सूरत: गुजरात में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए कस्टम विभाग ने सूरत एयरपोर्ट पर एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ किया है। अधिकारियों ने बैंकॉक से आई एयर इंडिया की फ्लाइट से 8.5 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक कैनबिस (जिसे आम भाषा में हाइब्रिड गांजा कहा जाता है) जब्त किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत करीब 8 करोड़ रुपये आंकी गई है।
कैसे हुई बरामदगी?
यह कार्रवाई 6 फरवरी को एयर इंडिया की उड़ान संख्या IX-263 के सूरत में लैंड करने के ठीक बाद की गई। कस्टम और सुरक्षा एजेंसियों को पहले से ही खुफिया जानकारी (Intelligence Inputs) मिली थी, जिसके आधार पर विमान की सघन तलाशी शुरू की गई।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच अधिकारियों को पहली सफलता तब मिली जब सीट नंबर 28-A के फुटरेस्ट (पैरों के पास की जगह) में भूरे रंग के टेप में लिपटे हुए 6 संदिग्ध पैकेट मिले। जांच करने पर पुष्टि हुई कि इनमें हाइब्रिड गांजा है, जिसका वजन 2.025 किलोग्राम था।
इसके बाद जब विमान की और बारीकी से जांच की गई, तो सीट नंबर 24-A, 24-B, 25-A और 25-B के पीछे लगे कुशन (Backrest cushions) के अंदर छिपाया गया करीब 6.5 किलोग्राम गांजा और बरामद हुआ।
हरियाणा और यूपी के तस्कर गिरफ्तार
इन सीटों पर बैठे चार यात्रियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपियों की पहचान हरियाणा के रोहतक जिले के प्रवीण कर्मवीर (25), विक्रम भौकाल (32) और प्रदीप के रूप में हुई है। वहीं, चौथा आरोपी अंशुल शिवकुमार गुप्ता (22) उत्तर प्रदेश के महोबा जिले का रहने वाला है।
पूछताछ में चारों ने कबूला कि यह नशीला पदार्थ विदेश से तस्करी कर भारत लाया गया था और इसे देश के भीतर अलग-अलग जगहों पर सप्लाई किया जाना था। कस्टम विभाग ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की धारा 8(C), 20 और 23 के तहत मामला दर्ज कर लिया है और अब इस रैकेट के मुख्य सरगनाओं तक पहुंचने के लिए जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है।
गुजरात में बढ़ता ड्रग्स का जाल: एक चिंताजनक पहलू
सूरत एयरपोर्ट पर हुई यह बरामदगी गुजरात में नशीले पदार्थों और सिंथेटिक ड्रग्स के बढ़ते प्रसार की ओर इशारा करती है।
अहमदाबाद में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने पिछले एक साल में ड्रग्स के खिलाफ लगातार अभियान चलाया है। पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि 27 मामलों में 46 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनसे करीब 2.55 करोड़ रुपये का मेफेड्रोन (एमडी ड्रग्स) और गांजा बरामद हुआ है।
अधिकारियों का कहना है कि थाईलैंड जैसे देशों से सिंथेटिक ड्रग्स मंगवाकर अब शहरी युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है। इसके अलावा, कुछ दवा कंपनियों (Pharmaceutical units) से जुड़े अवैध ड्रग्स उत्पादन के मामले भी जांच के घेरे में आए हैं।
खेती से लेकर तस्करी तक
चिंता की बात यह है कि ड्रग्स केवल बाहर से ही नहीं आ रहा, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी इसकी जड़ें फैल रही हैं। गुजरात के भावनगर, बोटाद, राजकोट और जूनागढ़ जैसे जिलों में अवैध गांजे की खेती के मामले सामने आए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कई जगहों पर खेतों के अलावा रिहायशी इलाकों में भी इसकी खेती की जा रही है।
इसके साथ ही, ओडिशा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के रास्तों से भी गांजा गुजरात लाया जा रहा है, जबकि सूरत जैसे शहरों में थाईलैंड से आने वाले हाइब्रिड नशे की खपत बढ़ रही है।
युवाओं में बढ़ता ‘म्याऊ-म्याऊ’ का नशा
जांच एजेंसियों ने एक बदलते ट्रेंड को नोटिस किया है। पहले जहां गांजे का नशा मुख्य रूप से मजदूरों तक सीमित था, वहीं अब यह छात्रों और युवाओं के बीच तेजी से फैल रहा है। अहमदाबाद, वडोदरा और राजकोट जैसे शहरों में होने वाली प्राइवेट पार्टियों में मेफेड्रोन—जिसे ‘म्याऊ-म्याऊ’ (Meow Meow) भी कहा जाता है—की मांग बढ़ रही है।
ड्रग्स तस्करी की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में पुलिस ने नेपाल से भागे एक आरोपी को अहमदाबाद से गिरफ्तार किया था, जो 13 करोड़ रुपये के गांजा तस्करी मामले में शामिल था।
सूरत एयरपोर्ट का यह मामला और लगातार हो रही बरामदगी यह साबित करती है कि गुजरात में नशीले पदार्थों का नेटवर्क बहुत गहरा हो चुका है, जिसकी तह तक जाने के लिए एजेंसियां अब पूरी ताकत लगा रही हैं।
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