सूरत: गुजरात की डायमंड सिटी सूरत में पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक ऐसे ड्रग रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है। शहर के पर्वत पाटिया इलाके में एक शॉपिंग मॉल के अंदर ‘फूड टेस्टिंग लैब’ के नाम पर एक हाई-टेक ड्रग फैक्ट्री चलाई जा रही थी। इस खुलासे में सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि इस पूरे काले कारोबार का मास्टरमाइंड लंदन में बैठा है और वहीं से इस ऑपरेशन को फाइनेंस कर रहा था।
इस छापेमारी में पुलिस ने भारी मात्रा में नशीले पदार्थ और रसायन बरामद किए हैं। साथ ही, तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो पढ़े-लिखे युवा हैं और अपनी केमिकल की जानकारी का इस्तेमाल जहर बनाने में कर रहे थे।

1 जनवरी को मिली थी पहली कामयाबी
इस पूरे मामले की कड़ियां 1 जनवरी, 2026 को तब खुलनी शुरू हुईं, जब सूरत SOG ने अमरोली-छापराभाठा रोड से 21 वर्षीय जिल भूपतभाई ठुम्मर को गिरफ्तार किया। जिल के पास से पुलिस को 236.780 ग्राम एमडी (MD) ड्रग मिली थी। जब पुलिस ने जिल से सख्ती से पूछताछ की, तो उसने एक चौंकाने वाला खुलासा किया।
उसने बताया कि यह ड्रग किसी बाहरी राज्य से नहीं आई है, बल्कि सूरत शहर के अंदर ही एक प्राइवेट लैब में तैयार की जा रही है।
इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने अलग-अलग टीमें बनाईं और जांच का दायरा बढ़ाया।

शॉपिंग सेंटर में चल रही थी ‘मौत की लैब’
जिल की निशानदेही पर पुलिस ने पर्वत पाटिया स्थित वेसु कैनाल रोड पर ‘पोलारिस शॉपिंग सेंटर’ में छापा मारा। वहां ‘दिक्रिया फूड एंड फार्मा एनालिटिकल लेबोरेटरी’ (Dikriya Food and Pharma Analytical Laboratory) नाम से एक लैब चल रही थी। बाहर से देखने पर यह एक साधारण फूड टेस्टिंग लैब लगती थी, लेकिन अंदर का नजारा कुछ और ही था।
लैब के अंदर पुलिस को आधुनिक मशीनें और खतरनाक रसायन मिले, जिनका इस्तेमाल हाई-प्यूरिटी वाला ‘क्रिस्टल मेफेड्रोन’ बनाने में किया जा रहा था। पुलिस जांच में यह बात साफ हो गई कि फूड टेस्टिंग की आड़ में यहां बड़े पैमाने पर ड्रग्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट चल रही थी।

लंदन कनेक्शन: जनक जदानी चला रहा था पूरा नेटवर्क
जांच में इस रैकेट का ‘लंदन कनेक्शन’ सामने आया है, जो बेहद चिंताजनक है। पुलिस के मुताबिक, इस ड्रग फैक्ट्री का असली मास्टरमाइंड जनक जदानी है, जो लंदन में रहता है। जनक ही लंदन से लैब के लिए जरूरी फंड और निर्देश भेज रहा था। उसका मकसद विदेश में बैठकर सूरत के युवाओं को नशे की लत में धकेलना था।
केमिकल एक्सपर्ट और पढ़े-लिखे युवाओं की टोली
पकड़े गए आरोपी बेहद शातिर और उच्च शिक्षित हैं। पुलिस ने लैब से 28 वर्षीय बृजेश व्रजलाल भालोडिया को गिरफ्तार किया है, जो इस फैक्ट्री का मुख्य मैन्युफैक्चरर है। बृजेश के पास केमिस्ट्री में बीएससी (BSc) की डिग्री है और वह सूरत की ईथर कंपनी में सीनियर केमिस्ट के तौर पर काम कर रहा था।
उसके साथ पुलिस ने 27 वर्षीय खुशाल वल्लभभाई रणपरिया (ड्रग सप्लायर) और 32 वर्षीय भरतभाई उर्फ भानो दामजीभाई लाठिया को भी गिरफ्तार किया है। जांच में यह भी पता चला है कि मालिबा कॉलेज के दो छात्र, जिनके पास केमिस्ट्री में मास्टर डिग्री है, उन्होंने भी बृजेश की मदद की थी। इन सभी ने अपने ज्ञान का दुरुपयोग कर ‘मेफेड्रोन’ (जिसे म्याऊ-म्याऊ भी कहा जाता है) बनाना शुरू कर दिया था।
‘ब्लू क्रिस्टल’ की एलीट पार्टियों में मांग
आरोपी लैब में एक खास तरह का नीले रंग का एमडी ड्रग बना रहे थे, जिसे ‘ब्लू क्रिस्टल’ (Blue Crystal) नाम दिया गया था। ड्रग तस्कर इसे “प्रीमियम क्वालिटी” बताकर एलीट पार्टियों में ऊंचे दामों पर बेचते थे। आरोपियों ने कबूल किया है कि वे पुलिस से बचने के लिए इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर ग्राहकों को ड्रग्स बेचते थे। पिछले दो महीनों में उन्होंने 5 किलो से ज्यादा ड्रग्स बनाई और उसे 5,000 रुपये प्रति ग्राम के हिसाब से बेचा।
लाखों का माल जब्त, NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई
छापेमारी के दौरान पुलिस ने लैब से कुल 2,92,050 रुपये का सामान जब्त किया है। इसमें वैक्यूम ओवन (कीमत 25,000), वैक्यूम पंप (कीमत 20,000), ओवरहेड स्टिरर, डिजिटल वजन मशीन और कई तरह के ज्वलनशील केमिकल (जैसे मिथाइल एमाइन, H2SO4) शामिल हैं। मौके से 16.950 ग्राम तैयार मेफेड्रोन भी मिला, जिसकी कीमत 50,850 रुपये आंकी गई है।
एसओजी डीसीपी राजदीप सिंह नकुम ने बताया कि सभी आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस ने लंदन स्थित मास्टरमाइंड जनक जदानी तक पहुंचने के लिए डिजिटल सबूत खंगालने शुरू कर दिए हैं और आरोपियों के 3 मोबाइल फोन (कीमत 1,15,000) जब्त कर लिए हैं।
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