गुजरात से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने सूरत के उन किसानों के लिए न्याय की मांग की है, जिन्होंने अपनी जमीन उन बिल्डरों को बेच दी थी, जब यह जमीन सूरत एयरपोर्ट के विस्तार के लिए आरक्षित घोषित की गई थी, लेकिन बाद में सरकार ने अधिसूचना जारी कर कहा कि अब इस जमीन की जरूरत नहीं है।
लोकसभा में लिखित उत्तर में खुलासा
सोमवार को लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोळ ने कहा कि फिलहाल सूरत एयरपोर्ट के विस्तार के लिए किसी भी जमीन की आवश्यकता नहीं है।
गौरतलब है कि सोमवार से संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ है, जिसमें विपक्ष सरकार पर विभिन्न मुद्दों को लेकर दबाव बनाने की तैयारी में है। इनमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद सीज़फायर के दावे जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।
गोहिल ने वीडियो संदेश में क्या कहा?
बाद में एक वीडियो संदेश जारी कर गोहिल ने कहा कि राज्य सरकार को चाहिए कि वह जरूरत पड़ी तो एक विशेष कानून लेकर आए, ताकि उस अवधि के दौरान की गई जमीन की खरीदी-बिक्री रद्द की जा सके, जब जमीन को आरक्षित घोषित किया गया था और फिर बाद में उसे डीरिज़र्व (रिहा) किया गया।
गोहिल ने यह भी कहा कि किसानों को यह अधिकार मिलना चाहिए कि वे बिल्डरों से मिले पैसे को बिना ब्याज के वापस करके अपनी जमीन पुनः प्राप्त कर सकें।
बिल्डर-किसान सौदे पर गंभीर आरोप
गोहिल ने आरोप लगाया कि उन्हें कई किसानों से शिकायतें मिली हैं कि बिल्डरों ने उन्हें कहा कि राज्य सरकार उनकी जमीन जब्त कर सकती है और उन्हें बहुत कम मुआवज़ा मिलेगा। इस डर से कई किसानों ने अपनी जमीन के बिक्री दस्तावेज़ बिल्डरों को सौंप दिए और उनसे पैसे ले लिए।
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में प्रशासन और बिल्डर लॉबी की मिलीभगत रही है। उन्होंने मांग की कि उस अवधि में हुए सभी सौदों को रद्द किया जाए।
मुख्यमंत्री को दी चेतावनी
गोहिल ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल इस पूरे मामले से वाक़िफ़ हैं और उन्हें सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी गतिविधियों को बर्दाश्त न किया जाए।
एयरपोर्ट विस्तार की ज़मीन की ज़िम्मेदारी राज्य सरकार की
नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोळ ने अपने उत्तर में यह भी स्पष्ट किया कि हवाई अड्डे के विस्तार के लिए ज़मीन उपलब्ध कराना राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी है।
उन्होंने बताया कि समय-समय पर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) विस्तार की आवश्यकता का अध्ययन करती है और मास्टर प्लान तैयार करती है। इसके बाद राज्य सरकार को ज़मीन की आवश्यकता से अवगत कराया जाता है।
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