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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उन्नाव रेप पीड़िता को मिली राहत, बोलीं- ‘जब तक उसे फांसी नहीं होती, मेरी लड़ाई जारी रहेगी’

| Updated: December 30, 2025 15:42

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर की उम्रकैद के निलंबन पर लगाई रोक; पीड़िता ने जताई खुशी, कहा- 'न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा, फांसी होने तक लड़ूंगी जंग।'

नई दिल्ली/उन्नाव: उन्नाव रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सोमवार को दिए गए अहम फैसले के बाद पीड़िता ने संतोष व्यक्त किया है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें दोषी और पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर दिया गया था। इस फैसले का स्वागत करते हुए पीड़िता ने अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प दोहराया है।

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पीड़िता ने कहा, “मैं इस फैसले से बहुत खुश हूं। मुझे सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिला है। मैंने शुरुआत से ही न्याय के लिए आवाज उठाई है और मुझे अदालतों पर पूरा भरोसा है।” उसने दृढ़ता से कहा, “जब तक उसे (सेंगर) फांसी के फंदे पर नहीं लटका दिया जाता, मैं चैन से नहीं बैठूंगी। मैं अपनी लड़ाई लड़ती रहूंगी, तभी मेरे परिवार और मुझे असली न्याय मिलेगा। हमें आज भी धमकियां मिल रही हैं।”

सीबीआई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर को 2017 के उन्नाव रेप मामले में सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित करते हुए उसे जमानत दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने न केवल हाईकोर्ट के इस आदेश पर रोक लगाई, बल्कि कुलदीप सेंगर को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।

‘वह दरिंदा है, उसे रिहा नहीं होना चाहिए’

पीड़िता के परिवार ने भी इस फैसले पर राहत की सांस ली है। पीड़िता की बहन ने कहा कि उनका न्याय व्यवस्था पर भरोसा और गहरा हुआ है। उन्होंने कहा, “वह एक दरिंदा है। पहले उसने मेरी बहन के साथ रेप किया और फिर हमारे पूरे हंसते-खेलते परिवार को बर्बाद कर दिया। आज मैं संतुष्ट हूं। उसकी जमानत रद्द ही रहनी चाहिए।”

वहीं, पीड़िता की मां ने शीर्ष अदालत का धन्यवाद करते हुए कहा कि जिन्होंने उनके पति की हत्या की, उन्हें भी मृत्युदंड मिलना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह लड़ाई सिर्फ एक पीड़िता की नहीं, बल्कि देश की सभी बेटियों की है। सुप्रीम कोर्ट ने खुद माना है कि यह मामला सामान्य नहीं है।”

क्या था दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश?

इससे पहले, 23 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर को नियमित जमानत देते हुए उसकी उम्रकैद की सजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया था। कोर्ट ने उसे 15 लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी थी और शर्त रखी थी कि वह दिल्ली में पीड़िता के घर के 5 किलोमीटर के दायरे में नहीं जाएगा और न ही परिवार को धमकाएगा। इस आदेश के बाद पीड़िता की सुरक्षा को लेकर चिंताएं जताई जा रही थीं।

हालांकि, रेप मामले में जमानत मिलने के बावजूद सेंगर अभी जेल से बाहर नहीं आ पाता, क्योंकि वह पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में 10 साल की सजा काट रहा है और उस मामले में उसे जमानत नहीं मिली है।

घटना और कानूनी सफर पर एक नजर

अभियोजन पक्ष के अनुसार, उत्तर प्रदेश के उन्नाव में 11 जून से 20 जून 2017 के बीच कुलदीप सेंगर ने पीड़िता (जो उस समय नाबालिग थी) का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया था। इसके बाद पीड़िता को 60,000 रुपये में बेच दिया गया था, लेकिन बाद में उसे माखी पुलिस स्टेशन से बरामद कर लिया गया।

दिसंबर 2019 में एक ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (रेप) और पॉक्सो एक्ट की धारा 5(सी) और 6 के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने पीड़िता की गवाही को ‘बेदाग और सत्य’ माना था।

सियासी घमासान: कांग्रेस ने साधा निशाना

इस बीच, उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो साझा करते हुए भाजपा पर निशाना साधा है। वीडियो में कथित तौर पर लोग सेंगर के समर्थन में प्रदर्शन करते दिख रहे हैं। कांग्रेस ने इसे “शर्मनाक” करार दिया और कहा कि एक दोषी बलात्कारी के समर्थन में सड़कों पर उतरना निंदनीय है।

कांग्रेस ने अपने बयान में कहा, “उन्नाव पीड़िता ने न्याय की लड़ाई में अपना पूरा परिवार खो दिया। उसके पिता की हिरासत में मौत हो गई और रिश्तेदार एक एक्सीडेंट में मारे गए। इसके बावजूद भाजपा समर्थक एक अपराधी को बचाने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं।”

पार्टी ने आरोप लगाया कि ‘बेटी बचाओ’ का नारा देने वालों के लिए बेटियों के सम्मान से ज्यादा वोट बैंक और बाहुबल मायने रखता है।

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