अहमदाबाद: अमेरिका में अवैध रूप से प्रवेश कराने वाले एक सिंडिकेट का शिकार होकर भारत डिपोर्ट हुए एक व्यक्ति ने शनिवार को अडालज पुलिस स्टेशन में आपराधिक मामला दर्ज कराया है। पीड़ित का आरोप है कि उसके साथ करोड़ों रुपये की ठगी की गई और उसे बंधुआ मजदूर की तरह काम करने के लिए मजबूर किया गया। उसने पुलिस को बताया कि चार एजेंटों ने उसे अमेरिका में कानूनी रूप से बसने और रोजगार दिलाने का झांसा दिया था।
हैरान करने वाली बात यह है कि इस मामले के मुख्य आरोपी के तार डिंगुचा के उस बहुचर्चित मामले से जुड़े हैं, जहां अमेरिका की सीमा पार करते समय ठंड से जमकर एक ही परिवार के चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
व्यापार के सिलसिले में अमेरिका जाने का सपना देख रहे इस शख्स का संपर्क एक ऐसे नेटवर्क से हुआ जिसने उसे आसानी से वहां भेजने का दावा किया था। दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, एक आरोपी ने पीड़ित और उसके माता-पिता को अमेरिका भेजने का कुल खर्च 3.20 करोड़ रुपये बताया था। इस भारी-भरकम रकम पर आरोपी ने हर महीने एक प्रतिशत ब्याज देने की शर्त भी रखी थी।
पीड़ित इस उम्मीद में राजी हो गया कि यह पूरी प्रक्रिया कानूनी होगी और उसे अमेरिका में काम मिल जाएगा जिससे वह यह कर्ज चुका सकेगा। इसके बाद एजेंटों ने वीजा आवेदन को मजबूत बनाने के लिए जाली इमिग्रेशन दस्तावेज तैयार किए और पासपोर्ट में फर्जी मुहरें लगाकर एक झूठी ट्रैवल हिस्ट्री बना दी। आरोपियों ने बेशर्मी से पीड़ित के सामने यह कबूल भी किया था कि पासपोर्ट पर लगे सभी स्टैंप नकली हैं।
साजिश के तहत पीड़ित और उसके माता-पिता को सबसे पहले कनाडा भेजा गया। वहां उनके वीजा रद्द हो गए, जिसके कारण उन्हें शरण (असाइलम) मांगनी पड़ी। इसके बाद एक बिचौलिए के निर्देश पर इस परिवार ने रात के अंधेरे में पैदल चलकर अमेरिका की सीमा पार की।
अमेरिका पहुंचने के बाद इस परिवार को एक शहर में ले जाया गया, जहां उनके साथ अमानवीय व्यवहार शुरू हो गया। पीड़ित और उसके परिवार को बेहद खराब परिस्थितियों में रोजाना 14 से 16 घंटे तक काम करने के लिए मजबूर किया गया। शुरुआत में उन्हें 10 डॉलर प्रति घंटे के हिसाब से मजदूरी देने का वादा किया गया था, लेकिन बाद में इसे घटाकर महज 3 डॉलर प्रति घंटे कर दिया गया।
जब पीड़ित ने इस शोषण का विरोध किया, तो आरोपियों ने उसे धमकाते हुए कहा कि उसे वहां “गुलाम” की तरह काम करना ही होगा। उसे यह भी डराया गया कि अगर उसने वहां से भागने की कोशिश की तो अमेरिका में उसके खिलाफ झूठे मामले दर्ज करवा दिए जाएंगे।
इतना ही नहीं, आरोपियों ने चेतावनी दी कि यदि उसने पुलिस से संपर्क किया तो भारत में मौजूद उसके रिश्तेदारों को नुकसान पहुंचाया जाएगा।
सितंबर 2025 में पीड़ित को अमेरिका से डिपोर्ट कर दिया गया और वह वापस भारत लौट आया। हालांकि, उसके माता-पिता अभी भी अमेरिका में ही फंसे हुए बताए जा रहे हैं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उसका परिवार अब तक लगभग 1.95 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद आरोपी लगातार 2.7 करोड़ रुपये की और मांग कर रहे हैं। इस गंभीर शिकायत के आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी, मानव तस्करी, जबरन वसूली और आपराधिक धमकी के आरोपों के तहत जांच शुरू कर दी है।
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