देश के सभी राज्यों के सरकारी अस्पतालों में ‘एंटी-रेबीज वैक्सीन’ और ‘रेबीज इम्यूनोग्लोबिन’ की सीधे (Direct) सप्लाई सुनिश्चित करने की व्यवस्था करेगी, ताकि मरीजों को दर-दर न भटकना पड़े?
शक्तिसिंह गोहिल के इस हस्तक्षेप ने स्वास्थ्य सुविधाओं के वितरण तंत्र (Delivery System) पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। अब यह देखना अहम होगा कि स्वास्थ्य मंत्रालय इस ‘सिस्टम फेलियर’ को दुरुस्त करने और सरकारी अस्पतालों तक जीवनरक्षक रेबीज वैक्सीन की सीधी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।
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