लखनऊ/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची (Voter List) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मंगलवार को प्रदेश की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर दी है, जिसमें भारी संख्या में नाम हटाए गए हैं। ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) यानी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान के बाद राज्य की मतदाता सूची से करीब 2.89 करोड़ वोटरों के नाम काट दिए गए हैं।
इस बड़े बदलाव के बाद अब प्रदेश में मतदाताओं की कुल संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
आंकड़ों की जुबानी: 15 करोड़ से घटकर 12 करोड़ हुए वोटर
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने इन आंकड़ों की पुष्टि करते हुए बताया कि पुनरीक्षण (Revision) से पहले राज्य की मतदाता सूची में कुल 15.44 करोड़ वोटर थे। छंटनी की इस प्रक्रिया के बाद यह संख्या घटकर 12.55 करोड़ रह गई है। यानी सीधे तौर पर 2.89 करोड़ नामों को सूची से बाहर कर दिया गया है।
सरल शब्दों में समझें तो, यूपी की मौजूदा ड्राफ्ट वोटर लिस्ट अब 18.7 प्रतिशत छोटी हो गई है। इसका मतलब है कि राज्य के हर पांच में से लगभग एक वोटर का नाम लिस्ट से हटा दिया गया है।
क्यों काटे गए इतने बड़े पैमाने पर नाम?
चुनाव आयोग ने इन नामों को हटाने के पीछे ठोस वजहें भी बताई हैं। आयोग के बयान के अनुसार, 27 अक्टूबर 2025 तक इलेक्टोरल रोल में 15,44,30,092 मतदाता थे, जिनमें से 26 दिसंबर 2025 तक चले अभियान के दौरान 12,55,56,025 मतदाताओं ने ही अपने फॉर्म जमा किए।
जिन लोगों के नाम लिस्ट से हटाए गए हैं, उन्हें तीन श्रेणियों में बांटा गया है:
- शिफ्टेड (Shifted): सबसे ज्यादा 2.17 करोड़ (14.06%) नाम उन लोगों के हैं जो अपना स्थान बदल चुके हैं या कहीं और शिफ्ट हो गए हैं।
- मृतक (Deceased): लगभग 46.23 लाख (2.99%) नाम उन मतदाताओं के हैं जिनका निधन हो चुका है।
- डुप्लीकेट (Duplicate): करीब 25.46 लाख (1.65%) नाम ऐसे थे जो दो बार दर्ज थे या डुप्लीकेट थे।
अगर आपका नाम कट गया है, तो अभी भी है मौका
अगर आप एक वास्तविक और योग्य मतदाता हैं और आपका नाम गलती से इस लिस्ट से हट गया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग ने नाम दोबारा जुड़वाने का रास्ता खुला रखा है।
आयोग ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि “दावे और आपत्ति” (Claims and Objection) की अवधि 06 जनवरी 2026 से 06 फरवरी 2026 तक है। इस दौरान कोई भी छूटा हुआ पात्र नागरिक ‘फॉर्म-6’ भरकर, घोषणा पत्र और जरूरी दस्तावेजों के साथ जमा कर सकता है और अपना नाम दोबारा लिस्ट में शामिल करवा सकता है।
समय सीमा बढ़ानी पड़ी थी
गौर करने वाली बात यह है कि वोटर लिस्ट के सत्यापन की यह प्रक्रिया पहले 11 दिसंबर को खत्म होनी थी। लेकिन, जब अधिकारियों ने देखा कि ड्राफ्ट लिस्ट से करीब 2.97 करोड़ नाम बाहर हो रहे हैं, तो राज्य ने 15 दिनों का अतिरिक्त समय मांगा था। इसके बाद समय सीमा बढ़ाई गई थी।
अन्य राज्यों का हाल
सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अन्य बड़े राज्यों में भी वोटर लिस्ट छोटी हुई है। चुनाव आयोग ने हाल ही में तमिलनाडु और गुजरात में भी SIR की प्रक्रिया पूरी की है। वहां मतदाता सूची में क्रमशः 97 लाख और 74 लाख वोटरों की कमी आई है। इसके अलावा, असम में विशेष गणना के बाद जारी ड्राफ्ट रोल में 10.56 लाख नाम कम हुए हैं।
यह भी पढ़ें-










