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पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना: मार्च 2026 में रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में उत्तर प्रदेश बना सिरमौर

| Updated: April 6, 2026 17:19

मार्च 2026 में 52 हजार से अधिक सोलर पैनल लगाकर यूपी ने रचा इतिहास, गुजरात और महाराष्ट्र को छोड़ा पीछे।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के डैशबोर्ड से प्राप्त नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश ने मार्च 2026 में भारत में सबसे अधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन का रिकॉर्ड दर्ज किया है। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत मिली यह उपलब्धि राज्य में विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने की दिशा में एक मजबूत और सकारात्मक वृद्धि को दर्शाती है।

आधिकारिक आंकड़ों की मानें तो इस महीने के दौरान यूपी ने कुल 52,729 रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए हैं। इसके साथ ही राज्य ने गुजरात, महाराष्ट्र और केरल जैसे अन्य बड़े राज्यों को भी बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया है।

इस योजना की शुरुआत के बाद से किसी भी राज्य द्वारा किया गया यह अब तक का सबसे बड़ा मासिक डिप्लॉयमेंट है। जुलाई 2025 से ही उत्तर प्रदेश लगातार शीर्ष दो राज्यों में अपनी जगह बनाए हुए है, जो इस क्षेत्र में हो रहे निरंतर विकास का स्पष्ट संकेत है।

शीर्ष तीन राज्यों में बनाई मजबूत पकड़

कुल इंस्टॉलेशन की बात करें तो 448,233 सिस्टम के साथ उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे स्थान पर काबिज है। हालांकि, मौजूदा विकास दर को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले कुछ ही महीनों में यूपी महाराष्ट्र से भी आगे निकल सकता है।

31 मार्च को राज्य ने एक ही दिन में 3,188 सिस्टम स्थापित करने का अपना अब तक का सबसे बड़ा दैनिक रिकॉर्ड भी बनाया। इसके अलावा, राज्य की कुल स्थापित रूफटॉप सोलर क्षमता अब 1,524.61 मेगावाट के प्रभावशाली आंकड़े तक पहुंच गई है।

करोड़ों की बचत और भारी सब्सिडी का लाभ

इस योजना के तहत राज्य में सब्सिडी वितरण ₹4,000 करोड़ का आंकड़ा पार कर गया है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से दिए गए ₹2,985 करोड़ भी शामिल हैं, जिससे प्रदेश के एक बड़े वर्ग को सीधा फायदा पहुंचा है।

अधिकारियों के मुताबिक, छतों पर सोलर पैनल लगाने से जमीनी संसाधनों पर दबाव काफी कम हो रहा है और अनुमान है कि इससे पारंपरिक ग्राउंड-माउंटेड क्षमता की तुलना में लगभग 6,000 एकड़ जमीन की बचत हुई है।

वर्तमान में स्थापित सिस्टम हर दिन लगभग 6.8 से 7.0 मिलियन यूनिट बिजली पैदा कर रहे हैं। इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को रोजाना करीब ₹4 से ₹4.5 करोड़ की भारी बचत हो रही है।

कार्बन उत्सर्जन में कमी और रोजगार के नए अवसर

सोलर इंस्टॉलेशन में हो रही यह तेज वृद्धि कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी अहम भूमिका निभा रही है। एक अनुमान के मुताबिक, इससे सालाना लगभग 2.2 से 2.3 मिलियन टन तेल समकक्ष (tonnes of oil equivalent) कार्बन की बचत हो रही है। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ने सौर ऊर्जा की पूरी वैल्यू चेन में रोजगार के बड़े अवसर भी पैदा किए हैं।

आंकड़ों के अनुसार, अब तक करीब 65,000 प्रत्यक्ष और 100,000 से अधिक अप्रत्यक्ष नौकरियां सृजित हुई हैं। इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (UPNEDA) के साथ 5,000 से अधिक कंपनियों को पैनल में शामिल किया गया है, जो इस काम में अपना लगातार सहयोग दे रही हैं।

इस योजना ने स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में बड़ा योगदान दिया है, जिससे तकनीकी स्नातकों को अपने ही राज्य में काम मिल रहा है और पलायन में भी भारी कमी आई है। भारत अपने स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के एक बड़े लक्ष्य के तहत रूफटॉप सोलर क्षमता का लगातार विस्तार कर रहा है।

सरकार द्वारा समर्थित ये सब्सिडी कार्यक्रम परिवारों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, ताकि भविष्य में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर हमारी निर्भरता को कम किया जा सके।

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