comScore स्टर्लिंग बायोटेक केस: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बैंकों ने मांगा अपना हिस्सा, 19 हजार करोड़ से ज्यादा का है बकाया - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

स्टर्लिंग बायोटेक केस: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बैंकों ने मांगा अपना हिस्सा, 19 हजार करोड़ से ज्यादा का है बकाया

| Updated: March 19, 2026 14:48

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बैंकों ने पेश किया 19 हजार करोड़ के नुकसान का ब्योरा, जानिए 5,100 करोड़ के सेटलमेंट पर कैसे संदेसरा बंधुओं को मिली राहत।

पिछले साल 19 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड के प्रमोटरों, नितिन और चेतन संदेसरा के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मंजूरी दी थी। यह राहत उन्हें बैंक लोन न चुकाने के मामले में 5,100 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त पर मिली थी। अदालत ने इसे बकाया राशि के पूर्ण और अंतिम भुगतान के तौर पर स्वीकार किया था।

5,100 करोड़ रुपये की यह भारी-भरकम रकम जांच एजेंसियों और ऋणदाता बैंकों के बीच लंबे विचार-विमर्श के बाद तय की गई थी। इसके बाद संदेसरा समूह ने भी इस आंकड़े पर अपनी सहमति जता दी थी।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद सुरक्षित ऋणदाता बैंकों द्वारा दायर एक आवेदन से उनके नुकसान की असल तस्वीर सामने आई है। इस आवेदन के मुताबिक, समूह की विभिन्न कंपनियों पर बैंकों का कुल 19,283.77 करोड़ रुपये का बकाया लंबित है।

हाल ही में बैंकों ने 19 नवंबर के आदेश के अनुपालन में एक संयुक्त आवेदन दायर किया है। इसके जरिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में समूह द्वारा जमा किए गए 5,100 करोड़ रुपये में से अपने-अपने हिस्से के वितरण के लिए अदालत से स्पष्ट निर्देश मांगे हैं।

इस आवेदन में बताया गया है कि बैंकों ने बकाया राशि बांटने का एक सटीक फॉर्मूला तैयार कर लिया है। सभी सुरक्षित ऋणदाताओं की सर्वसम्मति से वितरण की यह प्रक्रिया और कार्यप्रणाली तय की गई है।

इसी वितरण प्रक्रिया के तहत, 463.12 करोड़ रुपये के कुल बकाया वाली पांच विदेशी संस्थाओं को उनके हिस्से के रूप में 120.8 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे।

बीते 16 मार्च को जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की सुप्रीम कोर्ट बेंच ने बैंकों के इस महत्वपूर्ण आवेदन पर सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान संदेसरा के वकील ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद कंपनी के खिलाफ सेबी (SEBI) की कार्यवाही अभी भी जारी है। इस पर बेंच ने कड़ी आपत्ति जताते हुए सवाल किया कि उनके आदेश के बाद सेबी बीच में क्यों आ रहा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को तय की गई है।

इस पूरे विवाद की जड़ें 2020 से जुड़ी हैं जब संदेसरा बंधुओं ने पहली बार अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने बैंकों को कर्ज न चुकाने के मामले में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मामलों को रद्द करने की अपील की थी।

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि वे भारतीय और विदेशी दोनों संस्थाओं की बकाया राशि के संबंध में बैंकों के कंसोर्टियम के साथ 6,761 करोड़ रुपये के वन-टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) पर पहले ही समझौता कर चुके हैं।

संदेसरा बंधुओं का तर्क था कि यह किसी ऐसे व्यक्ति का मामला नहीं है जिसने जानबूझकर बैंकों को धोखा दिया हो। उन्होंने दलील दी कि व्यापार के सामान्य क्रम में उन्हें वास्तविक व्यावसायिक नुकसान हुआ है और वे कर्ज चुकाने के लिए हर संभव और उचित प्रयास कर रहे हैं।

अदालत में सुनवाई के दौरान उन्होंने जानकारी दी कि वे ओटीएस राशि के तहत विभिन्न मदों में 3,507.63 करोड़ रुपये पहले ही जमा कर चुके हैं। इसके अलावा, इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी), 2016 की कार्यवाही के माध्यम से बैंकों ने 1,192 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वसूली भी कर ली है।

इस हिसाब से, संदेसरा समूह के अनुसार उनकी देनदारी केवल 2,061.37 करोड़ रुपये ही बची थी। उन्होंने अदालत का ध्यान इस ओर भी खींचा कि ईडी ने उनकी 27,757 करोड़ रुपये की संपत्ति पहले ही कुर्क कर ली है, और वे शेष राशि का भुगतान कर इस मुद्दे को हमेशा के लिए सुलझाने के इच्छुक हैं।

हालांकि, जांच एजेंसियों ने उनके द्वारा प्रस्तावित इस बकाया राशि का कड़ा विरोध किया। बैंकों के साथ लंबी चर्चा के बाद एजेंसियों ने 5,100 करोड़ रुपये का एक नया और संशोधित आंकड़ा पेश किया, जिसे अंततः समूह द्वारा स्वीकार कर लिया गया।

इसी सहमति के आधार पर 19 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने 5,100 करोड़ रुपये के भुगतान पर आपराधिक कार्यवाही रद्द करने का अनुरोध मान लिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि 17 दिसंबर 2025 तक इस राशि के पूर्ण और अंतिम भुगतान के रूप में जमा होने पर ही यह राहत प्रभावी होगी।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भुगतान की जाने वाली 5,100 करोड़ रुपये की यह राशि, पहले जमा किए गए 3,507.63 करोड़ रुपये और आईबीसी कार्यवाही के जरिए वसूले गए 1,192 करोड़ रुपये के बिल्कुल अतिरिक्त है।

सीबीआई और ईडी ने संदेसरा बंधुओं पर बड़े पैमाने पर बैंक ऋण धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और शेल कंपनियों के जरिए फंड डायवर्ट करने के गंभीर आरोप लगाए थे। एजेंसियों का दावा है कि उन्होंने बेनामी कंपनियों और फर्जी लेन-देन का एक जटिल जाल बिछाया था।

वर्तमान में, संदेसरा बंधुओं के नाइजीरिया या अल्बानिया में छिपे होने की खबरें हैं। उनके खिलाफ भारत सरकार के प्रत्यर्पण के अनुरोध अभी भी लंबित हैं और दोनों भाइयों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस पूरी तरह से सक्रिय हैं।

यह भी पढ़ें-

शासन संबंधी चिंताओं के बीच HDFC बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती का इस्तीफा, केकी मिस्त्री बने अंतरिम प्रमुख…

गुजरात में UCC बिल 2026 पेश: लिव-इन के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, जानें शादी-तलाक के नए नियम

Your email address will not be published. Required fields are marked *