सूरत के एक डॉक्टर के परिवार ने गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने पुलिस द्वारा डॉक्टर के खिलाफ दर्ज रेप की मूल एफआईआर (FIR) में गुजरात धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2003 की धाराओं को जोड़ने को चुनौती दी है। परिवार की मांग है कि इन नई धाराओं को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।
याचिकाकर्ताओं ने चार्जशीट दाखिल होने के बाद पुलिस द्वारा की जा रही “आगे की जांच” की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस जांच के बहाने उन्हें भी आरोपी बनाया जा रहा है, जो कि पूरी तरह से बदले की भावना से की गई कार्रवाई है।
अधिवक्ता उत्कर्ष दवे के माध्यम से यह याचिका दायर की गई है। इसमें बताया गया है कि मई 2025 में सूरत ग्रामीण के एक पुलिस स्टेशन में डॉक्टर के खिलाफ रेप का मामला दर्ज हुआ था। इसी एफआईआर में अब परिवार के छह सदस्यों को धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत आरोपी बना दिया गया है।
हाईकोर्ट पहुंचने वाले इन छह याचिकाकर्ताओं में मुख्य आरोपी (डॉक्टर) के माता-पिता, दो बहनें, एक बुआ और एक दूर का रिश्तेदार शामिल हैं। मूल शिकायत में पीड़िता ने आरोप लगाया था कि पेशे से डॉक्टर इस शख्स ने शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया।
नए आरोपों के तहत, शिकायतकर्ता का दावा है कि उसे शादी का लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया गया। इसी कथित आवेदन के आधार पर पुलिस ने मामले में धर्मांतरण विरोधी कानून की धाराएं जोड़ दी हैं।
याचिका में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि परिवार के अन्य सदस्यों को केवल इसलिए फंसाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने स्वेच्छा से ‘ईसाई’ धर्म अपनाया है। धार्मिक आयोजनों और समारोहों में उनकी मौजूदगी को गलत तरीके से पेश करके शिकायतकर्ता असली तथ्यों को तोड़-मरोड़ रही है।
याचिका के अनुसार, चार्जशीट दाखिल होने के बाद जांच अधिकारी “आगे की जांच” की आड़ में दो अलग-अलग शिकायतों से उपजे मामलों को एक ही में मिला रहे हैं। यह भी आरोप है कि मजिस्ट्रेट कोर्ट के एक “यांत्रिक आदेश” (mechanical order) के आधार पर जांच अधिकारी ने धर्म स्वतंत्रता अधिनियम की धाराएं लागू करने की मंजूरी ली है।
मूल एफआईआर के मुताबिक, आरोपी डॉक्टर ने एक विधवा महिला को शादी करने और उसकी बेटी को अपनाने का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। महिला अपने दिवंगत पति के इलाज के दौरान इस डॉक्टर के संपर्क में आई थी।
शिकायत में बताया गया था कि अनचाहे गर्भधारण और फिर उसे गिराने के बाद जब महिला ने कोर्ट मैरिज का दबाव डाला, तो डॉक्टर ने उससे दूरी बनानी शुरू कर दी।
हाईकोर्ट में दी गई याचिका में जिक्र है कि जून 2025 में मूल आरोपी को अग्रिम जमानत मिल गई थी। इसके बाद 30.06.2025 को शिकायतकर्ता ने मांडवी पुलिस स्टेशन में धोखे से एक और लिखित शिकायत दी।
इस नई शिकायत में महिला ने कहा कि आरोपी केवल ‘ईसाई’ समुदाय की लड़की से शादी करना चाहता था, इसलिए वह भी चर्च जाने लगी। महिला के मुताबिक उसने ईसाई समुदाय के कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और पूछे जाने पर अपनी मर्जी से ईसाई धर्म से जुड़ने की बात कही।
शिकायतकर्ता का दावा है कि उसने लखी डैम में मुख्य आरोपी के पिता द्वारा कराए गए एक अनुष्ठान में भाग लिया, जिसके बाद उसे बताया गया कि उसने ईसाई धर्म अपना लिया है।
याचिकाकर्ताओं का दृढ़ता से मानना है कि “आगे की जांच” के नाम पर जोड़ी गई ये अतिरिक्त धाराएं सिर्फ मामले को एक नया एंगल देने की कोशिश हैं। उनका कहना है कि यह सब केवल मूल आरोपी के परिवार को किसी न किसी तरह फंसाने और उनसे बदला लेने की नीयत से किया जा रहा है।
यह भी पढ़ें-
FSSAI पर सवाल उठाना यूट्यूबर नलिनी उनागर को पड़ा भारी, दिल्ली पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
गुजरात बना समान नागरिक संहिता (UCC) की दिशा में कदम बढ़ाने वाला दूसरा राज्य










