सूरत: त्योहारों का मौसम बस शुरू ही होने वाला है और दिवाली को अब कुछ ही हफ्ते बचे हैं, लेकिन सूरत के हज़ारों हीरा कारीगरों के घरों में चिंता के बादल छा गए हैं। एक तरफ जहाँ वे मंदी की मार झेल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अब उनके बच्चों की पढ़ाई के लिए मिलने वाली सरकारी आर्थिक सहायता पर भी संकट आ गया है।
प्रशासन ने 26,000 हीरा श्रमिकों के आवेदनों को खारिज़ कर दिया है, जिससे 30,000 से ज़्यादा बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है।
सूत्रों के अनुसार, सूरत के जिला उद्योग केंद्र ने इन आवेदनों को रद्द करने के पीछे दो मुख्य कारण बताए हैं। पहला, कई फॉर्म अधूरे भरे गए थे और दूसरा, श्रमिकों की नौकरी जाने की तारीख राज्य सरकार के सरकारी संकल्प (GR) के साथ मेल नहीं खा रही थी।
आपको बता दें कि गुजरात सरकार ने इसी साल मई महीने में हीरा उद्योग के लिए एक वित्तीय सहायता पैकेज की घोषणा की थी। इस पैकेज के तहत, 31 मार्च, 2024 के बाद अपनी नौकरी खोने वाले श्रमिकों के प्रत्येक बच्चे की स्कूल फीस के लिए 13,500 रुपये की सहायता सीधे स्कूल को दी जानी थी। यह हीरा श्रमिकों की एक लंबे समय से चली आ रही मांग थी।
यह फैसला श्रमिकों के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि शैक्षणिक वर्ष पहले ही आधा बीत चुका है। कई स्कूल फीस न चुकाने पर अभिभावकों पर दबाव बना रहे हैं और बच्चों को परीक्षा के लिए हॉल टिकट न देने की चेतावनी दे चुके हैं।
आंकड़ों पर नज़र डालें तो कुल 74,268 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से केवल 47,599 को ही मंजूरी दी गई। इस फैसले से उन श्रमिकों पर दोहरी मार पड़ी है, जिनके एक से ज़्यादा बच्चे स्कूल जाते हैं।
उद्योग पर चौतरफा संकट
यह संकट ऐसे समय में आया है जब भारतीय हीरा उद्योग पहले से ही अंतरराष्ट्रीय दबाव झेल रहा है। अमेरिका द्वारा भारतीय हीरा निर्यात पर पहले 25 प्रतिशत और बाद में अतिरिक्त 25 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया गया है। उद्योग जगत में यह डर है कि यदि यह टैरिफ वापस नहीं लिया गया तो लगभग एक लाख हीरा श्रमिकों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है।
सूरत का हीरा उद्योग, जो दुनिया के 10 में से 9 हीरों को तराशने का काम करता है, कोरोना-19 महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से ही मंदी के दौर से गुज़र रहा है। उद्योग के जानकारों का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ का असली असर दिवाली के बाद जब कारखाने फिर से खुलेंगे, तब देखने को मिलेगा।
फैसले पर पुनर्विचार की मांग
इस बीच, डायमंड वर्कर्स यूनियन गुजरात (DWUG) ने राज्य सरकार से अपने फैसले पर फिर से विचार करने और सभी आवेदनों को मंजूरी देने की मांग की है। यूनियन के उपाध्यक्ष भावेश टैंक ने कहा, “सरकार को बड़ा दिल दिखाना चाहिए और सभी आवेदनों को स्वीकार करना चाहिए। हम मानते हैं कि एक या दो प्रतिशत आवेदन गलत हो सकते हैं, लेकिन ज़्यादातर आवेदन वास्तविक हैं।”
विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं। गुजरात कांग्रेस के नेता मनहर पटेल ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर आवेदनों को मंजूरी देने की मांग की है। वहीं, गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा सहित कई अन्य नेता भी हीरा उद्योग के इस मुद्दे को लगातार उठाते रहे हैं।
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