अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के छह महीने पूरे होते ही बुधवार को एक बड़ा यात्रा प्रतिबंध लागू कर दिया। इस निर्णय की घोषणा उन्होंने एक राष्ट्रपति घोषणा-पत्र (Presidential Proclamation) के जरिए की, जिसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा, “हम उन्हें नहीं चाहते।”
यह प्रतिबंध एक तीन-स्तरीय प्रणाली के तहत लागू किया गया है, जिसमें 19 देशों के नागरिकों को निशाना बनाया गया है। यह अमेरिका के इतिहास में वैश्विक आवाजाही पर लगाए गए सबसे कड़े प्रतिबंधों में से एक माना जा रहा है।
ट्रंप के इस फैसले के पीछे कारण क्या हैं?
यह फैसला उस घटना के कुछ ही दिनों बाद आया है जब कोलोराडो के बोल्डर शहर में एक मिस्र नागरिक ने यहूदी प्रदर्शनकारियों पर हमला किया। ट्रंप ने इस घटना को विदेशी नागरिकों की अपर्याप्त जांच-पड़ताल (vetting) और वीज़ा ओवरस्टे के खतरे से जोड़ा।
“बोल्डर में हुआ हालिया आतंकी हमला दर्शाता है कि विदेशी नागरिक जो पर्याप्त रूप से जांचे नहीं गए हैं, वे देश के लिए बेहद खतरनाक हो सकते हैं,” ट्रंप ने कहा। “हम उन्हें नहीं चाहते।”
यात्रा प्रतिबंध क्या होता है?
यात्रा प्रतिबंध (Travel Ban) एक ऐसा सरकारी कदम है, जिसके तहत किसी देश के नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर आंशिक या पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाता है। यह प्रतिबंध वीज़ा देने पर रोक या केवल कुछ वीज़ा कैटेगरी को सीमित करने के रूप में हो सकता है।
राष्ट्रपति की घोषणा और उसका महत्व
राष्ट्रपति की घोषणा (Presidential Proclamation) एक आधिकारिक सार्वजनिक घोषणा होती है, जो कई बार नीति-निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह घोषणा ट्रंप के पहले कार्यकाल में जारी उस आदेश पर आधारित है जिसमें विदेश विभाग को कमज़ोर दस्तावेज़ प्रणाली वाले देशों की पहचान करने को कहा गया था।
व्हाइट हाउस के अनुसार:
“घोषणा के तहत 12 ऐसे देशों के नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है, जो उचित जांच-पड़ताल और दस्तावेज़ सत्यापन में विफल पाए गए हैं।”
यह प्रतिबंध कब से लागू होगा?
व्हाइट हाउस के अनुसार, यह नया यात्रा प्रतिबंध सोमवार से प्रभावी होगा।
क्या प्रतिबंध में बदलाव संभव है?
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
“यह सूची समय के साथ बदली जा सकती है यदि कोई देश अपने दस्तावेजी तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार करता है, और यदि नए खतरे सामने आते हैं तो अन्य देशों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है,” उन्होंने कहा।
पिछले साल चुनावी अभियान में ट्रंप ने कहा था:
“मैं गाज़ा पट्टी जैसे आतंकग्रस्त इलाकों से आने वाले शरणार्थियों पर रोक लगाऊंगा। याद है मेरा फेमस ट्रैवल बैन? हम संक्रमित देशों से लोगों को नहीं लेंगे।”
इन देशों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है
(व्हाइट हाउस द्वारा जारी विवरण के अनुसार)
- अफ़ग़ानिस्तान – तालिबान का नियंत्रण, वैध दस्तावेज़ों की कमी।
- म्यांमार (बर्मा) – अत्यधिक वीज़ा ओवरस्टे दर, पुनःप्रवासन में असहयोग।
- चाड – 49% से अधिक वीज़ा ओवरस्टे दर।
- कांगो गणराज्य – दस्तावेज़ प्रणाली में खामी और वीज़ा ओवरस्टे।
- इक्वेटोरियल गिनी – छात्र वीज़ा ओवरस्टे दर 70% से अधिक।
- इरिट्रिया – दस्तावेज़ों की विश्वसनीयता नहीं, आपराधिक रिकॉर्ड अनुपलब्ध।
- हैती – बड़े पैमाने पर अवैध प्रवेश और सुरक्षा जोखिम।
- ईरान – आतंकवाद का समर्थन, अमेरिकी सहयोग से इनकार।
- लीबिया – सरकार का विघटन, आतंकवादी गतिविधियां।
- सोमालिया – उपयुक्त सरकारी संरचना का अभाव।
- सूडान – दस्तावेज़ी प्रणाली का विफल होना।
- यमन – निरंतर संघर्ष और सुरक्षा ढांचे की कमी।
इन देशों पर आंशिक प्रतिबंध लगाया गया है
निम्नलिखित 7 देशों के नागरिकों पर आंशिक यात्रा प्रतिबंध लागू किए गए हैं:
- बुरुंडी
- क्यूबा
- लाओस
- सिएरा लियोन
- टोगो
- तुर्कमेनिस्तान
- वेनेज़ुएला
इन देशों को क्यों चुना गया?
घोषणा के अनुसार, इन देशों को तीन प्रमुख कारणों से निशाना बनाया गया:
- दस्तावेज़ सत्यापन प्रणाली की कमी – अफ़ग़ानिस्तान, सोमालिया, यमन, सूडान, लीबिया, और वेनेज़ुएला जैसे देशों में पहचान सत्यापन और दस्तावेज़ व्यवस्था कमजोर है।
- वीज़ा ओवरस्टे दर बहुत अधिक – म्यांमार, चाड, कांगो, हैती, इक्वेटोरियल गिनी, बुरुंडी आदि देशों में अमेरिकी वीज़ा धारक बड़ी संख्या में ओवरस्टे कर रहे हैं।
- आतंकवाद या उसका समर्थन – ईरान, अफगानिस्तान, क्यूबा जैसे देशों को आतंकवाद से जुड़ा माना गया है।
आगे क्या?
हालांकि इस फैसले को लेकर कानूनी चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी इमिग्रेशन नीति को फिर से कठोर रूप दिया है। यह प्रतिबंध आगे भी बदलते वैश्विक खतरों और राजनयिक परिस्थितियों के अनुसार संशोधित किया जा सकता है।
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