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सूरत: 7 साल की मासूम की ‘दीक्षा’ पर फिलहाल रोक, फैमिली कोर्ट में पिता की अर्जी के बाद मां ने दिया हलफनामा

| Updated: December 23, 2025 17:54

पिता की याचिका पर फैमिली कोर्ट का कड़ा रुख: 2026 में होने वाले दीक्षा समारोह पर मां ने कोर्ट में दिया लिखित आश्वासन, 2 जनवरी को अगली सुनवाई।

सूरत: गुजरात के सूरत में एक सात वर्षीय बच्ची के जैन दीक्षा (जैन मुनि बनने की प्रक्रिया) को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। सूरत फैमिली कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बच्ची की मां ने अदालत में एक हलफनामा पेश किया है, जिसमें कहा गया है कि फिलहाल दीक्षा के कार्यक्रम को “स्थगित” कर दिया गया है। अदालत ने पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश जारी किया था।

कोर्ट का आदेश और मां का पक्ष

सोमवार को सूरत फैमिली कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान, न्यायाधीश एस.वी. मंसूरी के निर्देश पर बच्ची की मां ने शपथ पत्र जमा किया। इसमें स्पष्ट किया गया कि आगामी 4 से 8 फरवरी, 2026 के बीच होने वाले दीक्षा समारोह में बच्ची हिस्सा नहीं लेगी।

हालांकि, मां ने अदालत में तर्क दिया कि धार्मिक दीक्षा की पूरी प्रक्रिया पिता की सहमति से शुरू की गई थी। उन्होंने सबूत के तौर पर कुछ तस्वीरें और दस्तावेज भी पेश किए, जिनमें पिता को उस आध्यात्मिक गुरु के साथ बैठकों में मौजूद दिखाया गया है, जो बच्ची को दीक्षा के लिए तैयार कर रहे थे।

पिता का तर्क: ‘सहमति नहीं, दबाव था’

दूसरी ओर, पिता का प्रतिनिधित्व कर रही वकील समाप्ति मेहता ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि पिता को उन बैठकों में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया था। पिता का आरोप है कि उनकी पत्नी ने उन्हें धमकी दी थी कि यदि वह नहीं आए तो वह तलाक की कार्यवाही शुरू कर देंगी और उनकी सहमति के बिना भी दीक्षा संपन्न करा दी जाएगी।

पिता ने अदालत के बाहर मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैं दीक्षा की परंपरा के खिलाफ नहीं हूं और इसका सम्मान करता हूं, लेकिन मेरी बेटी अभी बहुत छोटी है। उसे बड़े होकर खुद अपना रास्ता चुनने का मौका मिलना चाहिए। मैं अपनी बच्ची की मासूमियत की कीमत पर लोकप्रियता नहीं चाहता।”

क्या है पूरा मामला?

यह कानूनी लड़ाई तब शुरू हुई जब पिता ने 10 दिसंबर, 2025 को ‘गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट, 1890’ के तहत सूरत फैमिली कोर्ट में अपनी सात और पांच साल की बेटियों की कस्टडी के लिए याचिका दायर की।

दंपति की शादी सितंबर 2012 में हुई थी। उनके बीच विवाद तब गहराया जब दीक्षा के मुद्दे पर असहमति हुई। इसके बाद अप्रैल 2024 से पत्नी अपने माता-पिता के साथ अलग रह रही है।

बच्ची की दीक्षा मुंबई के बोरीवली में फरवरी 2026 में होने वाली थी, जहाँ लगभग 60 लोग दीक्षा लेने वाले थे और यह बच्ची उनमें सबसे कम उम्र की होती।

अगली सुनवाई 2 जनवरी को

कोर्ट परिसर के बाहर बच्ची की मां ने मीडिया से कहा कि पिता को सब कुछ पता था और अदालत जाकर इस मामले को सार्वजनिक तमाशा बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है। फिलहाल, बच्ची की कस्टडी और उसके भविष्य को लेकर कानूनी बहस जारी है। सूरत फैमिली कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 जनवरी, 2026 को करेगा, जिसमें बच्चों की कस्टडी पर आगे का फैसला लिया जा सकता है।

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