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H-1B वीजा पर बड़ा संकट: अमेरिका में इसे पूरी तरह खत्म करने के लिए ‘EXILE Act’ पेश, भारतीयों पर होगा असर

| Updated: February 11, 2026 14:42

अमेरिका में H-1B वीजा को जड़ से खत्म करने की तैयारी? रिपब्लिकन सांसद ने पेश किया 'EXILE Act', जानिए क्यों भारतीयों की नौकरियों पर लटकी है तलवार और क्या है ट्रम्प प्रशासन का रुख।

वाशिंगटन: अमेरिका में H-1B वीजा कार्यक्रम को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। फ्लोरिडा से रिपब्लिकन सांसद ग्रेग स्ट्यूब (Greg Steube) ने एक नया विधेयक पेश किया है, जिसका मकसद H-1B वीजा कैटेगरी को पूरी तरह से समाप्त करना है। उनका तर्क है कि बड़ी कंपनियां इस वीजा का दुरुपयोग कर रही हैं और सस्ते विदेशी मजदूरों को तरजीह देकर अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छीन रही हैं।

क्या है ‘EXILE एक्ट’?

सांसद ग्रेग स्ट्यूब ने ‘एंडिंग एक्सप्लॉइटेटिव इंपोर्टेड लेबर एग्जम्पशन्स एक्ट’ (Ending Exploitative Imported Labour Exemptions Act), यानी EXILE Act पेश किया है। यह विधेयक इमिग्रेशन एंड नेशनैलिटी एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव करता है ताकि H-1B वीजा श्रेणी को हमेशा के लिए खत्म किया जा सके।

इस बिल की घोषणा करते हुए स्ट्यूब ने कहा कि मौजूदा वीजा प्रणाली ने बार-बार अमेरिकी श्रमिकों को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने अपने बयान में जोर देकर कहा, “अमेरिकी नागरिकों की भलाई और समृद्धि के ऊपर विदेशी श्रम को प्राथमिकता देना हमारे मूल्यों और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है।”

उन्होंने आगे कहा, “H-1B वीजा कार्यक्रम के कारण हमारे कामगारों और युवाओं को दरकिनार किया जा रहा है। यह सिस्टम हमारे वर्कफोर्स की कीमत पर कॉरपोरेट जगत और विदेशी प्रतिस्पर्धियों को फायदा पहुंचा रहा है। हम अपने बच्चों के ‘अमेरिकी सपने’ (American Dream) को सुरक्षित रखने के बजाय उसे गैर-नागरिकों को नहीं सौंप सकते। इसीलिए मैं कामकाजी अमेरिकियों को फिर से प्राथमिकता देने के लिए EXILE एक्ट ला रहा हूं।”

ट्रंप प्रशासन की सख्त नीतियों का असर

यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त आव्रजन नीतियों के बीच आया है, जो कानूनी और अवैध दोनों तरह के प्रवासन (migration) पर कड़ा रुख अपनाए हुए हैं।

गौरतलब है कि पिछले साल, राष्ट्रपति ट्रंप ने H-1B कार्यक्रम के दुरुपयोग को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बताया था। उन्होंने एक उद्घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत नए H-1B वीजा पर $100,000 (करीब 83-84 लाख रुपये) का भारी-भरकम शुल्क लगाया गया था। इस फैसले ने विदेशी पेशेवरों, विशेषकर भारतीयों में चिंता की लहर पैदा कर दी थी, क्योंकि H-1B धारकों में सबसे बड़ा समूह भारतीयों का ही है।

सांसद स्ट्यूब के बयान में दिए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, H-1B वीजा पाने वालों में 80 प्रतिशत से अधिक भारतीय या चीनी नागरिक होते हैं, और इसमें युवाओं को प्राथमिकता दी जाती है।

अमेरिकी नौकरियों पर कथित प्रभाव: चौंकाने वाले दावे

EXILE एक्ट के समर्थन में जारी बयान में कई ऐसे मामलों का हवाला दिया गया है, जो यह दावा करते हैं कि इस वीजा प्रोग्राम ने अमेरिकी कर्मचारियों को भारी नुकसान पहुंचाया है:

  • चिकित्सा क्षेत्र: दावा किया गया है कि इस कार्यक्रम ने 10,000 से अधिक अमेरिकी चिकित्सकों को रेजीडेंसी प्रोग्राम में जगह मिलने से रोक दिया, जबकि 5,000 से अधिक विदेशी मूल के डॉक्टरों के आगमन को सुगम बनाया।
  • टेक सेक्टर: बयान में आरोप है कि साल 2025 में 9,000 से अधिक H-1B वीजा मंजूर किए गए, जिसके बाद माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) के 16,000 से अधिक कर्मचारियों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी।
  • लॉजिस्टिक्स: स्ट्यूब के कार्यालय ने आरोप लगाया कि फेडेक्स (FedEx) द्वारा H-1B वीजा के इस्तेमाल के कारण पूरे अमेरिका में 100 से अधिक फैसिलिटी बंद हो गईं।
  • पुराने उदाहरण: बयान में 2015 का डिज्नी (Disney) का मामला भी उठाया गया, जहां 250 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया और उनकी जगह विदेशी कामगारों को रखा गया। इसी तरह, 2014 में सदर्न कैलिफोर्निया एडिसन (Southern California Edison) ने 540 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया, जिनकी जगह दो भारतीय आउटसोर्सिंग कंपनियों के स्टाफ ने ले ली थी।

भारतीयों के लिए इसका क्या मतलब है?

चूंकि H-1B वीजा धारकों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है, इसलिए इस प्रस्तावित कानून और नीतियों में बदलाव का सीधा असर उन पर पड़ेगा।

पिछले साल 15 दिसंबर से अमेरिकी विदेश विभाग ने H-1B और आश्रित H-4 वीजा के लिए स्क्रीनिंग और वेटिंग प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है। अब वीजा समीक्षा प्रक्रिया के हिस्से के रूप में आवेदकों के सोशल मीडिया प्रोफाइल की भी जांच की जा रही है।

नतीजतन, भारत भर में निर्धारित कई H-1B वीजा साक्षात्कार (interviews) महीनों के लिए टाल दिए गए हैं। कई वीजा धारक, जो वीजा स्टैम्पिंग के लिए भारत आए थे, अब फंस गए हैं और योजना के अनुसार अमेरिका लौटने में असमर्थ हैं।

हालांकि आव्रजन विशेषज्ञों का मानना है कि EXILE एक्ट को कानून बनने के लिए एक कठिन विधायी रास्ते से गुजरना होगा, लेकिन इसका पेश किया जाना ही H-1B कार्यक्रम के प्रति बढ़ती राजनीतिक नाराजगी को दर्शाता है।

अमेरिका में करियर बनाने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए यह बिल वीजा प्रोसेसिंग, लागत और लंबी अवधि की नौकरी की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता को और बढ़ा देता है।

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