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अमेरिका जाने का सपना देख रहे परिवारों को बड़ा झटका: ट्रम्प की नीतियों से 24 लाख ग्रीन कार्ड पर लटक सकती है तलवार

| Updated: January 23, 2026 14:13

ट्रम्प प्रशासन की सख्त नीतियों से फैमिली स्पॉन्सरशिप और छात्रों पर गहरा असर, रिपोर्ट में दावा- अगले 4 साल में 50% तक गिर सकता है लीगल इमिग्रेशन।

वॉशिंगटन: अमेरिका में बसने की चाहत रखने वाले लाखों लोगों और वहां रह रहे भारतीय परिवारों के लिए चिंताजनक खबर है। डोनाल्ड ट्रम्प के सत्ता में वापसी के साथ ही कानूनी इमिग्रेशन (वैध आप्रवास) पर सख्ती बढ़ती जा रही है। नई रिसर्च और रिपोर्ट्स चेतावनी दे रही हैं कि ट्रम्प प्रशासन की सख्त नीतियां अगले चार वर्षों में अमेरिका में लीगल इमिग्रेशन को 33% से 50% तक कम कर सकती हैं।

इसका सबसे बड़ा असर ‘फैमिली स्पॉन्सरशिप’ पर पड़ने वाला है, जिससे अमेरिकी नागरिकों के लिए अपने परिवार को वहां बुलाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

लाखों परिवारों के सपनों पर पानी फिरने का खतरा

एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन द्वारा कानूनी आप्रवास में की जा रही कटौती चुपचाप लेकिन बहुत गहरे प्रभाव डालने वाली है। नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (NFAP) के नए विश्लेषण में एक चौंकाने वाला अनुमान लगाया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, “ट्रम्प प्रशासन की नई नीतियां उनके चार साल के कार्यकाल के अंत तक कानूनी आप्रवास को 33% से 50% तक घटा देंगी। इसका सीधा मतलब है कि अनुमानित 15 लाख से 24 लाख लोग, जो कानूनी रूप से अमेरिका जा सकते थे, अब ग्रीन कार्ड से वंचित रह जाएंगे।”

आंकड़े क्या कहते हैं?

स्थिति की गंभीरता को समझने के लिए पिछले आंकड़ों पर नज़र डालना जरूरी है। साल 2023 में लगभग 1.17 मिलियन (11.7 लाख) लोगों ने कानूनी तौर पर अमेरिका में कदम रखा और ग्रीन कार्ड हासिल किया। अगर पुराना ढर्रा चलता रहता, तो अगले चार सालों में करीब 47 लाख लोगों को ग्रीन कार्ड मिलने की उम्मीद थी।

लेकिन NFAP का अनुमान है कि ट्रम्प प्रशासन के नए नियमों के कारण यह संख्या भारी गिरावट के साथ कम हो जाएगी। यानी पहले के मुकाबले करीब एक-तिहाई से लेकर आधे लोग ही अब ग्रीन कार्ड पा सकेंगे।

जो पहले से अमेरिका में हैं, उन पर भी संकट

यह समस्या सिर्फ नए आने वालों तक सीमित नहीं है। ऊपर बताए गए आंकड़ों में उन 27 लाख लोगों को शामिल नहीं किया गया है जो ट्रम्प की वापसी के समय अमेरिका में कानूनी रूप से रह रहे थे, लेकिन अब अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। प्रशासन ने पहले ही लाखों अप्रवासियों के लिए ‘टेंरेरी प्रोटेक्टेड स्टेटस’ (TPS) खत्म कर दिया है।

इसके अलावा, अमेरिका में पढ़ाई कर रहे विदेशी छात्रों के लिए ग्रेजुएशन के बाद ‘ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग’ (OPT) और STEM OPT के जरिए काम करना भी मुश्किल होने वाला है।

फैमिली स्पॉन्सरशिप क्यों है निशाने पर?

अमेरिका में वर्तमान कानून के तहत, एक अमेरिकी नागरिक अपने पति/पत्नी, 21 साल से कम उम्र के बच्चों और माता-पिता को ‘निकटतम परिजन’ (Immediate Relatives) के तौर पर स्पॉन्सर कर सकता है। ग्रीन कार्ड होल्डर्स भी अपने जीवनसाथी और बच्चों को स्पॉन्सर कर सकते हैं। आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में होने वाले कुल लीगल इमिग्रेशन का करीब 48% हिस्सा इसी श्रेणी से आता है।

यही कारण है कि ट्रम्प प्रशासन का मुख्य निशाना यही ग्रुप है। चूंकि इमीडिएट रिलेटिव्स की संख्या पर कोई कानूनी ‘कैप’ (सीमा) नहीं है, इसलिए प्रशासन नियमों को इतना सख्त बना रहा है कि लोग पात्र ही न हो पाएं। रोका गया हर एक व्यक्ति, कम हुए इमिग्रेशन के बराबर है।

स्टीफन मिलर की भूमिका और दो प्रमुख हथियार

इस पूरी कवायद के पीछे व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर का दिमाग माना जा रहा है, जो ट्रम्प की इमिग्रेशन नीतियों के मुख्य वास्तुकार हैं। अमेरिकी नागरिकों को अपने परिवार को बुलाने से रोकने के लिए प्रशासन मुख्य रूप से दो “हथियारों” का इस्तेमाल कर रहा है:

प्रशासन ने चुनिंदा देशों के नागरिकों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। इसके अलावा, ‘पब्लिक चार्ज’ की परिभाषा को और कड़ा किया जा रहा है। इसके तहत, अगर अधिकारियों को लगता है कि कोई व्यक्ति भविष्य में सरकारी सुविधाओं (जैसे भत्ता आदि) का उपयोग कर सकता है, तो उसका वीजा खारिज किया जा सकता है।

NFAP का अनुमान है कि इन नीतियों की वजह से ट्रम्प प्रशासन के दौरान 9,41,625 से लेकर 16,54,770 कम ‘निकटतम परिजनों’ को ग्रीन कार्ड मिल पाएगा।

39 देशों पर गिरी गाज

16 दिसंबर को एक बड़ा बदलाव तब आया जब प्रशासन ने एक घोषणा जारी करते हुए 39 देशों के प्रवासियों को ब्लॉक कर दिया। इसमें अमेरिकी नागरिकों के करीबी रिश्तेदार भी शामिल हैं। यह दुनिया के कुल देशों का लगभग 20% है। अकेले इस एक कदम से हर साल इमिग्रेशन में 76,000 लोगों तक की कमी आ सकती है।

अब यह देखना बाकी है कि क्या अमेरिकी अदालतें इन फैसलों में हस्तक्षेप करती हैं, या फिर लाखों परिवारों को अपने अपनों से दूर रहने पर मजबूर होना पड़ेगा।

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